कोरोना का संक्रमण पिछले दो साल से अधिक समय से पूरी दुनिया के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। जिस तरह से सामने आ रहे नए वैरिएंट्स की संक्रामकता दर देखी जा रही है, वह निश्चित ही चिंता बढ़ाने वाली है। संक्रमण के साथ-साथ लॉन्ग कोविड के मामले भी रोगियों और स्वास्थ्य क्षेत्र दोनों के लिए परेशानियां बढ़ाने वाला है। कुछ अध्ययनों में यहां तक भी दावा किया जा रहा है कि पोस्ट कोविड सिंड्रोम के मामले, छह माह से लेकर एक साल तक भी बने रह सकते हैं। कुछ स्थितियों में इनके गंभीर रूप लेने का भी खतरा होता है, ऐसे में संक्रमण से ठीक हो जाने के बाद भी सभी लोगों को अपने लक्षणों की निगरानी करते रहना चाहिए।
Long Covid: अध्ययन में दावा- महिलाओं में पोस्ट कोविड सिंड्रोम का खतरा अधिक, ऐसे लक्षणों को लेकर बरतें सावधानी
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महिलाओं में लॉन्ग कोविड का खतरा अधिक
जर्नल ऑफ विमेन हेल्थ में पीयर-रिव्यू शोध के मुताबिक पुरुषों की तुलना में महिलाओं में लॉन्ग कोविड के लक्षण होने का खतरा अधिक हो सकता है। संक्रमण से ठीक हो चुकी महिलाओं में थकान, सीने में दर्द, भोजन को निगलने में कठिनाई जैसी समस्याओं का जोखिम अधिक देखा गया है।
कोविड-19 के प्रभावों को लेकर हुए इससे पहले के शोध में बताया गया था कि वैसे तो महिलाओं में कोरोना संक्रमण होने या गंभीर रोग विकसित होने का खतरा कम होता है, हालांकि अगर इनमें संक्रमण हो जाए तो पोस्ट कोविड की समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।
लॉन्ग कोविड का जोखिम
इसी तरह लैंसेट रेस्पिरेटरी मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि महिलाओं में संक्रमण से ठीक होने के बाद पोस्ट कोविड की समस्याओं का जोखिम अधिक हो सकता है। इतना ही नहीं अगर समय पर प्रभावी उपचार न मिल पाए तो महिलाओं में लॉन्ग कोविड के लक्षण भी गंभीर हो सकते हैं, जो दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को बढ़ावा दे सकते हैं।
यूके शोधकर्ताओं के मुताबिक कोविड-19 के कारण अस्पताल में भर्ती रह चुके दो-तिहाई से अधिक लोग अभी भी लॉन्ग कोविड के लक्षणों के शिकार हैं। इसमें महिलाओं और अधिक वजन वाले लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है।
अध्ययन में क्या पता चला?
इस शोध के लिए 2,300 से अधिक लोगों को शामिल किया गया, ये सभी संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती रह चुके थे। अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि संक्रमण से ठीक होने के पांच महीने बाद केवल 26 फीसदी लोग पूरी तरह से ठीक हो पाए हैं, जबकि करीब 29 फीसदी लोगों को ठीक होने में एक साल से अधिक का समय लगा। अध्ययन के मुताबिक, पुरुषों की तुलना में महिलाओं के जल्दी पूरी तरह ठीक होने की संभावना 33 फीसदी कम पाई गई।
इन लक्षणों के मामले अधिक
शोधकर्ताओं ने पाया कि लॉन्ग कोविड के शिकार लोगों में सांस फूलना, थकान, मांसपेशियों में दर्द, नींद की समस्या, अंगों की कमजोरी और मानसिक स्वास्थ्य की दिक्कतें अधिक देखने को मिलती हैं। महिलाओं में यह लक्षण गंभीर भी हो सकते हैं।
वैज्ञानिकों का कहना है कि तेजी से बढ़ते संक्रमण और लॉन्ग कोविड को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं की तत्काल आवश्यकता थी। कुछ लक्षण समय के साथ गंभीर भी हो सकते हैं, जिनमें विशेष देखभाल की जरूरत होती है।