अक्सर हम अपनी सेहत से जुड़े छोटे-छोटे बदलावों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। कभी पैरों में दर्द होना, कभी अचानक सूजन आ जाना या फिर बिना ठंड के भी पंजों का ठंडा महसूस होना, ऐसी समस्याएं हैं जिन्हें ज्यादातर लोग थकान या मौसम का असर मान लेते हैं। लेकिन कई बार शरीर में होने वाले ये बदलाव किसी अंदरूनी स्वास्थ्य समस्या की ओर इशारा हो सकते हैं।
सेहत की बात: पैरों का अक्सर ठंडा रहना किस बीमारी का संकेत है? जानिए डॉक्टर से कब मिलना जरूरी
पैरों का अक्सर ठंडा रहना सिर्फ मौसम या थकान का असर नहीं हो सकता। खराब ब्लड सर्कुलेशन, एनीमिया, थायरॉयड और पेरिफेरल आर्टरी डिजीज जैसी समस्याएं इसकी वजह बन सकती हैं। पैरों में दर्द, झुनझुनी, सुन्नपन जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे अनदेखा न करें।
क्यों ठंडे रहते हैं आपके पैर?
सर्दियों में पैरों का ठंडा होना आम बात है, लेकिन अगर हर मौसम में आपके पैर अक्सर ठंडे रहते हैं, तो यह सामान्य स्थिति नहीं मानी जा सकती। इसके पीछे खराब ब्लड सर्कुलेशन एक प्रमुख कारण हो सकता है। जब शरीर के निचले हिस्सों और पैरों तक पर्याप्त मात्रा में खून नहीं पहुंचता, तो पंजों में ठंडक महसूस होने लगती है।
- थायरॉयड ग्रंथि की सक्रियता में कमी यानी हाइपोथायरायडिज्म और पेरिफेरल आर्टरी डिजीज जैसी समस्याएं भी पैरों में ठंडापन पैदा कर सकती हैं।
- इसके अलावा प्रभावित हिस्से में झुनझुनी, सुन्नपन और अकड़न जैसी दिक्कतें भी महसूस हो सकती हैं।
ब्लड सर्कुलेशन की समस्या तो नहीं?
पैरों और पंजों का बार-बार ठंडा होना रक्त संचार में गड़बड़ी का संकेत हो सकता है। दरअसल, धमनियों में कोलेस्ट्रॉल या अन्य कारणों से प्लाक जमा होने पर रक्त वाहिकाएं संकरी और सख्त हो सकती हैं। इससे पैरों तक खून का प्रवाह प्रभावित होता है।
- ऐसी स्थिति में पैरों को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिल पाते। लंबे समय तक रक्त संचार प्रभावित रहने से दर्द, चलने में परेशानी और ऊतकों को नुकसान पहुंचने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
इन बीमारियों की ओर भी दें ध्यान
अगर आपके पैर अक्सर ठंडे रहते हैं, तो इसके पीछे कुछ स्वास्थ्य समस्याएं जिम्मेदार हो सकती हैं।
- शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी होने से ठंड अधिक महसूस हो सकती है।
- दिल की पंपिंग क्षमता प्रभावित होने पर रक्त संचार में परेशानी हो सकती है। ये इसका भी संकेत हो सकता है।
- थायरॉयड हार्मोन कम बनने से शरीर का तापमान प्रभावित हो सकता है।
- पेरिफेरल आर्टरी डिजीज धमनियों में सिकुड़न या रुकावट पैदा करती है जिससे पैरों तक खून कम पहुंचता है।
- तंत्रिका संबंधी समस्याएं और नसों को नुकसान पहुंचने से ठंडक, झुनझुनी और सुन्नपन महसूस हो सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर बिना ज्यादा चलने-फिरने या शारीरिक मेहनत के भी पैरों में लगातार दर्द बना रहता है, तो यह विटामिन बी12 की कमी या डायबिटिक न्यूरोपैथी का संकेत हो सकता है। इसी तरह पैरों और टखनों में बार-बार सूजन आना भी किसी अंदरूनी बीमारी की ओर संकेत माना जाता है। इसलिए पैरों में लगातार ठंडापन, दर्द, सुन्नपन या सूजन बनी रहे तो डॉक्टर से सलाह लें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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