शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जितना जरूरी लाइफस्टाइल और आहार को ठीक रखना है, उतना ही जरूरी है रोजाना रात में 7-9 घंटे की अच्छी नींद लेना। नींद केवल आराम का समय नहीं है, बल्कि यह शरीर को रिपेयर करने की प्रक्रिया भी है। अगर किसी कारणवश आप एक रात भी नींद पूरी नहीं कर पाते हैं तो अगले दिन थकान, सुस्ती, चिड़चिड़ापन, सिरदर्द जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। वहीं अगर नींद की यह समस्या अक्सर बनी रहती है तो इसके कारण ब्लड प्रेशर बढ़ने से लेकर शरीर में और भी कई प्रकार की दिक्कतों का खतरा हो सकता है।
Sleep Disturbance: हजारों बीमारियों का घर है नींद की कमी, आपकी नींद पूरी हो रही है या नहीं? ऐसे जानें
वयस्कों को रात में 6-8 घंटे की निर्बाध नींद लेने की सलाह दी जाती है। अगर किसी कारणवश आप एक रात भी नींद पूरी नहीं कर पाते हैं तो अगले दिन थकान, सुस्ती, चिड़चिड़ापन, सिरदर्द जैसी दिक्कतें होने लगती हैं।
नींद की कमी आपको कर सकती है बीमार
अध्ययनों से पता चलता है कि लगातार नींद की कमी से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, डिप्रेशन और हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है। नींद के दौरान शरीर कोशिकाओं की मरम्मत करता है, टॉक्सिन्स बाहर निकालता है और मेमोरी को व्यवस्थित करता है।
- जो लोग रात में अच्छी नींद नहीं ले पाते हैं उन्हें निर्णय लेने में कठिनाई, चिड़चिड़ापन और दिन के समय काम में मन न लगने की दिक्कतें हो सकती हैं।
- नींद संबंधी विकारों के कारण अक्सर दिन में थकान महसूस होते रहने, अनियमित श्वास की समस्या या एकाग्रता की कमी होने लगती है।
- अगर कुछ दिनों से नींद पूरी नहीं हो पा रही है तो इसके कारण व्यवहार से संबंधित समस्याएं जैसे चिड़चिड़ापन और अधिक गुस्सा आते रहने की भी दिक्कत हो सकती है।
मानसिक स्वास्थ्य पर असर
नींद विकार-अनिद्रा के शिकार लोगों में समय के साथ मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित विकारों का जोखिम भी बढ़ सकता है। ऐसे लोगों में एंग्जाइटी-स्ट्रेस की समस्या होना काफी आम है जो डिप्रेशन के खतरे को भी बढ़ाने वाली हो सकती है। रोज बनी रहने वाली नींद की कमी भी मोटापा, मधुमेह-हृदय रोग के साथ जीवन की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।
बच्चों में नींद की कमी, सीखने की क्षमता, याददाश्त और व्यक्तित्व परिवर्तन का भी कारण बन सकती है।
इन लक्षणों से जानिए नींद पूरी हो रही है या नहीं?
नींद की कमी के शारीरिक और मानसिक दोनों लक्षण दिखाई देते हैं। शारीरिक रूप से लगातार थकान, सिरदर्द, आंखों में जलन, मांसपेशियों में दर्द और बार-बार बीमार पड़ना आम संकेत हैं। मानसिक लक्षणों में चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग, चिंता, उदासी और ध्यान की कमी शामिल हैं। रिसर्च के अनुसार, कम नींद लेने वाले लोगों में डिप्रेशन और एंग्जायटी का खतरा अधिक पाया गया है।
यदि आप इन लक्षणों में से दो या इससे अधिक समस्याओं का अनुभव करते हैं तो आपको स्लीप डिस्ऑर्डर हो सकता है।
- गाड़ी चलाते अक्सर झपकी आना।
- टीवी देखते समय या पढ़ते समय थोड़ी देर में ही नींद आने लगना।
- काम-पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होना।
- काम के प्रदर्शन में कमी आना।
- अक्सर दूसरों का कहना- तुम नींद में दिख रहे हो
- याददाश्त में कमी महसूस करना।
- अपनी भावनाओं को प्रबंधित करने में कठिनाई होना।
- दिन में बहुत तेज नींद आना।
--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।