कोरोना की संभावित तीसरी लहर से बचाने में वैक्सीनेशन का महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। हालांकि तीसरी लहर से बच्चों को कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है, यह सवाल अब भी लोगों के मन में बना हुआ है। गौरतलब है कि देश में अब भी बच्चों के लिए कोरोना की वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, कुछ वैक्सीन पर परीक्षण जरूर चल रहा है हालांकि इसके सितंबर-अक्टूबर से पहले तक उपलब्ध होने की संभावना नहीं है। ऐसे में लोगों को डर हैं कि अगर कोरोना की लहर पहले आ जाती है तो बच्चों को इससे किस तरह से सुरक्षित रखा जा सकता है?
कोरोना की तीसरी लहर: बच्चों को संक्रमण से बचाने में कितनी कारगर है यह वैक्सीन? जानिए विस्तार से
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फ्लू की वैक्सीन और कोविड-19
फोर्टिस अस्पताल में वरिष्ठ सलाहकार-बाल रोग विशेषज्ञ डॉ जेसल शेठ कहती हैं, इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) पांच साल से कम उम्र के सभी बच्चों को सालाना फ्लू शॉट देने की सलाह देता है। अमेरिका में कोविड-19 से संक्रमित बच्चों के बीच किए गए हालिया अध्ययनों से पता चला है कि जिन बच्चों को साल 2019-20 में इन्फ्लूएंजा वैक्सीन का टीका लगा था, उनमें कोविड-19 का जोखिम अन्य बच्चों की तुलना में काफी कम पाया गया। इस आधार पर भारत में भी बच्चों को फ्लू के टीके देकर कोरोना के संक्रमण से बचाने की कोशिश की जी सकती है।
दोनों वायरस में काफी हद तक समानता
डॉ शेठ के मुताबिक अध्ययन में पाया गया कि फ्लू की वैक्सीन बच्चों में कोरोना से गंभीर संक्रमण के जोखिम को कम कर सकती है। सार्स-सीओवी-2 और इन्फ्लूएंजा वायरस में कुछ समानताएं देखी गई हैं। दुनियाभर में फैले संक्रमण से बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए फ्लू शॉट्स दिए जा सकते हैं। इससे बच्चों को संक्रमण के जोखिम से बचाने और बच्चों के लिए संभावित तीसरी लहर में संक्रमण की गंभीरता को कम करने में काफी हद तक मदद मिल सकती है।
डॉ शेठ कहती हैं कि हमें यह ध्यान रखना होगा कि फ्लू और कोविड की वैक्सीन अलग हैं। जब तक देश में बच्चों के लिए कोरोना की वैक्सीन उपलब्ध नहीं हो जाती है, फ्लू की वैक्सीन देकर उन्हें सुरक्षित किया जा सकता है। दो टीकों के बीच चार सप्ताह के अंतराल को बनाए रखने की आवश्यकता है ताकि बच्चे के शरीर को एंटीबॉडी विकसित करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि फिलहाल भारत सरकार ने कोरोना से सुरक्षित रखने के लिए फ्लू की वैक्सीन को विकल्प के तौर पर प्रयोग में लाने के संबंध में कोई निर्देश नहीं दिया है।
बच्चों में संक्रमण के बाद पाई गई हैं सुरक्षात्मक एंटीबॉडीज
हाल ही में बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) ने एक सीरो सर्वे की रिपोर्ट में बताया है कि मुंबई में तकरीबन 51 फीसदी बच्चों में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडीज मिली है। यह सर्वे 18 साल तक के बच्चों पर किया गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक इन बच्चों के शरीर में बनी एंटीबॉडीज अगले संक्रमण से सुरक्षित रखने में मददगार साबित होंगी। इसी प्रकार से देश के कई अन्य राज्यों में भी बच्चों के शरीर में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडीज पाए जाने की सूचना हैं।
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नोट: यह लेख एक अंग्रेजी अखबार में छपे रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है। अमर उजाला इस तरह का कोई दावा नहीं करता है। बच्चों को कोरोना से बचाने के उपायों के बारे में जानने के लिए डॉक्टर से संपर्क करें।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।