कोरोना वायरस का संक्रमण देश और दुनिया में बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे में दुनियाभर के लोगों को बस एक ही चीज का बेसब्री से इंतजार है और वो है कोरोना की कारगर और सुरक्षित वैक्सीन। रूस और चीन ने वैक्सीन बना लेने का दावा किया है तो वहीं भारत, अमेरिका, ब्रिटेन समेत कई देश वैक्सीन बनाने के काफी करीब हैं। इस बीच दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने वैक्सीन को लेकर एक राहत भरी बात बताई है। उन्होंने बताया है कि भारतीय बाजार में कोरोना की वैक्सीन कबतक उपलब्ध हो पाएगी। इसके साथ ही उन्होंने टीकाकरण को लेकर एक चिंता भी जताई है।
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दिल्ली एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया
- फोटो : ANI
एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में एम्स के निदेशक डॉ. गुलेरिया ने कहा कि वैक्सीन को लेकर ठीक प्रगति है। अगर सभी चीजें सही तरीके से चलती रहीं तो साल 2021 की शुरुआत में भारतीय बाजारों में कोरोना वैक्सीन की दवा उपलब्ध हो सकती है। लेकिन उन्होंने यह भी कर कहा कि दवा बाजार में तो आ तो जाएगी, लेकिन शुरुआती दौर में इसकी जितनी उपलब्धता होगी, वह देश की जनसंख्या के हिसाब से पर्याप्त नहीं होगी।
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Corona Vaccine Update
- फोटो : Pixabay/Amar Ujala
कार्यक्रम में एम्स के निदेशक ने अपनी बात में जोड़ा कि कोरोना वायरस की दवा कब आएगी, इस बात की गारंटी देना थोड़ा मुश्किल है। कारण कि कोरोना वैक्सीन की प्रगति कई पहलुओं पर निर्भर करती है। अगर हम चरणश: सफल होते रहे और सभी चीजें सही तरीके से चलती रही तो देश में जल्द ही कोरोना वैक्सीन की दवा उपलब्ध हो जाएगी।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पिक्साबे
डॉ. गुलेरिया ने यह भी कहा कि वैक्सीन विकसित हो जाने के बाद किस तरीके से बाजार में इसे उतारा जाना भी बड़ी समस्या होगी। कारण कि कई संस्थान यह कह चुके हैं कि दवा का वितरण प्राथमिकता के आधार पर होगा। सबसे पहले दवा उन्हें दी जायेगी जिन्हें संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा है।आपको बता दें कि खबरों के मुताबिक रूस ने राजधानी मॉस्को में आम लोगों के लिए वैक्सीन की पहली खेप उपलब्ध करा दी है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
अन्य विशेषज्ञों का क्या है कहना?
कोरोना वायरस की वैक्सीन विकसित करने में लगे विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड-19 के लिए प्रभावी टीका आम लोगों को साल 2021 में पतझड़ के मौसम से पहले उपलब्ध होने की संभावना नहीं है। कनाडा में मैकगिल यूनिवर्सिटी के अनुसंधानकर्ताओं ने वैक्सीन तैयार कर रहे 28 विशेषज्ञों को लेकर सर्वे किया गया। जिन विशेषज्ञों को इसमें शामिल किया गया है, उनमें अधिकतर कनाडाई या अमेरिकी वैज्ञानिक है। ये सभी विशेषज्ञ करीब 25 साल से इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं।