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Dengue vs Malaria: कुछ दिनों से बार-बार हो रहा है बुखार, डेंगू का टेस्ट कराएं या मलेरिया का? कैसे करें पता

Sat, 04 Jul 2026 06:44 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 04 Jul 2026 06:44 PM IST
सार

अगर आपको लगातार बुखार आ रहा है, ठंड लग रही है, शरीर में तेज दर्द है या प्लेटलेट्स कम होने जैसी आशंका है, तो यह समझना जरूरी है कि किस समय कौन-सी जांच अधिक उपयोगी होगी। आइए जानते हैं कि कब डेंगू का टेस्ट कराएं या मलेरिया का?

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When to go for a dengue or malaria test after a fever know malaria vs dengue symptoms
बुखार होने की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI

मानसून के दिनों में स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को अपनी सेहत को लेकर सावधानी बरतते रहने की सलाह देते हैं। मौसम में बढ़ी नमी और बरसात के कारण जमा पानी, मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ा देती है। यही कारण है कि जुलाई-अक्तूबर के महीने में अस्पतालों में तेज बुखार के लक्षण वाले मरीजों की संख्या काफी बढ़ जाती है। 



वैसे तो बुखार होना काफी सामान्य है, लेकिन अगर कुछ दिनों तक लगातार बुखार बना रहे या बार-बार वापस आ रहा हो तो डॉक्टर से मिलकर इसकी जांच जरूर करा लेनी चाहिए। कई बार ये डेंगू और मलेरिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों का संकेत भी हो सकता है। 

गौरतलब है कि डेंगू, मलेरिया और वायरल बुखार के लक्षण काफी हद तक एक जैसे दिखाई दे सकते हैं। दवा लेने से बुखार दब तो जाता है लेकिव बीमारी अंदर ही अंदर गंभीर रूप ले सकती है। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि बुखार होने पर कैसे जानें कि आपको डेंगू टेस्ट कराना चाहिए या फिर मलेरिया की जांच?

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मच्छरों से होने वाली बीमारियां - फोटो : Freepik.com

बरसात के दिनों में डेंगू और मलेरिया का खतरा

मानसून के महीनों में डेंगू और मलेरिया दोनों के मामले काफी बढ़ जाते हैं। 
 

  • डेंगू एडीज मच्छर के काटने से होने वाली बीमारी है, जबकि मलेरिया एनोफिलीज मच्छर द्वारा फैलने वाले प्लाज्मोडियम परजीवी से होता है। 
  • डेंगू फैलाने वाला मच्छर आमतौर पर दिन में काटता है, जबकि मलेरिया फैलाने वाला मच्छर शाम और रात में अधिक सक्रिय रहता है।
  • दोनों ही बीमारियों में तेज बुखार के साथ शरीर में दर्द, कमजोरी, थकान जैसी समस्याएं होती हैं। पर दोनों में समय रहते अंतर करना और इलाज जरूरी है।
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डेंगू के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Amarujala.com/AI

कब कराएं डेंगू की जांच?

डेंगू में आमतौर पर अचानक 102-104°F तक तेज बुखार आता है। इसके साथ सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द, कमजोरी, भूख कम लगना और त्वचा पर लाल चकत्ते दिखाई दे सकते हैं। 
 

  • कुछ मरीजों में मतली और उल्टी भी होती है। 
  • बीमारी बढ़ने पर प्लेटलेट्स कम होने लगते हैं और मसूड़ों, नाक या शरीर के अन्य हिस्सों से खून आने जैसी गंभीर स्थिति बन सकती है। हालांकि हर मरीज में प्लेटलेट्स कम हों, यह जरूरी नहीं है। यदि बरसात के मौसम में तेज बुखार के साथ ये लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर की सलाह लेकर डेंगू की जांच करानी चाहिए। 
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मलेरिया का अलर्ट - फोटो : Amarujala.com/AI

मलेरिया की जांच कब कराएं?

ठंड लगने के साथ तेज बुखार आना मलेरिया की सबसे खास पहचान है। कई बार बुखार आता-जाता रह सकता है।
 

  • मलेरियों के कारण सिरदर्द, उल्टी, मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी और थकान भी हो सकती है। 
  • गंभीर मामलों में बेहोशी, सांस लेने में परेशानी, खून की कमी या किडनी संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं। 
  • यदि आप ऐसे इलाकों में रहते हैं जहां मलेरिया के मामले अधिक हैं तो मलेरिया की जांच करवाना बेहद जरूरी हो जाता है।
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बार-बार बुखार आने की समस्या - फोटो : Freepik.com

इन बातों का भी रखें ध्यान

अगर आपको बुखार आ रहा है तो डॉक्टर की सलाह पर पैरासिटीमोल दवा लें और शरीर को पर्याप्त आराम दें।
 

  • शरीर में पानी की कमी न होने दें। ओआरएस, नारियल पानी और अन्य तरल पदार्थ लेते रहें। 
  • बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या दर्द निवारक दवाओं का अधिक उपयोग न करें। 
  • डेंगू की आशंका होने पर इबुप्रोफेन जैसी दवाओं से बचने की सलाह दी जाती है क्योंकि इससे रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है।
  • समय रहते जांच और इलाज होने से बीमारी की जटिलताओं से बचा जा सकता है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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