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बच्चा आई कॉन्टैक्ट करने से कतराता है? कहीं ये किसी गंभीर बीमारी का खतरा तो नहीं
Tue, 29 Sep 2026 11:43 AM IST
Shruti Gaur
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Tue, 29 Sep 2026 11:43 AM IST
सार
Symptoms of Autism Spectrum Disorder: अगर आपका बच्चा आई कॉन्टैक्ट करने से कतराता है तो आपको खास ध्यान रखने की जरूरत है। ऐसा इसलिए क्योंकि ये गंभीर बीमारी का खतरा हो सकता है।
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ऑटिज्म के लक्षण क्या हैं?
- फोटो : AI
Symptoms of Autism Spectrum Disorder: बच्चों का व्यवहार हर उम्र में अलग-अलग हो सकता है। कुछ बच्चे स्वभाव से शर्मीले होते हैं, नए लोगों के सामने सहज महसूस नहीं करते या बातचीत के दौरान सीधे आंखों में देखने से बचते हैं। लेकिन अगर बच्चा लगातार आंखों में देखने से बचता है और इसके साथ बातचीत करने, नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया देने, इशारे करने, चेहरे के भाव समझने, दूसरों के साथ खेलने या अपनी जरूरत बताने में भी परेशानी दिखाई देती है, तो माता-पिता को इस व्यवहार पर ध्यान देना चाहिए।
ऑटिज्म के लक्षण क्या हैं?
- फोटो : AI
बच्चा आंखों में क्यों नहीं देखता?
आंखों में देखने से बचने के कई सामान्य कारण भी हो सकते हैं। बच्चा शर्मीला हो सकता है, किसी नए व्यक्ति के सामने असहज महसूस कर सकता है या बातचीत के दौरान आंखों में देखने की आदत अभी विकसित नहीं हुई हो सकती है। कुछ बच्चों में ध्यान केंद्रित करने या सामाजिक परिस्थितियों को समझने का तरीका भी अलग हो सकता है।
आंखों में देखने से बचने के कई सामान्य कारण भी हो सकते हैं। बच्चा शर्मीला हो सकता है, किसी नए व्यक्ति के सामने असहज महसूस कर सकता है या बातचीत के दौरान आंखों में देखने की आदत अभी विकसित नहीं हुई हो सकती है। कुछ बच्चों में ध्यान केंद्रित करने या सामाजिक परिस्थितियों को समझने का तरीका भी अलग हो सकता है।
ऑटिज्म के लक्षण क्या हैं?
- फोटो : AI
कब ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है?
अगर आंखों में देखने से बचने के साथ बच्चे के व्यवहार में कई अन्य संकेत भी दिखाई दें, तो माता-पिता को बाल रोग विशेषज्ञ या बाल विकास विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
इन संकेतों पर ध्यान दें:
इनमें से कोई एक संकेत अपने आप में ऑटिज्म का निदान नहीं करता। विशेषज्ञ बच्चे के पूरे विकास और व्यवहार का आकलन करने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचते हैं।
अगर आंखों में देखने से बचने के साथ बच्चे के व्यवहार में कई अन्य संकेत भी दिखाई दें, तो माता-पिता को बाल रोग विशेषज्ञ या बाल विकास विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
इन संकेतों पर ध्यान दें:
- नाम पुकारने पर बच्चा बार-बार प्रतिक्रिया न दे
- दूसरे लोगों के साथ बातचीत या खेलने में उसकी रुचि कम दिखाई दे
- अपनी जरूरत बताने के लिए शब्दों या इशारों का इस्तेमाल कम करे
- चेहरे के भाव या सामाजिक संकेतों को समझने में परेशानी हो
- बोलने और भाषा के विकास में उम्र के अनुसार देरी दिखाई दे
- एक ही तरह के व्यवहार या गतिविधि को बार-बार दोहराए
- दिनचर्या में बदलाव होने पर बहुत ज्यादा परेशान हो
- खिलौनों से खेलने का तरीका अन्य बच्चों से काफी अलग दिखाई दे
इनमें से कोई एक संकेत अपने आप में ऑटिज्म का निदान नहीं करता। विशेषज्ञ बच्चे के पूरे विकास और व्यवहार का आकलन करने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचते हैं।
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ऑटिज्म के लक्षण क्या हैं?
- फोटो : AI
क्या आंखों में कम देखना और ऑटिज्म का संबंध है?
ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर में सामाजिक संपर्क और बातचीत से जुड़े व्यवहार कुछ बच्चों में अलग तरीके से दिखाई दे सकते हैं। कुछ बच्चों में आंखों में देखना कम या अलग तरह का हो सकता है। लेकिन हर बच्चा अलग होता है और ऑटिज्म वाले हर बच्चे में एक जैसे लक्षण दिखाई नहीं देते।
ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर में सामाजिक संपर्क और बातचीत से जुड़े व्यवहार कुछ बच्चों में अलग तरीके से दिखाई दे सकते हैं। कुछ बच्चों में आंखों में देखना कम या अलग तरह का हो सकता है। लेकिन हर बच्चा अलग होता है और ऑटिज्म वाले हर बच्चे में एक जैसे लक्षण दिखाई नहीं देते।
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ऑटिज्म के लक्षण क्या हैं?
- फोटो : AI
माता-पिता को क्या करना चाहिए?
बच्चे को जबरदस्ती आंखों में देखने के लिए मजबूर करने के बजाय उसके साथ स्वाभाविक तरीके से बातचीत करें। खेलते समय बच्चे के स्तर पर बैठें, उसकी रुचि वाली गतिविधियों में शामिल हों और बातचीत के दौरान उसे सहज महसूस करने का मौका दें।
अगर माता-पिता को बच्चे के विकास या व्यवहार को लेकर लगातार चिंता रहती है, तो बाल रोग विशेषज्ञ से बात करना बेहतर है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर बच्चे के विकास की जांच और आगे के मूल्यांकन की सलाह दे सकते हैं।
समय पर विशेषज्ञ से सलाह लेने से बच्चे की जरूरतों को बेहतर ढंग से समझने और आवश्यकता होने पर उचित सहायता शुरू करने में मदद मिल सकती है। माता-पिता को बच्चे की तुलना दूसरे बच्चों से करने के बजाय उसके अपने विकास और व्यवहार में होने वाले बदलावों पर ध्यान देना चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
बच्चे को जबरदस्ती आंखों में देखने के लिए मजबूर करने के बजाय उसके साथ स्वाभाविक तरीके से बातचीत करें। खेलते समय बच्चे के स्तर पर बैठें, उसकी रुचि वाली गतिविधियों में शामिल हों और बातचीत के दौरान उसे सहज महसूस करने का मौका दें।
अगर माता-पिता को बच्चे के विकास या व्यवहार को लेकर लगातार चिंता रहती है, तो बाल रोग विशेषज्ञ से बात करना बेहतर है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर बच्चे के विकास की जांच और आगे के मूल्यांकन की सलाह दे सकते हैं।
समय पर विशेषज्ञ से सलाह लेने से बच्चे की जरूरतों को बेहतर ढंग से समझने और आवश्यकता होने पर उचित सहायता शुरू करने में मदद मिल सकती है। माता-पिता को बच्चे की तुलना दूसरे बच्चों से करने के बजाय उसके अपने विकास और व्यवहार में होने वाले बदलावों पर ध्यान देना चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।