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Women Health Tips: PMOS में LH-FSH कितना मायने रखता है? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स
Tue, 18 Aug 2026 01:06 PM IST
Shruti Gaur
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Tue, 18 Aug 2026 01:06 PM IST
सार
Women Health Tips: जिन महिलाओं को पीएमओएस है, उन्हें ये खबर अवश्य पढ़नी चाहिए। यहां हम इस दिक्कत के बारे में आपको एक अहम जानकारी देने जा रहे हैं।
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PMOS में LH और FSH का क्या रोल है?
- फोटो : AI
Women Health Tips: पीएमओएस यानी पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम महिलाओं से जुड़ी एक हार्मोनल और मेटाबॉलिक स्थिति है। इसे पहले पीसीओएस यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के नाम से जाना जाता था। पीएमओएस को समझने में एलएच और एफएसएच जैसे हार्मोन की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। ये दोनों हार्मोन महिलाओं के मासिक धर्म चक्र, अंडाशय में फॉलिकल्स के विकास और ओव्यूलेशन यानी अंडे के रिलीज होने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाते हैं।
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PMOS में LH और FSH का क्या रोल है?
- फोटो : AI
एलएच क्या है?
एलएच यानी ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन एक महत्वपूर्ण प्रजनन हार्मोन है, जो पिट्यूटरी ग्रंथि से बनता है। महिलाओं में यह ओव्यूलेशन यानी अंडे के रिलीज होने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पीएमओएस में कुछ महिलाओं में एलएच का स्तर सामान्य से अधिक पाया जा सकता है। हालांकि, हर महिला में ऐसा हो, यह जरूरी नहीं है।
एलएच यानी ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन एक महत्वपूर्ण प्रजनन हार्मोन है, जो पिट्यूटरी ग्रंथि से बनता है। महिलाओं में यह ओव्यूलेशन यानी अंडे के रिलीज होने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पीएमओएस में कुछ महिलाओं में एलएच का स्तर सामान्य से अधिक पाया जा सकता है। हालांकि, हर महिला में ऐसा हो, यह जरूरी नहीं है।
PMOS में LH और FSH का क्या रोल है?
- फोटो : AI
एफएसएच क्या है?
एफएसएच यानी फॉलिकल स्टिमुलेटिंग हार्मोन भी पिट्यूटरी ग्रंथि से बनने वाला हार्मोन है। यह अंडाशय में फॉलिकल्स के विकास और अंडे के परिपक्व होने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मासिक धर्म चक्र के दौरान एफएसएच अंडाशय में फॉलिकल्स के विकास को बढ़ावा देता है। इससे आगे चलकर ओव्यूलेशन की प्रक्रिया में मदद मिलती है।
एफएसएच यानी फॉलिकल स्टिमुलेटिंग हार्मोन भी पिट्यूटरी ग्रंथि से बनने वाला हार्मोन है। यह अंडाशय में फॉलिकल्स के विकास और अंडे के परिपक्व होने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मासिक धर्म चक्र के दौरान एफएसएच अंडाशय में फॉलिकल्स के विकास को बढ़ावा देता है। इससे आगे चलकर ओव्यूलेशन की प्रक्रिया में मदद मिलती है।
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PMOS में LH और FSH का क्या रोल है?
- फोटो : AI
पीएमओएस में एलएच और एफएसएच का क्या रोल है?
पीएमओएस में हार्मोनल बदलावों के कारण एलएच और एफएसएच के बीच संतुलन में बदलाव देखा जा सकता है। कुछ महिलाओं में एलएच अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है, जबकि एफएसएच सामान्य या कम स्तर पर रह सकता है। इस तरह के हार्मोनल बदलाव का असर ओव्यूलेशन और मासिक धर्म चक्र पर पड़ सकता है।
पीएमओएस में हार्मोनल बदलावों के कारण एलएच और एफएसएच के बीच संतुलन में बदलाव देखा जा सकता है। कुछ महिलाओं में एलएच अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है, जबकि एफएसएच सामान्य या कम स्तर पर रह सकता है। इस तरह के हार्मोनल बदलाव का असर ओव्यूलेशन और मासिक धर्म चक्र पर पड़ सकता है।
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PMOS में LH और FSH का क्या रोल है?
- फोटो : AI
क्या एलएच-एफएसएच अनुपात से पीएमओएस का पता चलता है?
नहीं, केवल एलएच और एफएसएच के अनुपात के आधार पर पीएमओएस का निदान नहीं किया जाता। डॉक्टर आमतौर पर मासिक धर्म में अनियमितता, ओव्यूलेशन में समस्या, पुरुष हार्मोन का बढ़ना और अंडाशय से जुड़े अन्य संकेतों को ध्यान में रखते हैं। कुछ मामलों में डॉक्टर अल्ट्रासाउंड या एएमएच जैसी जांचों की मदद भी ले सकते हैं। इसलिए किसी एक हार्मोन की रिपोर्ट देखकर खुद से पीएमओएस का निष्कर्ष निकालना सही नहीं है।
नहीं, केवल एलएच और एफएसएच के अनुपात के आधार पर पीएमओएस का निदान नहीं किया जाता। डॉक्टर आमतौर पर मासिक धर्म में अनियमितता, ओव्यूलेशन में समस्या, पुरुष हार्मोन का बढ़ना और अंडाशय से जुड़े अन्य संकेतों को ध्यान में रखते हैं। कुछ मामलों में डॉक्टर अल्ट्रासाउंड या एएमएच जैसी जांचों की मदद भी ले सकते हैं। इसलिए किसी एक हार्मोन की रिपोर्ट देखकर खुद से पीएमओएस का निष्कर्ष निकालना सही नहीं है।