स्तन कैंसर के बाद सर्वाइकल कैंसर महिलाओं के लिए दूसरा सबसे घातक और जानलेवा कैंसर है। यह अनुमान है कि भारत में विश्व के लगभग एक-चौथाई कैंसर रोगी हैं। ऐसा अनुमान है कि हर साल 96,000 से अधिक महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का पता चलता है और 60,000 से अधिक लोग इस बीमारी की वजह से मर जाते हैं। इस तरह की उच्च मृत्यु दर और रोगियों की संख्या को देखते हुए यह लग रहा है किस इस बीमारी के प्रति लोगों के बीच जागरुकता की कमी है। अगली स्लाइड्स से जानिए इस बीमारी से जुड़ी अन्य बातें।
बार-बार पेशाब आना हो सकता है सर्वाइकल कैंसर का लक्षण, इस जानलेवा बीमारी को न करें नजरअंदाज
ऐसे होता है सर्वाइकल कैंसर-
यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर के क्या कारण हैं, लेकिन यह ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) है जिसकी महत्वपूर्ण भूमिका इस रोग को बढ़ाने में शामिल है। एचपीवी आमतौर पर महिलाओं में पाया जाता है और 100 से अधिक प्रकार के एचपीवी वायरस की पहचान की गई है। हालांकि, उनमें से ज्यादातर सवाईकल कैंसर का कारण नहीं बनते हैं। एचपीवी-16 और एचपीवी-18 दो सबसे उच्च जोखिम वाले वायरस हैं, जिनके बारे में अनुमान लगाया जाता है कि यह लगभग 70 प्रतिशत सर्वाइकल कैंसर होने के प्रति जिम्मेदार है। सर्वाइकल कैंसर के कुछ जोखिम कारकों में कई लोगों से यौन संबंध बनाना, समयपूर्व यौन गतिविधि में शामिल होना, धूम्रपान, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली और अन्य यौन संचारित रोग जैसे क्लैमाइडिया, गोनोरिया, सिफलिस और एचआईवी एड्स शामिल हैं।
बार-बार पेशाब होना
बार-बार पेशाब होना महिलाओं के लिए इस गंभीर बीमारी के होने का एक और संकेत है, जिसके प्रति महिलाओं को सजग रहने की जरूरत है। 40 वर्ष या उससे ज्यादा की महिलाओं के साथ यह समस्या अधिक होती है, ऐसे में उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
ब्लीडिंग (रक्तस्राव) या स्पॉटिंग
पीरियड्स के बीच में ब्लीडिंग या स्पॉटिंग बीमारी का सूचक है। महिलाओं को यौन संबंध, पेल्विक परीक्षण, मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) के बाद रक्तस्राव दिखाई देना सर्वाइकल कैंसर का लक्षण है इसलिए यदि आपके साथ भी ऐसा हो रहा है तो यह चिंता का विषय हो सकता है।
लगातार या रह-रहकर पेट में दर्द
लगातार या रह-रहकर पेड़ू या पेट दर्द गर्भाशय ग्रीवा सहित अन्य प्रजनन अंगों की समस्याओं का संकेत हो सकता है। इन लक्षणों को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए, खासकर अगर दर्द अपेंडिक्स (आंत) के पास हो, क्योंकि यह बाद के चरण में संभावित रूप से सर्वाइकल कैंसर का संकेत हो सकता है।