मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं जैसे स्ट्रेस-एंग्जाइटी के मामले दुनियाभर में काफी तेजी से बढ़े हैं। इन स्थितियों पर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो इसके कारण डिप्रेशन का खतरा हो सकता है, जिसे गंभीर समस्या माना जाता है। क्या आप जानते हैं एक प्रकार का डिप्रेशन सिर्फ महिलाओं को होता है? इसे पोस्टपार्टम डिप्रेशन के नाम से जाना जाता है।
Mental Health: क्या है पोस्टपार्टम डिप्रेशन? लाखों महिलाएं हैं शिकार, आपको भी तो नहीं होती हैं ये दिक्कतें
दुनियाभर में, प्रसवोत्तर अवसाद (पीपीडी) लगभग 10-20% माताओं को प्रभावित करता है। विकासशील देशों में यह अधिक है, कुछ अध्ययनों में इन क्षेत्रों में 20% तक की दर बताई गई है। ये प्रसव के बाद शुरू होती है और महिला को उदासी, थकावट, चिंता, और नकारात्मक विचारों से प्रभावित करती है।
दुनियाभर में, प्रसवोत्तर अवसाद (पीपीडी) लगभग 10-20% माताओं को प्रभावित करता है। विकासशील देशों में यह अधिक है, कुछ अध्ययनों में इन क्षेत्रों में 20% तक की दर बताई गई है।
भारतीय आबादी के लिए बई ये गंभीर चिंता का कारण रही है। यहां सबसे बड़ी चिंता ये है कि लोग इस समस्या का पहचान नहीं पाते और अक्सर इसका निदान भी नहीं हो पाता है। समय पर इसका इलाज न हो पाने के कारण जटिलताओं के बढ़ने का खतरा रहता है।
भारत में आर्थिक कठिनाइयां, घरेलू हिंसा, मानसिक बीमारी का इतिहास, वैवाहिक कलह और परिवार से समर्थन की कमी जैसी स्थितियों के चलते पीपीडी के मामले अधिक देखे जाते रहे हैं।
पोस्टपार्टम डिप्रेशन और इसके क्या कारण हैं?
पोस्टपार्टम डिप्रेशन एक मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है जो प्रसव के बाद शुरू होती है और महिला को उदासी, थकावट, चिंता, और नकारात्मक विचारों से प्रभावित करती है। यह जन्म के बाद पहले कुछ हफ्तों या महीनों में कभी भी शुरू हो सकता है। कई नई माताओं को प्रसव के बाद "बेबी ब्लूज़" का अनुभव होता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इस तरह के अवसाद का कोई एक कारण नहीं है। आनुवंशिकी, शारीरिक परिवर्तन और भावनात्मक स्थितियां इसके लिए जिम्मेदार हो सकती हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि जिन लोगों में इसका पारिवारिक इतिहास रहा हो उनमें खतरा अधिक रहता है।
इसके अलावा बच्चे के जन्म के बाद, आपके शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन में परिवर्तन के कारण आपको ये समस्या हो सकती है।
पोस्टपार्टम डिप्रेशन में होता क्या है?
पोस्टपार्टम डिप्रेशन के कारण कई प्रकार की भावनात्मक और शारीरिक समस्याएं हो सकती हैं, जिनपर महिला का स्वयं और घर वालों को भी विशेष ध्यान देते रहना चाहिए।
पोस्टपार्टम डिप्रेशन की स्थिति में अत्यधिक उदासी या अक्सर रोने का मन करता रहता है, चिड़चिड़ापन या गुस्सा बना रहता है, अपने बच्चे से जुड़ाव महसूस नहीं हो पाता और कई बार आप खुद को अयोग्य मां समझने लगती हैं। कई बार आपको आत्मघाती विचार भी आ सकते हैं।
इसका बचाव और इलाज क्या है?
सबसे पहले जरूरी है कि आप पोस्टपार्टम डिप्रेशन के लक्षणों की पहचान करके डॉक्टर से मिलें। आमतौर पर लक्षणों को कम करने वाली कुछ दवाओं, मनोचिकित्सा जैसे कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (सीबीटी) थेरेपी की मदद से लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है। परिवार और दोस्तों का सहयोग लक्षणों को जल्द ठीक करने में मददगार माना जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर लक्षण 2 हफ्ते से अधिक समय तक बने रहें, आत्महत्या या बच्चे को नुकसान पहुंचाने के विचार आएं या फिर अपने आप को असहाय, अयोग्य मां महसूस करने लगें तो समय रहते डॉक्टर की सलाह और इलाज लें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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