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जानिए क्या होता है गाउट? क्या होते हैं इसके लक्षण और पढ़िए इससे जुड़ी सारी जानकारी

Tue, 23 Feb 2021 12:44 PM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: तेजस्वी मेहता Updated Tue, 23 Feb 2021 12:44 PM IST
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what are gout and its symptoms and precautions in Hindi
आयुर्वेद में इस रोग को वात-रक्त नाम से जाना जाता है - फोटो : Social Media

रक्त में जब यूरिक ऐसिड की मात्रा बढ़ जाती है, तो यह रोग पैदा होता है। यूरिक ऐसिड हमारे शरीर की विविध चयापचयिक क्रियाओं के कारण पैदा होता है, जिसका निर्माण कुछ खास प्रकार के आहारों से होता है। इस रोग को चिकित्सकीय भाषा में गाउट नाम से जाना जाता है। सामान्यतया मूत्र उत्सर्जन के माध्यम से शरीर से यूरिक ऐसिड बाहर होता रहता है। लेकिन कुछ लोगों में यूरिक ऐसिड की उत्पत्ति बहुत ही अधिक मात्रा में होने लगती है, तथा जो शरीर से उसी अनुपात से  मूत्र के द्वारा बाहर नहीं हो पाता है। बहुधा यही बढ़ा हुआ यूरिक ऐसिड नुकीले सुई जैसे क्रिस्टल्स का रूप लेकर विविध जोड़ों के इर्दगिर्द इकट्ठे होकर उस जोड़ के आसपास सूजन, तीव्र दर्द को पैदा कर देते हैं। आयुर्वेद में इस रोग को वात-रक्त नाम से जाना जाता है। उल्लेखनीय है कि उत्पत्ति में वायु और रक्त की भूमिका होने से ही इसे वात-रक्त नाम से जाना जाता है।

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हाइपरटेंशन एवं मोटापे से पीड़ित लोगों में भी यह रोग अधिक देखा जाता है - फोटो : Social media

इन लोगों को होने की रहती है ज्यादा संभावना
ऐसे रोगी जो ट्रायग्लिसराइड्स के बढ़े हुए स्तरों से पीड़ित रहते हैं, उनको इस रोग से ग्रस्त होने की अधिकाधिक संभावनाएं रहती हैं। हाइपरटेंशन एवं मोटापे से पीड़ित लोगों में भी यह रोग अधिक देखा जाता है। विविध गुरदों के रोगों से पीड़ित रोगी भी इस रोग से ग्रस्त होते पाए जाते हैं। विविध प्रकार के एंटीबायोटिक्स, डाइयूरेटिक औषधियां, कीमोथैरेपी भी इस रोग के पैदा होने में अहम भूमिका निभाते हैं। 

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रात के समय जागना - फोटो : social media

कारण-
-नमकीन, खट्टे, चरपरे, खारे, चिकने तथा गरम खाद्य-पदार्थों का अत्यधिक सेवन
-नियमित रूप से रात के समय भोजन करना
-पहले किए गए भोजन के हजम होने से पहले ही दोबारा भोजन करना
-सड़े-गले एवं सूखे हुए मांस का सेवन करना
-जलीय जीव-जंतुओं के मांस का सेवन करना
-मूल शाक जैसे अरबी, आलू, मूली, जमहकंद का अधिक सेवन करना
-कुलथी, उड़द, सेम, गन्ना एवं इससे बनने वाले चीनी, गुड़, मिठाईयों का अंधाधुंध सेवन करना
-दही, कांजी, सिरका, मट्ठा, शराब इत्यादि का अनियंत्रित सेवन।
-अधिक क्रोध करना
-दिन में सोने की आदत होना
-रात के समय जागना

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यह दर्द घुटनों, कलाई, कुहनी, अंगुलियों में भी हो सकता है - फोटो : सोशल मीडिया

लक्षण-
सबसे पहले एक पैर के अंगूठे में लगभग आधी रात के समय अचानक दर्द महसूस होना तथा उसमें सूजन आना। उस हिस्से में लालिमा पैदा होना, तेज दर्द के कारण रोगी नींद से जाग जाता है। कुछ रोगी ऐड़ी एवं टखनों में भी तेज दर्द महसूस करते हैं। यह दर्द घुटनों, कलाई, कुहनी, अंगुलियों में भी हो सकता है।

 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media

उपचार
-सवेरे बिस्तर से उठते ही बिना कुल्ला किए ही लगभग दो से चार गिलास पानी पिएं। यह प्रयोग बढ़े हुए यूरिक ऐसिड को नियंत्रित करने के लिए बेजोड़ है। आरंभ में एक गिलास पानी से शुरूआत की जा सकती है। इसी को जापानी सिकनैस ऐसोसिएशन ने ‘वाटर थैरेपी’ नाम दिया है।
-पूरे दिन भर में आठ से दस गिलास पानी पीना बहुत जरूरी होता है।
-यूरिक ऐसिड बढ़ने पर गिलोय के प्रयोग को सर्वोत्कृष्ट माना जाता है। अतः गिलोय का ताजा रस, चूर्ण, काढ़ा सेवन किया जान चाहिए। यदि गिलोय के साथ अरंडी का तेल (कैस्टर आॅइल) का भी सेवन किया जाए तो शीघ्र लाभ प्राप्त होता है।
-भोजन के तत्काल बाद मूत्र-त्याग अवष्य करें-ऐसा नियमित रूप से करने से यूरिक ऐसिड नहीं बढ़ता है। यहां पर ध्यान देने योग्य बात है कि इस साधारण से दिखाई देने वाले प्रयोग से अनेकानेक प्रकार के मूत्र-विकारों, पथरी इत्यादि से भी बचाव होता है तथा लम्बे समय तक गुरदे स्वस्थ एवं सबल बने रहते हैं। इससे भोजन का पाचन भी सुचारू रूप से होता है और शरीर में हलकापन आता है।  

 

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