Appendix Risk Factors: आपने अपने आसपास किसी न किसी को अपेंडिक्स की समस्या से परेशान जरूर देखा होगा। ये एक आम बीमारी है जो बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक किसी को भी हो सकती है।
Appendix: पेट के दाएं हिस्से में अक्सर रहता है दर्द, कहीं ये अपेंडिक्स तो नहीं? जानिए लक्षण और बचाव के तरीके
- अपेंडिक्स के कारण पेट के निचले दाहिने हिस्से में दर्द होता रहता है, हालांकि ज्यादातर लोग इस दर्द को सामान्य या गैस की समस्या समझकर अनदेखा कर देते हैं। पर ये गंभीर स्थिति का कारण बन सकती है।
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अपेंडिसाइटिस और इसका खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आजकल की गड़बड़ लाइफस्टाइल और खानपान की आदतों के कारण अपेंडिक्स की समस्या पहले की तुलना में ज्यादा देखी जा रही है। जंक फूड्स, लो फाइबर वाली डाइट, पानी की कमी और पाचन संबंधी बीमारियां इसका प्रमुख कारण हैं।
मेडिकल रिपोर्ट्स कहती हैं कि हर साल दुनिया भर में लाखों लोग अपेंडिसाइटिस (अपेंडिक्स की सूजन) से पीड़ित होते हैं। अच्छी बात ये है कि समय रहते अगर सर्जरी कर दी जाए तो मरीज पूरी तरह ठीक हो जाता है।
अपेंडिक्स की समस्या में क्या होता है?
अपेंडिसाइटिस के कारण पेट के निचले दाहिने हिस्से में दर्द होता है, हालांकि ज्यादातर लोग इस दर्द को सामान्य या गैस की समस्या समझकर अनदेखा कर देते हैं। पर ये गंभीर स्थिति का कारण बन सकती है।
अपेंडिसाइटिस की समय रहते पहचान के लिए इसके लक्षणों के बारे में जानना बहुत आवश्यक है।
- इसका दर्द अक्सर आपके ऊपरी पेट या नाभि वाले हिस्से में हल्के ऐंठन के साथ शुरू होता है जो बढ़ता जाता है। इसके अलावा खांसने-चलने आदि पर दर्द बढ़ जाता है।
- कुछ रोगियों को इसके कारण भूख में कमी, हल्का बुखार रहने, कब्ज-दस्त और पेट में सूजन बने रहने की दिक्कत भी बनी रहती है।
अपेंडिक्स का इलाज और बचाव
डॉक्टर कहते हैं, अपेंडिक्स की समस्या पर समय रहते ध्यान दिया जाना चाहिए। यदि इसका समय पर इलाज न किया गया और अपेंडिक्स फट जाए तो इससे पेट में संक्रमण बढ़ने का जोखिम रहता है। अपेंडिसाइटिस को ठीक करने के लिए सर्जरी करके इसे निकालना ही उपचार है। अपेंडिक्स को हटाने के बाद एंटीबायोटिक्स दी जाती है जिसका कोर्स पूरा किया जाना चाहिए।
इस बीमारी को वैसे तो 100% रोका नहीं जा सकता, लेकिन कुछ आदतें आपके जोखिमों को कम कर सकती हैं।
- फाइबर युक्त आहार जैसे साबुत अनाज, फल, सब्जियां, दालें अधिक खाएं।
- दिनभर में कम से कम 2-3 लीटर पानी जरूर पीना चाहिए।
- जंक फूड कम खाएं और पाचन तंत्र की सफाई के प्रोबायोटिक फूड जैसे दही आदि का सेवन करते रहें।
- कब्ज से बचना जरूरी है, इसके लिए नियमित व्यायाम और सही आहार आवश्यक है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।