स्वाभाविक रूप से हर किसी का व्यक्तित्व और उसके व्यवहार का तरीका एक दूसरे से भिन्न हो सकता है। कुछ लोग, दूसरों से मिलने-जुलने, बातचीत करने और आपसी संबंध बनाने में काफी सहज होते हैं, जबकि कुछ लोगों के लिए यह काम काफी कठिन हो सकता है। अगर आपको लगता है कि इंट्रोवर्ट व्यक्तित्व वाले लोगों के लिए जीवन कठिन होता है तो अध्ययन में इसके उलट परिणाम देखे गए हैं।
Personality Study: इंट्रोवर्ट होने के कई लाभ, याददाश्त और समस्याओं को सुलझाने में होते हैं अधिक सक्षम
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इंट्रोवर्ट और एकस्ट्रोवर्ट
जब आप इंट्रोवर्ट शब्द सुनते हैं, तो आप किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में सोच सकते हैं जो शर्मीला या शांत है और अकेला रहना पसंद करता है। हालांकि उनका व्यक्तित्व इससे अलग बहुत कुछ हो सकता है। इसके बारे में मनोवैज्ञानिकों की भी अलग-अलग थ्योरी है।
साल 1920 में कार्ल जंग नाम के एक मनोवैज्ञानिक ने इंट्रोवर्ट और एक्सट्रोवर्ट शब्दों का उपयोग करना शुरू किया। जंग ने बताया कि अमेरिका में करीब एक तिहाई लोग इंट्रोवर्ट हो सकते हैं। हालांकि अध्ययनों में यह स्पष्ट नहीं है कि किन कारणों से आप इंट्रोवर्ट या एकस्ट्रोवर्ट होते हैं।
डोपामाइन के साथ होने वाली प्रतिक्रिया
इंट्रोवर्ट लोगों के दिमाग की स्थिति को लेकर शोधकर्ताओं ने अध्ययन किया जिसमें पाया गया कि इंट्रोवर्ट लोगों में ब्रेन कैमिकल और मैंसेंजर भी अलग तरह से व्यवहार करता है। इंट्रोवर्ट लोगों का दिमाग, एक्स्ट्रोवर्ट लोगों की दिमाग की तुलना में डोपामाइन पर अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है। डोपामाइन रसायन आपके मस्तिष्क के पुरस्कृत होने और आनंद चाहने वाले हिस्से को सक्रिय कर देता है।
वैसे तो इंट्रोवर्ट और एक्सट्रोवर्ट दोनों प्रकार के लोगों में इस रसायन की मात्रा समान होती है, लेकिन इंट्रोवर्ट लोगों को इससे अधिक लाभ मिलने की संभावना के बारे में पता चलता है।
अध्ययन में क्या पता चला?
शोध में वैज्ञानिकों की टीम ने पाया कि इंट्रोवर्ट लोगों के फ्रंटल लोब में रक्त का प्रवाह अधिक होता है। फ्रंटल लोब , मस्तिष्क का वह हिस्सा होता है जो आपको चीजों को याद रखने, समस्याओं को हल करने और आगे की योजना बनाने में मदद करता है। जिसका मतलब है कि इंट्रोवर्ट लोग अधिक गुणवत्ता के साथ चीजों को बेहतर ढंग से डील करने में सक्षम होते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।