अध्ययनों से पता चलता है कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पौष्टिक आहार और नियमित व्यायाम की जरूरत होती है, पर क्या इतना ही पर्याप्त है? शायद नहीं, वैज्ञानिकों का कहना है कि आहार और व्यायाम के साथ शरीर को स्वस्थ रखने के लिए उसे पूरा आराम देना भी बहुत आवश्यक है। इसके लिए सभी लोगों को रोजाना रात में कम से कम 7-9 घंटे की अच्छी नींद जरूर लेनी चाहिए। वैसे तो उम्र के साथ नींद में कमी की समस्या शुरू हो जाती है, पर जीवनशैली में गड़बड़ी के कारण अब के समय में कम उम्र के लोग भी इस समस्या के शिकार देखे जा रहे हैं।
सेहत की बात: क्या आप भी नींद की समस्या से रहते हैं परेशान? बस ये काम कर लें, दूर हो जाएगी दिक्कत
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नींद न आने के कारण होने वाली समस्याएं
अध्ययनों से पता चलता है कि जिन लोगों की नींद पूरी नहीं होती है, समय के साथ उनकी इम्युनिटी कमजोर होती जाती है। इसके अलावा नींद की कमी के कारण मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर होता है, लोगों को तनाव-चिंता और अवसाद की समस्या बनी रह सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक नींद न पूरी होने से आपके कार्य करने की क्षमता पर भी नकारात्मक असर हो सकता है और यह जीवन की गुणवत्ता को भी प्रभावित कर सकती है।
खान-पान का रखें विशेष ध्यान
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक हमारा भोजन नींद को प्रभावित कर सकता है, इसलिए सभी लोगों को स्वस्थ और पौष्टिक चीजों का सेवन अधिक करना चाहिए। जंक फूड के सेवन से नींद में खलल पड़ सकती है। ज्यादा तला हुआ और जंक फूड का सेवन कम करें, इससे रात को अच्छी नींद लेने में मदद मिलेगी। इसके अलावा कैफीनयुक्त चीजें जैसे चाय, कॉफी आदि आपकी नींद को प्रभावित करती है, इनका भी कम से कम सेवन करें।
गैजेट्स का इस्तेमाल कम करें
मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण आपकी नींद को प्रभावित कर सकते हैं। हमारे फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से निकलने वाली नीली रोशनी नींद से संबंधित विकारों का कारण बन सकती है। अपनी नींद की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए सोने से कुछ घंटे पहले तक इन उपकरणों का उपयोग करने से बचें।
योग और अभ्यास
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक जिन लोगों को नींद की समस्या बनी रहती है उनके लिए योग और कुछ प्रकार के मेडिटेशन अभ्यास फायदेमंद होते हैं। योग या ध्यान मुद्रा आपको रात की अच्छी नींद प्राप्त करने में मदद कर सकते हैं। मेडिटेशन के अभ्यास से मन शांत रहता है जिससे नींद की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। अमर उजाला इस दावे की पुष्टि नहीं करता है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।