कोरोना वायरस का बढ़ता संक्रमण दुनियाभर के लिए चिंता का सबब बनता जा रहा है। इससे मरनेवालों का आंकड़ा भी हर दिन बढ़ता जा रहा है। कोरोना वायरस के कारण मौतें कैसे हो रही हैं? सांस की तकलीफ, कोशिकाओं की क्षति, फेफड़ों का खराब होना आदि अनेक कारण हो सकते हैं। लेकिन क्या इन सबके अलावे मौत के पीछे कुछ और भी कारण हैं? कोरोना वायरस संक्रमण में आखिर वे कौन से कारक हैं, जिनकी वजह से मौतें हो रही है? इन बातों का पता लगाने के लिए पहली बार वृहद स्तर पर शोध अध्ययन किया गया है। ब्रिटेन में हुए इस अध्ययन में एक करोड़ 70 लाख लोगों को शामिल किया गया। आइए जानते हैं इस अध्ययन में क्या कुछ परिणाम सामने आए।
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कोरोना वायरस: ब्रिटेन में 1.72 करोड़ लोगों पर हुई स्टडी में बताया, किन कारणों से हो रही हैं मौतें
Sat, 11 Jul 2020 08:22 PM IST
निलेश कुमार
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निलेश कुमार
Updated Sat, 11 Jul 2020 08:22 PM IST
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Coronavirus Impacts Human Body
- फोटो : iStock/Amar Ujala
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
- रिसर्च जर्नल नेचर में प्रकाशित इस शोध अध्ययन में इसकी चर्चा की गई है कि कोरोना वायरस संक्रमण के ऐसे कौन-कौन से लक्षण होते हैं जो किसी व्यक्ति की जान लेने का काम करते हैं। इसमें लोगों की उम्र, नस्ल आदि को अलग-अलग रखकर अध्ययन किया गया। इसके साथ ही मरीजों की आर्थिक स्थिति को भी ध्यान में रखा गया। कारण कि कई बार लोग समय पर जरूरी चीजें या इलाज न मिल पाने की वजह से मौत का शिकार हो जाते हैं।
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- शोधकर्ताओं ने ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा(NHS) द्वारा एकत्र किए गए 40 फीसदी आबादी के स्वास्थ्य रिकॉर्ड में शामिल होने वाले डी-आइडेंटिड डेटा का एक समूह बनाया गया। अध्ययन के लिए तीन महीने में एक करोड़ 72 लाख 78 हजार 392 लोगों पर नजर रखी गई। इनमें से 10 हजार 926 की कथित तौर पर कोविड-19 या कोविड-19 से संबंधित गंभीर बीमारियों की वजह से मौत हो गई।
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- ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के डॉ. बेन गोल्डकेरे के मुताबिक, यह अध्ययन उपयोगी और महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों में काम के दौरान अस्पताल में मौजूद मरीजों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। उनका कहना है कि कोरोना वायरस संक्रमण से हर कोई डरा हुआ है। उनके मुताबिक, जितनी अधिक उम्र के लोगों को कोरोना हो रहा था उनके बचने की संभावना उतनी ही अधिक कम हो जाती थी जबकि बच्चे और व्यस्क इससे बच जा रहे थे क्योंकि उनकी इम्यूनिटी अधिक होती है।
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- इस अध्ययन के दौरान गोल्डकेरे की टीम ने पाया कि 80 से अधिक उम्र के संक्रमित मरीजों को उनके 50 के दशक की तुलना में कोविड-19 (Covid-19) से कम से कम 20 गुना अधिक मौत होने की संभावना थी। वहीं, 40 वर्ष से कम उम्र के लोगों की तुलना में सैकड़ों गुना अधिक मौत होने की संभावना थी।