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Mental Health Day: मोबाइल फोन से कुछ घंटे का 'ब्रेकअप' कई बीमारियों से आपको बचाने में सहायक, इसकी लत 'जानलेवा'

Mon, 10 Oct 2022 12:05 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 10 Oct 2022 12:05 AM IST
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मोबाइल फोन्स की लत हानिकारक - फोटो : istock

मोबाइल फोन्स आज के समय में लोगों के जीवन का अभिन्न हिस्सा हो गए हैं। सुबह आंख खुलने से लेकर रात में सोने के कुछ समय पहले तक मोबाइल फोन पर कुछ भी सर्फिग करते रहना, चैट करना, बातें करना हमारी आदत बन गई है। पर क्या आप जानते हैं कि यह आदत संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए बहुत नुकसानदायक हो सकती है। अध्ययनों से पता चलता है कि लोगों में मोबाइल फोन्स की बढ़ती आदत कई प्रकार की शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं को बढ़ाती जा रही है। विशेषकर बच्चों की मोबाइल से बढ़ती नजदीकी को स्वास्थ्य विशेषज्ञ काफी गंभीर मानते हैं।



स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मोबाइल फोन्स को अगर हम, हर दिन कुछ घंटे के लिए ही खुद से अलग करने की आदत बना लें तो भी हमारी सेहत को लाभ हो सकता है। विशेषकर मनोचिकित्सकों का कहना है कि सभी लोगों को शाम के 6 बजे के बाद मोबाइल या किसी भी प्रकार के स्क्रीन के अधिक संपर्क में रहने से बचना चाहिए। ऐसे में यदि आप शाम 6 बजे के बाद भी खुद की मोबाइल पर निर्भरता को कम कर लेते हैं, तो भी इससे सेहत को कई प्रकार से लाभ मिल सकता है।

आइए जानते हैं कि मोबाइल का अधिक इस्तेमाल किस प्रकार से हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है?

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मोबाइल फोन्स के कारण बढ़ती शारीरिक और मानसिक समस्याएं - फोटो : Pixabay

मोबाइल से बढ़ती नजदीकी हानिकारक

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, स्मार्टफोन के अत्यधिक उपयोग या यूं कहें कि बिना इसके न रह पाने की आदत लगभग हर उम्र के लोगों में देखी जा रही है। इसके कारण कई प्रकार की शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं हो सकती हैं। स्मार्टफोन का अधिक इस्तेमाल आंखों और हृदय की सेहत को प्रभावित करने से लेकर नींद विकारों का भी कारण बनता जा रहा है, जिसको लेकर सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता होती है। इसके दुष्प्रभाव दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं।

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मोबाइल फोन्स के कारण कम हो गई है शारीरिक गतिविधि - फोटो : istock

सेंडेंटरी लाइफ का खतरा

स्मार्टफोन के अधिक इस्तेमाल का सबसे बड़ा खतरा इसके कारण लाइफस्टाइल में आया बदलाव है। पहले की तुलना में स्मार्टफोन्स के कारण लोगों में एक ही जगह पर बैठे या लेटे रहने की आदत बढ़ती जा रही है, इस तरह की  सेंडेंटरी लाइफ को संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक माना जाता है।

विशेषज्ञ कहते हैं, यदि मोबाइल फोन्स के इस्तेमाल को कम करके यही समय शारीरिक गतिविधियों में लगा दिया जाए तो हृदय रोग, डायबिटीज जैसी कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम किया जा सकता है। हृदय रोग, डायबिटीज की गंभीर जटिलताएं जानलेवा हो सकती हैं।

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बढ़ती नींद विकारों की समस्या - फोटो : istock

नींद विकारों की बढ़ती समस्या

सेल फोन की लत को नींद संबंधी विकारों और थकान में वृद्धि जैसी समस्याओं के प्रमुख कारण के तौर पर जाना जाता है। अध्ययनों से पता चलता है कि सोने से पहले  सेल फोन के इस्तेमाल करते रहने की आदत अनिद्रा के खतरे को बढ़ा देती है। फोन से निकलने वाली नीली रोशनी का आंखों और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर होता है जिसके कारण लोगों में सोने-जागने के समय में अनियमितता की दिक्कत बढ़ती जा रही है। नींद पूरी न हो पाना कई गंभीर बीमारियों जैसे हृदय रोग, डायबिटीज और अवसाद के लक्षणों को बढ़ा देती है।

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मोबाइल की लत के साइड इफेक्ट्स - फोटो : Pixabay

मानसिक स्वास्थ्य की बढ़ती समस्याएं

सेल फोन की लत मानसिक स्वास्थ्य की बढ़ती समस्याओं का कारण हो सकती है। अध्ययनों से पता चलता है कि लोगों में इसके बढ़ते उपयोग के कारण कॉग्नेटिव इमोशन रेगुलेशन, निर्णय लेने की क्षमता, चिंता-तनाव और कई तरह की अन्य मनोवैज्ञानिक समस्याओं का जोखिम बढ़ता जा रहा है। कुछ शोध इस तरफ भी संकेत करते हैं कि जिन लोगों में सेल फोन की लत है उनमें अन्य लोगों की तुलना में डिप्रेशन होने का खतरा भी अधिक होता है।

 

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। अमर उजाला इस दावे की पुष्टि नहीं करता है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 

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