डिमेंशिया एक प्रकार का न्यूरोलॉजिकल विकार है जिसमें संज्ञानात्मक क्षमता समय के साथ कमजोर होने लग जाती है। आमतौर पर 60 साल की आयु में होने वाले इस रोग में सोचने, याद रखने और तर्क करने की क्षमता काफी कमजोर हो जाती है। इस तरह की समस्याओं के कारण जीवन की गुणवत्ता भी काफी कमजोर होने लगती है।
Dementia Risk: आंखों की इन समस्याओं से जानें कहीं आपको डिमेंशिया तो नहीं? ऐसे लक्षणों पर तुरंत दें ध्यान
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
लंदन में लेजर आई क्लिनिक में प्रमुख नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. जोर्न स्लॉट जोर्गेनसन कहते हैं, डिमेंशिया की समस्या में याददाश्त में होने वाली परेशानियों से पहले आंखों में इसके लक्षण नजर आने लगते हैं। अध्ययनकर्ताओं की टीम ने पाया कि दृष्टि संबंधी ये समस्याएं डिमेंशिया के शुरुआती लक्षणों में से एक हो सकती हैं।
यूसीएसएफ वेइल इंस्टीट्यूट फॉर न्यूरोसाइंसेज के एक अध्ययन में पाया गया कि रेटिना स्कैन के माध्यम से रक्त वाहिकाओं में महत्वपूर्ण परिवर्तनों का पता लगा सकता है जो अल्जाइमर रोग और डिमेंशिया के बारे में बहुत कुछ स्पष्ट करती हैं।
डिमेंशिया के लक्षणों के बारे में जानिए
अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि डिमेंशिया की स्थिति कई प्रकार से हमारे सोचने-समझने और समस्याओं को हल करने की क्षमता को प्रभावित करने वाली हो सकती है। इसमें सबसे पहले स्मृति हानि, निर्णय लेने में समस्या और भ्रम का अनुभव होता है। इसके अलावा कुछ लोगों को बोलने, समझने और विचार व्यक्त करने या पढ़ने-लिखने में भी कठिनाई हो सकती है।
मस्तिष्क से संबंधित इन समस्याओं के साथ डिमेंशिया के कुछ लक्षण आंखों में भी नजर आते हैं, जिनपर भी गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए।
पढ़ने-लिखने में कठिनाई महसूस होना
डिमेंशिया से पीड़ित लोगों को शुरुआती लक्षणों में दृष्टि में बदलाव होने लगता है, ऐसे लोगों के लिए दूरियों का अंदाजा लगाना और रंगों की पहचान करना भी कठिन हो सकता है। इस तरह की समस्याओं के कारण जब आप कुछ लिखते-पढ़ते हैं तो भी आपको कई प्रकार की समस्याओं का अनुभव होते रह सकता है। दृष्टि में महसूस होने वाले बदलाव की समस्या पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना आवश्यक होता है।
विजुअल मेमोरी कमजोर होना
डिमेंशिया के शिकार लोगों की विजुअल मेमोरी यानी की देखी हुई चीजों का याद रख पाना काफी कठिन होने लगता है। रोगियों के लिए चेहरों, स्थानों या वस्तुओं को याद करने में दिक्कत होने लगती है। प्रारंभिक अध्ययनों से पता चलता है कि 40-50 की आयु वाले लोगों में कई कारणों से रेटिना पतला होने लग जाता है जिसके कारण भी संज्ञानात्मक समस्याएं होने लगती हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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