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Alert: शरीर खुद से ही बना लेता है ये तीन बीमारियां, चाह कर भी नहीं कर सकते बचाव; आप भी तो नहीं हैं शिकार?

Wed, 27 Nov 2024 01:10 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Wed, 27 Nov 2024 01:10 PM IST
सार

लाइफस्टाइल और दिनचर्या की गड़बड़ी के कारण कई प्रकार की बीमारियों का खतरा रहता है। पर क्या आप जानते हैं कि आपके शरीर की ही गलती से आप कुछ बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं? आइए इन बीमारियों के बारे में जानते हैं।

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ऑटोइम्यून डिजीज के बारे में जानिए - फोटो : Freepik.com

लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के कारण कई प्रकार की क्रोनिक बीमारियों का खतरा रहता है। अगर आपके भोजन में पौष्टिक चीजों की कमी है, आप शारीरिक रूप से निष्क्रिय हैं या आपमें कुछ बीमारियों की फैमिली हिस्ट्री रही है तो भविष्य में आपमें भी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के विकसित होने का खतरा हो सकता है, ये बाहरी कारक हैं जो आपको बीमार कर सकते हैं। पर क्या आपको पता है कि हमारा शरीर खुद से ही कुछ बीमारियां बना लेता है, भले ही आपकी लाइफस्टाइल और दिनचर्या ठीक हो। कहीं आप भी तो इस तरह की दिक्कतों के शिकार नहीं हैं?



ये सुनने में भले ही अजीब लग रहा हो पर आपके शरीर की ही गलती से आप कुछ बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। इस तरह की बीमारियों को ऑटोइम्यून डिजीज कहा जाता है। ऑटोइम्यून डिजीज तब होती है जब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अपनी ही स्वस्थ कोशिकाओं, ऊतकों और अंगों पर अटैक कर देती है। इससे शरीर में इंफ्लामेशन होने का जोखिम बढ़ जाता है जिसके कारण कई प्रकार की बीमारियों का जोखिम हो सकता है।

क्या आप जानते हैं कि गठिया और डायबिटीज भी ऑटोइम्यून डिजीज हो सकती है?

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इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Adobe Stock

ऑटोइम्यून डिजीज के बारे में जानिए

जैसा कि बताया गया है कि ऑटोइम्यून डिजीज, शरीर खुद से ही बना लेता है, ऐसे में सभी लोगों को इसके बारे में जानकारी होना जरूरी है। अध्ययनों से पता चलता है कि ऑटोइम्यून बीमारियां 80 से अधिक प्रकार की हो सकती हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, न तो इन बीमारियों का कोई इलाज है और न ही आप चाह कर भी इसे रोक सकते हैं। जिन लोगों में इन समस्याओं का निदान किया जाता है, उनके उपचार में लक्षणों को प्रबंधित करने के लिए दवाइयां और सहायक चिकित्सा दी जाती है।

आइए उन बीमारियों के बारे में जानते हैं जो हमारे इम्यून सिस्टम की गलती के कारण होती हैं। 

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बच्चों में डायबिटीज का खतरा - फोटो : freepik.com

टाइप-1 डायबिटीज

डायबिटीज एक गंभीर बीमारी है जिसका खतरा वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ता जा रहा है। टाइप-2 डायबिटीज बहुत कॉमन है जिसके लिए फैमिली हिस्ट्री, लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी को प्रमुख कारण माना जाता है। पर क्या आप जानते हैं कि टाइप-1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून डिजीज है?

जब हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली स्वयं ही अग्न्याशय की इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को नष्ट करने लगती है, तब ये बीमारी होती है। बच्चों में इसका निदान सबसे ज्यादा किया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इस डायबिटीज के शिकार लोगों को जीवनभर इंसुलिन लेते रहने की आवश्यकता हो सकती है। इसकी जटिलताएं और लक्षण भी बिल्कुल उसी तरह होते हैं जैसे टाइप-2 के।

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गठिया की समस्या - फोटो : Freepik.com

रूमेटाइड अर्थराइटिस

गठिया भी बहुत आम समस्या है जिसका जोखिम वैश्विक स्तर पर बढ़ता जा रहा है। ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसे गठिया के मामले शारीरिक निष्क्रियता और कुछ अन्य कारकों के कारण हो सकते हैं, हालांकि रूमेटाइड अर्थराइटिस एक ऑटोइम्यून डिजीज है। 

रुमेटीइड आर्थराइटिस एक क्रोनिक (लंबे समय तक चलने वाली) ऑटोइम्यून बीमारी है जो ज्यादातर जोड़ों को प्रभावित करती है। जब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अपने ही शरीर के ऊतकों पर हमला कर देती है, तो इसके कारण ये समस्या हो सकती है। इस बीमारी के कारण जोड़ों में दर्द, सूजन, अकड़न और कार्यक्षमता में कमी आती है। गंभीर स्थितियों में चलना और उठना तक भी मुश्किल हो जाता है।

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बीमारियों का खतरा - फोटो : Adobe stock

मल्टीपल स्केलेरोसिस

मल्टीपल स्केलेरोसिस भी एक ऑटोइम्यून बीमारी है ये तब होती है जब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में तंत्रिका कोशिकाओं के सुरक्षात्मक आवरण पर अटैक कर देती है। इस स्थिति के कारण रोगी को देखने में समस्या, चलने में परेशानी, मांसपेशियों में कमजोरी, सुन्नता-झुनझुनी, थकान-चक्कर आने, शरीर में अकड़न, कंपन, दर्द जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। 

ये समस्या वैसे तो सभी उम्र के लोगों में देखी जाती है लेकिन वयस्कों और महिलाओं में अधिक आम है। इस बीमारी का समय पर निदान और उपचार न हो पाए तो इससे क्वालिटी ऑफ लाइफ पर भी नकारात्मक असर हो सकता है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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