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Pollution: प्रदूषण के दुष्प्रभावों को लेकर सामने आई डराने वाली रिपोर्ट, डेढ़ लाख से अधिक बच्चों की हो गई मौत

Tue, 26 Nov 2024 07:31 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Tue, 26 Nov 2024 07:31 PM IST
सार

एक हालिया विश्लेषण से पता चला है कि बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण बच्चों से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं और मृत्यु दर में बड़ा इजाफा हुआ है। साल 2019 में बाहरी वायु प्रदूषण के कारण दिल्ली में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की सबसे ज्यादा मौतें रिपोर्ट की गईं।

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Air pollution is a leading cause of death for children how air pollution affects overall health
वायु प्रदूषण और इसके कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Adobe Stock

राजधानी दिल्ली-एनसीआर में पिछले कुछ महीनों से वायु प्रदूषण का स्तर गंभीर और बेहद गंभीर श्रेणी में बना हुआ है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) का 400 या इससे अधिक बने रहना सेहत के लिए कई प्रकार से हानिकारक माना जाता है। मंगलवार (26 नवंबर) को सुबह करीब 6:30 बजे दिल्ली के कई हिस्सों में एक्यूआई 396 से 400 रिकॉर्ड किया गया। रोहिणी और विवेक विहार में एक्यूआई 430 से अधिक था। हवा की इस तरह की गुणवत्ता के अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों प्रकार के दुष्प्रभावों का खतरा रहता है।



वायु प्रदूषण और इसके कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से संबंधित एक अध्ययन की रिपोर्ट काफी डराने वाली है। कोलेब्रेशन फॉर एयर पॉल्यूशन एंड हेल्थ इफेक्ट रिसर्च (कैपहर) इंडिया के साल 2023 के विश्लेषण में कहा गया है कि बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण बच्चों में गंभीर बीमारियों और मृत्यु दर में बड़ा इजाफा हुआ है।

साल 2019 में बाहरी वायु प्रदूषण के कारण दिल्ली में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की सबसे ज्यादा मौतें रिपोर्ट की गईं। इसके बाद हरियाणा और पंजाब में भी बच्चों का मृत्यु दर काफी अधिक था।

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वायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव - फोटो : Adobe stock

प्रदूषण के कारण बढ़ा बच्चों की मौत का खतरा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये डेटा वायु प्रदूषण के कारण मृत्यु दर से संबंधित पिछले शोध और अनुमान मॉडल पर आधारित है। ये रिपोर्ट अभी तक पब्लिक डोमेन में नहीं डाली गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक अकेले साल 2019 में, बाहरी स्रोतों के कारण होने वाले प्रदूषण और इससे हवा में बढ़ते पीएम 2.5 के अलावा खाना पकाने के लिए ठोस ईंधन के उपयोग से भारत में 16 लाख से अधिक मौतें हुईं, इसमें से 1.5 लाख से अधिक मौतें 14 साल से कम उम्र के बच्चों की थीं।

भारत में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में मृत्यु के लिए वायु प्रदूषण को तीसरा सबसे बड़ा जोखिम कारक माना गया है। विशेषज्ञों ने कहा, बच्चे वायु प्रदूषण के दुष्प्रभावों से असमान रूप से प्रभावित होते हैं। इतना ही नहीं इसका प्रतिकूल प्रभाव उनके पूरे जीवन काल पर असर डाल सकता है।



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वायु प्रदूषण से होने वाले नुकसान - फोटो : Adobe stock

दिल्ली सहित कई राज्य प्रभावित

रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2019 में, उत्तराखंड, राजस्थान, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में आउटडोर PM2.5 से संबंधित मौतों के प्रतिशत में वृद्धि हुई है। वहीं गोवा, सिक्किम और हिमाचल प्रदेश में कुछ गिरावट देखी गई। राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की 10% से अधिक मौतें, घरों में खाना पकाने के लिए ठोस ईंधन के उपयोग से जुड़ी थीं।

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वायु प्रदूषण के नुकसान - फोटो : Adobe stock

धुंध और प्रदूषण सेहत के लिए नुकसानदायक

वायु प्रदूषण और इसके कारण होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों को लेकर एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि धुंध और प्रदूषण के चलते हमारे शरीर में कई हानिकारक रसायन प्रवेश कर जाते हैं, जिससे अंगों और उनकी कार्यप्रणाली पर नकारात्मक असर हो रहा है।

धुंध में मौजूद प्रदूषक कणों और हानिकारक गैसों के कारण श्वसन तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। जब हम धुंध में सांस लेते हैं, तो ये कण हमारी नाक, गले, फेफड़ों में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, एलर्जी, सांस फूलना और खांसी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से श्वसन संबंधी समस्याओं से ग्रसित लोगों को अधिक खतरा होता है।

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वायु प्रदूषण से करें बचाव - फोटो : अमर उजाला

क्या कहते हैं डॉक्टर?

वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. संजय तेवतिया कहते हैं, राजधानी दिल्ली-एनसीआर में जिस तरह से धुंध और प्रदूषण का स्तर देखा जा रहा है इसके कारण श्वसन तंत्र की समस्या, आंखों में संक्रमण, त्वचा में जलन-सूजन का तो खतरा बढ़ ही गया है साथ ही धुंध के कारण अनेक शारीरिक और मानसिक दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। इससे बचने के लिए कुछ सावधानी बरतते रहना बहुत जरूरी है। 

अगर घर से बाहर जा रहे हैं तो मास्क और चश्मा जरूर पहनें। धुंध के दौरान वातावरण में मौजूद हानिकारक प्रदूषक तत्व जैसे- कार्बन मोनो ऑक्साइड और अन्य जहरीली गैसें रक्त संचार तंत्र को प्रभावित कर सकती हैं। इससे रक्तचाप बढ़ने, दिल की धड़कन असामान्य होने और हृदय संबंधी रोगों का खतरा बढ़ सकता है। खासकर वो लोग, जो पहले से हृदय रोगों से पीड़ित हैं, वे धुंध के कारण अधिक प्रभावित हो सकते हैं।


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स्रोत और संदर्भ
Impact of Air Pollution on Child Health in India and the Way Forward

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 

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