देश में पिछले कुछ हफ्तों से कोरोना संक्रमण के रोजाना के मामलों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है। पिछले 24 घंटों के आंकड़े की बात करें तो इस दौरान देश में संक्रमण के 2.71 लाख से अधिक नए मामलों की पुष्टी की गई, वहीं कोरोना के सबसे संक्रामक माने जा रहे ओमिक्रॉन वैरिएंट के मामले भी अब 5700 से अधिक हो चुके हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक फिलहाल राहत की बात यह है कि ज्यादातार ओमिक्रॉन संक्रमितों में रोग की गंभीरता हल्के-मध्यम स्तर की है। संक्रमितों को रिकवरी के दौरान विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है।
विशेषज्ञ से जानिए: कोरोना संक्रमितों के लिए क्यों जरूरी है विटामिन-डी का सेवन, शरीर में क्या होता है इसका असर?
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कोरोना संक्रमण और विटामिन-डी
अमर उजाला से बातचीत में इंटेंसिव केयर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ विवेक सहाय बताते हैं, वैसे कोविड-19 के उपचार में विटामिन-डी के प्रभाव का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है। हालांकि यह विटामिन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने के साथ शरीर में सूजन को नियंत्रित करने में मददगार हो सकती है। कोविड रोगियों में कई ऐसी जटिलताएं देखने को मिली हैं जो शरीर में सूजन के कारण हो सकती हैं। ऐसे में यदि रोगियों को इस विटामिन की खुराक दी जाए तो इस तरह की जटिलताओं से बचाव किया जा सकता है।
वहीं नियमित रूप से इस विटामिन का सेवन करने वालों की प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है, जो कोरोना संक्रमण से उन्हें सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
कोरोना काल में लोगों में विटामिन-डी की कमी
डॉ विवेक बताते हैं, पिछले दो साल से लोगों का ज्यादातर समय लॉकडाउन में ही बीता है, इस दौरान लोगों को घरों में बंद रहना पड़ा। इसका साइड-इफेक्ट यह है कि लोगों का सूर्य की रोशनी से संपर्क कम होता गया, जिसे विटामिन डी का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है। विटामिन-डी की कमी न सिर्फ इम्युनिटी को प्रभावित कर सकती है, साथ ही इसे हड्डियों की सेहत के लिए भी नुकसानदायक माना जाता है।
क्या कहते हैं अध्ययन?
मिनेसोटा विश्वविद्यालय, यूएसए के शोधकर्ताओं का कहना है कि विटामिन-डी वास्तव में निमोनिया/ एआरडीएस, इंफ्लामेशन, इंफ्लामेटरी साइटोकिन्स और थ्रंबोसिस जैसी कोविड-19 से संबंधित गंभीरता को कम करने में मदद कर सकती है। शरीर में इस विटामिन की कमी के कारण इंफ्लामेटरी साइटोकिन्स में वृद्धि, निमोनिया और ऊपरी श्वसन पथ के संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है।
इसके अलावा विटामिन डी की कमी को थ्रोम्बोटिक एपिसोड से भी जोड़कर देखा जाता है, जोकि कोविड रोगियों में काफी आम है। अध्ययनों में पाया गया है कि विटामिन डी की कमी मोटापा और मधुमेह के रोगियों में अधिक देखी जाती है। इन स्थितियों में मृत्यु दर भी बढ़ जाता है। यही कारण है कि संक्रमितों को इस विटामिन के सेवन का सलाह दी जाती है।
कैसे प्राप्त करें विटामिन-डी?
डॉक्टरों की मानें तो विटामिन डी सप्लीमेंट्स लेने से पहले विशेषज्ञ का सलाह जरूर लेनी चाहिए। इस विटामिन की पूर्ति के लिए रोजाना कुछ मिनटों के लिए धूप में रहें। दैनिक आहार में विटामिन डी से भरपूर चीजों को शामिल करें। वसायुक्त मछलियां जैसे सैल्मन, कॉड लिवर ऑयल, मशरूम, गाय का दूध, सोया मिल्क, बादाम और अंडे जैसे खाद्य पदार्थ विटामिन डी से भरपूर होते हैं। इन चीजों का सेवन करके इस विटामिन की पूर्ति की जा सकती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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