स्वास्थ्य विशेषज्ञ कई अध्ययनों में अलर्ट करते रहे हैं कि भारत में एक साइलेंट महामारी तेजी से बढ़ती जा रही है, हालांकि अक्सर लोगों का इस तरफ ध्यान ही नहीं जाता। ये लोगों में बढ़ती विटामिन-डी की कमी है, जिससे देश की 70-80% आबादी प्रभावित देखी जा रही है। धूप वाले देश भारत में विटामिन-डी की कमी बढ़ना चौंकाने वाली बात है।
Vitamin-D: देश में साइलेंट महामारी की तरह बढ़ रही है विटामिन-डी की कमी, कहीं आप भी तो नहीं हैं शिकार?
विटामिन-डी की कमी के पीछे सबसे बड़ा कारण बदलती जीवनशैली है। लोग अब पहले की तुलना में काफी कम समय धूप में बिताते हैं। लंबे समय तक घर या ऑफिस के अंदर रहना, लगातार सनस्क्रीन का उपयोग ये खतरा बढ़ाते जा रहा है।
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विटामिन-डी की कमी पड़ सकती है भारी
विटामिन-डी शरीर में कैल्शियम और फॉस्फोरस के अवशोषण में भी मदद करता है, जिससे हड्डियां और दांत मजबूत रहते हैं।
- इसके अलावा यह इम्यून सिस्टम, मांसपेशियों की कार्यक्षमता के लिए भी जरूरी है।
- लंबे समय तक इसकी कमी रहने पर ऑस्टियोपोरोसिस, हड्डियों की कमजोरी, फ्रैक्चर का बढ़ता खतरा और बच्चों में रिकेट्स जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
- कुछ अध्ययनों में इसकी कमी को मानसिक स्वास्थ्य, इम्युनिटी और कुछ दीर्घकालिक बीमारियों को बढ़ाने वाला पाया गया है।
डॉक्टर कहते हैं, अच्छी बात यह है कि समय रहते इस कमी की पहचान कर ली जाए तो इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। संतुलित आहार, धूप में समय बिताना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट्स की मदद से विटामिन-डी के स्तर को बेहतर बनाया जा सकता है। इसलिए अगर शरीर बार-बार कोई संकेत दे रहा है, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय उसकी वजह जानना ज्यादा समझदारी होगी।
हड्डियों और दांतों पर सबसे पहला असर
विटामिन-डी का सबसे महत्वपूर्ण काम शरीर में कैल्शियम को अवशोषित करने में मदद करना है। जब इसकी कमी होती है तो कैल्शियम का सही उपयोग नहीं हो पाता, जिससे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं।
- लंबे समय तक कमी रहने पर ऑस्टियोपोरोसिस और मामूली चोट में भी फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है।
- बच्चों में यही कमी रिकेट्स का कारण बन सकती है, जिसमें हड्डियों का विकास प्रभावित होता है।
लगातार थकान और कमजोरी का समस्या
अगर पर्याप्त आराम के बाद भी शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस होती है तो यह विटामिन-डी की कमी का संकेत हो सकता है।
- विटामिन-डी मांसपेशियों के सामान्य कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी कमी से मांसपेशियों में दर्द, ऐंठन और कमजोरी हो सकती है।
- बुजुर्गों में यह समस्या गिरने और चोट लगने का खतरा भी बढ़ा सकती है।
अध्ययनों में विटामिन-डी की कमी के कारण मूड में बदलाव, उदासी या अवसाद जैसी दिक्कतों को बढ़ाने वाला भी पाया गया है। ये विटामिन मस्तिष्क के कार्यों को ठीक रखने के लिए भी जरूरी है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।