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कोरोना संक्रमण से बचे रहने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों से वैक्सीन लगवाने की अपील कर रहे हैं। जो लोग कोरोना से संक्रमित रह चुके हैं, उन्हें संक्रमण से ठीक होने के 90 दिनों बाद टीकाकरण कराने की सलाह दी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि संक्रमण से ठीक होने के बाद शरीर में बनीं एंटीबॉडीज अगले संक्रमण से सुरक्षा दे सकती हैं, ऐसे में इन लोगों को तीन महीने के बाद वैक्सीनेशन कराना चाहिए। कुछ अध्ययनों में कहा जा रहा है कि जो लोग कोरोना से ठीक हो चुके हैं, उनके लिए वैक्सीन की एक डोज ही पर्याप्त है, इससे ही शरीर में पर्याप्त प्रतिरक्षा एंटीबॉडीज विकसित हो जाती हैं। इन सूचनाओं के बीच लोगों के मन में एक सवाल अब भी बना हुआ है कि कोविड से रिकवर हो चुके लोगों को वैक्सीन की एक ही डोज लेनी चाहिए, या दोनों?
कुछ अध्ययनों में बताया जा रहा है कि दुनियाभर में तेजी से बढ़ रहे कोरोना के म्यूटेटेड वैरिएंट्स से मुकाबले के लिए वैक्सीन की दोनों खुराक बेहद जरूरी है, शरीर में पूर्ण प्रतिरक्षा तभी विकसित हो सकती है। आइए इस बारे में विशेषज्ञों से समझते हैं कि एक बार कोरोना को मात दे चुके लोगों के लिए वैक्सीन की एक डोज पर्याप्त है, या दोनों की आवश्यकता है?
महामारी से जंग: कोरोना से ठीक हो चुके लोग वैक्सीन की एक डोज लें या दोनों? क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
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कोरोना से ठीक हो चुके लोगों के लिए वैक्सीनेशन क्यों आवश्यक है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, कोरोनावायरस संक्रमण के बाद शरीर में प्राकृतिक रूप से प्रतिरक्षा का निर्माण हो जाता है, इससे बनी एंटीबॉडीज कुछ समय के लिए आपको सुरक्षा देती हैं लेकिन एक नियत समय बाद यह एंटीबॉडीज खत्म भी हो जाती हैं। कई अध्ययनों में बताया गया है कि संक्रमण के बाद शरीर में बनी एंटीबॉडीज करीब 90 दिनों तक प्रभावी रह सकती हैं। इसके बाद कोरोना से सुरक्षित रहने के लिए वैक्सीनेशन की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। हालांकि ऐसे लोगों में वैक्सीन की डोज के लेकर अब भी कंफ्यूजन की स्थिति बनी है, आइए इस बारे में जानते हैं।
वैक्सीन के सिंगल डोज के बाद का प्रभाव
कई अध्ययनों में कहा जा रहा है कि कोविड से ठीक हो चुके व्यक्तियों के शरीर में बनी एंटीबॉडीज सुरक्षात्मक दृष्टि से काफी असरकारक हो सकती है। यदि निश्चित समय के बाद ऐसे लोगों को वैक्सीन के खुराक दी जाए तो सिंगल डोज के बाद भी शरीर में मजबूत प्रतिरक्षा विकसित हो सकती है। कुछ अध्ययनों में यहां तक कहा जा रहा है कि कोविड से ठीक हो चुके लोगों में वैक्सीन के सिंगल डोज के बाद बनी एंटीबॉडीज, अन्य लोगों में दोनों डोज के बाद निर्मित एंटीबॉडीज के बराबर हो सकती हैं।
दूसरा डोज आवश्य है या नहीं?
तमाम अध्ययन इशारा करते हैं कि पहले से संक्रमित लोगों के लिए वैक्सीन की एक डोज ही पर्याप्त हो सकती है। वहीं कुछ अध्ययनों में यह भी कहा जा रहा है कि कोरोना वायरस के नए म्यूटेटेड वैरिएंट्स जैसे डेल्टा और लैम्ब्डा, आदि प्रतिरक्षा प्रणाली को आसानी से चकमा दे सकते हैं। इससे बचने के लिए वैक्सीन की दोनों डोज के बाद बनी एंटीबॉडीज को ही प्रभावी माना जा सकता है। फिलहाल भारत के वैक्सीनेशन प्रोटोकॉल में सभी लोगों को वैक्सीन की दोनों खुराक लेने की सलाह दी जाती है।
क्या है निष्कर्ष?
डॉक्टरों कहते हैं, अध्ययनों में अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं। किसी में कहा जा रहा है कि कोविड से ठीक होने के बाद एक डोज ही काफी है, वहीं दूसरी तरफ हमारे सामने कोरोना के नए और अधिक प्रभावशाली म्यूटेटेड वैरिएंट्स के मामले हैं, ऐसे में क्या सिंगल डोज ही काफी है, इसको प्रमाणित करने के लिए और अधिक शोध की आवश्यकता होगी। फिलहाल कोविड-19 के खिलाफ पर्याप्त सुरक्षा प्राप्त करने के लिए दोनों खुराक लेने की नीति बनाई गई है, ऐसे में सभी लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज लेने की ही सलाह दी जाती है।
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नोट: यह लेख डॉ विक्रमजीत सिंह (डिपार्टमेंट ऑफ इंटरनेल मेडिसिन, आकाश हेल्थकेयर दिल्ली) के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।