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कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए वैक्सीनेशन को ही विशेषज्ञ सबसे मजबूत हथियार के रूप में देखते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक वैक्सीनेशन कोरोना के गंभीर संक्रमण से सुरक्षा देने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। भारत की बात करें तो यहां पुरुषों की तुलना में महिलाएं टीकाकरण के लिए कम आ रही हैं, जोकि चिंता का विषय है। भारत की राष्ट्रीय सांख्यिकी साइट कोविन के अनुसार जनवरी 2021 से शुरू हुए टीकाकरण अभियान में 25 जून तक 309 मिलियन (30.9 करोड़) डोज का वितरण हो चुका है। इसमें से 143 मिलियन (14.3 करोड़) डोज महिलाओं जबकि 167 मिलियन (16.7 करोड़) डोज पुरुषों को दी जा चुकी है।
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि महिलाओं के टीकारण के लिए ज्यादा सामने न आने का एक कारण, उनके मन में व्याप्त कई तरीके का डर हो सकता है। आइए इस लेख में विभिन्न स्थितियों में जानते कि किन महिलाओं को टीकाकरण कराना चाहिए और किन्हें नहीं?
टीकाकरण अभियान: सभी महिलाओं को जरूर जाननी चाहिए वैक्सीनेशन से जुड़ी यह बातें
गर्भावस्था में टीकाकरण
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने गर्भवती महिलाओं के लिए टीकाकरण से संबंधित नया दिशा-निर्देश जारी किया है, इसमें कहा गया है कि गर्भावस्था से संक्रमण का खतरा नहीं बढ़ता है। गर्भवती महिलाएं भी अब बिना किसी हिचक के टीकाकरण करा सकती हैं। गाइडलाइंस में कहा गया है कि ज्यादातर गर्भवती महिलाओं में शुरुआत में संक्रमण के लक्षण हल्के देखे जाते हैं, लेकिन फिर तेजी से उनका स्वास्थ्य बिगड़ सकता है जिसका असर भ्रूण पर भी पड़ सकता है। ऐसे में कोरोना से खुद को और बच्चे को सुरक्षित रखने के लिए महिलाओं को टीकाकरण कराना चाहिए।
स्तनपान और टीकाकरण
देश में टीकाकरण के बारे फैले मिथकों को दूर करते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि कोरोना के टीके स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए सुरक्षित हैं। इसके अलावा टीके के कारण स्तनपान में कोई व्यवधान नहीं होना चाहिए। पिछले दिनों कई भ्रामक रिपोर्टें सामने आई हैं जिसमें कहा जा रहा है कि स्तनपान कराने वाली माताओं को वैक्सीन लगवाने के बाद कुछ दिनों तक बच्चे को दूध नहीं पिलाना चाहिए, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है।
मासिक धर्म के दौरान टीकाकरण
कई महिलाओं के मन में सवाल है कि क्या पीरियड्स के दौरान टीकाकरण कराना चाहिए। इस संबंध में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने ट्वीट के माध्यम से बताया है कि कोविड वैक्सीन को पीरियड्स के समय में भी बिना झिझक के लगवाया जा सकता है। मासिक धर्म और वैक्सीन के दुष्प्रभावों का कोई संबंध नहीं है। स्मार्ट बनें और टीकाकरण जरूर कराएं। पीरियड्स के दौरान वैक्सीनेशन न कराना सिर्फ मिथ है।
क्या महिलाओं में साइड-इफेक्टस का खतरा ज्यादा होता है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक टीकों की तमाम स्तर पर प्रभाविकता जानने के लिए शोध और अध्ययन जारी है। पुरुषों और महिलाओं की बायोलॉजिकल संरचना के चलते इसका असर थोड़ा अलग-अलग जरूर हो सकता है। महिलाओं में हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण उनमें वैक्सीन की प्रतिक्रिया थोड़ी भिन्न हो सकती है। संभव है कि ऐसे में वैक्सीन के कुछ साइड-इफेक्ट्स भी उनमें अधिक हो सकते हैं। हालांकि इसके बारे में विस्तार से जानने के लिए अभी और अधिक शोध की आवश्यकता है। फिलहाल सभी महिलाओं को वैक्सीनेशन जरूर कराना चाहिए, इससे न के कोविड-19 की जटिलताओं और जोखिमों को कम किया जा सकता है साथ ही यह कोरोना के कारण होने वाली मृत्यु के खतरे को भी कम कर देती है।
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नोट: यह लेख दिल्ली एम्स में प्रसूति एंव स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ तरंग प्रीत कौर के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। डॉ तरंग प्रीत को महिलाओं के विभिन्न रोगों के इलाज का अनुभव है।
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