कोरोना वायरस की दूसरी लहर का बुरा असर देश के लगभग सभी राज्यों में देखने को मिल रहा है। पिछले एक हफ्ते से रोजाना संक्रमितों के आंकड़ों में सुधार तो है लेकिन मौत की संख्या अब भी चिंता का कारण बनी हुई है। इस बीच तीसरी लहर को लेकर भी कयास लगने शुरू हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीनेशन के प्रभाव के चलते उम्मीद की जा रही है कि कोरोना की तीसरी लहर का असर ज्यादा गंभीर न हो। सरकार एक तरफ जहां टीकाकरण पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी तरफ वैक्सीनेशन को लेकर लोगों के मन में तमाम तरह के भ्रम भी हैं।
Fact Check: क्या पीरियड्स के दौरान नहीं लगवानी चाहिए वैक्सीन? जानिए विशेषज्ञ की राय
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क्या है वायरल पोस्ट
सोशल मीडिया पर कोविड वैक्सीनेशन को लेकर वायरल पोस्ट में कहा जा रहा है कि पीरियड्स के समय कोरोना की वैक्सीन नहीं लगवानी चाहिए। इस समय में टीकाकरण कराना आध्यात्मिक और शारीरिक, दोनों ही तरह से अच्छा नहीं है। पीरियड्स के समय टीकाकरण का असर प्रजनन क्षमता को भी प्रभावित कर सकता है।
क्या वास्तव में ऐसा है?
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महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने ट्वीट के माध्यम से इस वायरल खबर का खंडन करते हुए लोगों को जागरूक किया है। ट्वीट में बताया गया है कि यह दावा फर्ज़ी है। कोविड वैक्सीन को पीरियड्स के समय में भी बिना झिझक के लगवाया जा सकता है। मासिक धर्म और वैक्सीन के दुष्प्रभावों का काई संबंध नहीं है। स्मार्ट बनें और टीकाकरण जरूर कराएं।
भारत सराकर ने अब स्तनपान कराने वाली महिलाओं को टीकाकरण कराने की अनुमति दे दी है। इससे पहले शुरुआत में गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को कोरोना वायरस टीकाकरण कार्यक्रम से बाहर रखा गया था। सरकार द्वारा जारी दिशानिर्देशों में कहा गया था कि चूंकि ऐसी महिलाओं पर टीके का परीक्षण नहीं हुआ है, ऐसे में वैक्सीन के बाद सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक देश में टीकाकरण के अभियान पर जोर दिया जा रहा है। इस बीच तीसरी लहर को लेकर भी दावे किए जा रहे हैं। यदि कोरोना की तीसरी लहर आती है तो उम्मीद की जा रही है कि इसका असर ज्यादा नहीं होना चाहिए, क्योंकि तब तक देश की बड़ी आबादी का टीकाकरण हो चुका होगा।
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नोट: यह लेख महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा किए गए फैक्ट चेक ट्वीट के आधार पर तैयार किया गया है।
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