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जानना जरूरी: बांह में ही क्यों लगाई जाती है कोरोना वैक्सीन? यहां जानें इसके पीछे का कारण
देशभर में कोरोना वायरस की दूसरी लहर का कहर जारी है। ऐसे में इस वायरस से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान भी चल रहा है, और लोग भी काफी संख्या में वैक्सीन लगाने पहुंच रहे हैं। जहां पहले 45 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों को कोरोना वैक्सीन लगाई जा रही थी, तो वहीं एक मई 2021 से 18 से 44 साल तक की उम्र के लोगों का भी टीकाकरण किया जा रहा है। लेकिन क्या आपने कभी इस बात का ध्यान दिया या इस बारे में सोचा है कि आखिर कोरोना की वैक्सीन बांह में ही क्यों लगाई जा रही है? शायद नहीं, तो चलिए जानने की कोशिश करते हैं।
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महाराष्ट्र के पुणे में तीसरे चरण की शुरुआत
- फोटो : ANI
क्यों लगाई जाती है बांहा में?
दरअसल, मांसपेशी में वैक्सीन लगाने से ये फायदा होता है कि ये प्रतिरोध की प्रतिक्रिया को उत्तेजित करने की वैक्सीन की क्षमता को असरदार बनाता है। साथ ही वैक्सीन लगने वाली जगह पर रिएक्शन होने की संभावना को भी कम से कम कर देता है। यही नहीं, कोरोना वैक्सीन को कुछ इस तरह से डिजाइन किया गया है कि वो बांह की ऊपरी मांसपेशी में लगाई जाए।
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कोरोना टीका
- फोटो : पीटीआई
यहां ये समझना भी जरूरी है कि वैक्सीन को मांसपेशियो में लगाने का कारण ये भी है कि ये वैक्सीन एक डेल्टॉइड नाम की मांसपेशी में लगाना सही होता है, और ये मांसपेशी हमारे कंधे की एक ट्राएंगल मसल्स होती है। हालांकि, इसके अलावा इसे जांघ की एंटेरोलेटरल मसल्स पर भी लगाया जाता है।
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corona vaccine
- फोटो : सोशल मीडिया
बांह में लगाने के बाद कैसे काम करती है वैक्सीन?
जब व्यक्ति की बांह या जांघ की मसल्स में वैक्सीन लगाई जाती है, तब ये वैक्सीन सबसे पहले पास के लिम्फ नोड यानी लसिकापर्व में जाती है। इसके बाद ये खास तरह की कोशिकाओं द्वारा ले ली जाती है।
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covid 19 vaccine
- फोटो : PTI
वहीं, टी और बी कोशिकाओं वाली व्हाइट ब्लड सेल्स को ट्रेंड करने का काम करती है। इसमें कोशिकाएं या तो किल्लर बन जाती है, जो कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति की कोशिकाओं को खोज कर मार देती है या फिर ये एंटीबॉडी फ्लो करने वाले सेल्स बन जाती है।
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