डॉ शुचिन बजाज
निदेशक, उजाला सिग्नस ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर कई तरह से लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। वायरस के म्यूटेशन के कारण न सिर्फ लोगों में इस बार गंभीर लक्षण देखे जा रहे हैं, साथ ही पहली लहर की तुलना में इस बार मौत के आंकड़े भी अधिक रहे हैं। इतना ही नहीं कोरोना वायरस के नवीनतम म्यूटेशन आरटी-पीसीआर परीक्षणों को भी चकमा दे रहे हैं। लिहाजा कई लोगों में संक्रमण के लक्षण होने के बावजूद रिपोर्ट निगेटिव आ रहे हैं। ऐसी स्थिति में फेफड़ों से संबंधित जांच के माध्यम से संक्रमण की उपस्थिति का पता लगाया जा रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि आरटी-पीसीआर रिपोर्ट सही न आने के चलते डी-डिमर, सीआरपी और सीटी स्कैन जैसे परीक्षणों की मांग तेजी से बढ़ी है। आइए इस लेख में जानते हैं कि कोरोना की जांच में डी-डिमर टेस्ट किस तरह से कारगर माना जा सकता है?
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रक्त के थक्कों की पहचान करने में कारगर है डी-डिमर टेस्ट
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क्या है विशेषज्ञों की राय
अमर उजाला से बातचीत में उजाला सिग्नस ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के निदेशक डॉ शुचिन बजाज बताते हैं, कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमितों में तमाम गंभीर लक्षणों के अलावा रक्त के थक्के बनने जैसे नए और दुर्लभ मामले भी देखने को मिल रहे हैं। इस तरह की समस्याओं का पता लगाने के लिए डी-डिमर जैसे परीक्षणों की आवश्यकता होती है।
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डी-डिमर टेस्ट के लिए लिया जाता है ब्लड सैंपल
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डी-डिमर टेस्ट क्या है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक डी-डिमर टेस्ट के माध्यम से रक्त में डी-डिमर के स्तर का पता लगाया जा सकता है। टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आने का मतलब है कि शरीर में डी-डिमर का स्तर सामान्य से अधिक है, इस आधार पर रक्त के थक्कों का पता लगाया जा सकता है। डी-डिमर एक प्रकार का प्रोटीन होता है, रक्त के थक्कों को तोड़ने के लिए शरीर में स्वत: इसका उत्पादन होता है।
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कोविड की गंभीर स्थितियों में इस टेस्ट की जरूरत
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कोविड में डी-डिमर टेस्ट की क्या आवश्यकता है?
कोविड की गंभीर स्थितियों में इस टेस्ट के माध्यम से रक्त के थक्कों के बारे में पता लगाया जाता है। कोविड के समय यह वायरस फेफड़ों में रक्त के थक्के बनाना शुरू कर देता है, जिसकी वजह से रोगियों को सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है। थक्का जमने से रक्त प्रवाह भी बाधित होता है। इस टेस्ट को करने के लिए डॉक्टर ब्लड सैंपल लेते हैं।
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डी-डिमर का उच्च स्तर गंभीरता का सूचक
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डी-डिमर के उच्च या निम्न स्तर का क्या मतलब है?
रक्त में डी-डिमर का उच्च स्तर दर्शाता है कि रक्त के थक्कों की मात्रा अधिक है, जोकि कोविड का गंभीर संकेत हो सकता है। यही कारण है कि कोविड की गंभीरता का आकलन करने के लिए डी-डिमर टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है। फेफड़ों में रक्त के थक्कों की संख्या जितनी अधिक होगी इसी अनुपात में रोगी को ऑक्सीजन की भी अधिक आवश्यकता होती है। टेस्ट का निम्न स्तर अच्छा संकेत माना जाता है।
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नोट: यह लेख उजाला सिग्नस ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के निदेशक डॉ शुचिन बजाज से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।
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