किडनी से संबंधित बीमारियों का जोखिम काफी तेजी से बढ़ता जा रहा है। महिला हों या पुरुष, बच्चे हों या बुजुर्ग सभी इसका शिकार हो रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पुरुषों की तुलना में महिलाओं को क्रोनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) होने का खतरा अधिक रहता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसके लिए ऑटोइम्यून डिजीज, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) और गर्भावस्था से संबंधित जटिलताओं को जिम्मेदार मानते हैं।
Kidney Disease: महिलाओं में बढ़ती किडनी की बीमारियों का पता चल गया बड़ा कारण, आप भी तो नहीं हैं इसका शिकार?
यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) महिलाओं में होने वाली एक आम समस्या है, लेकिन अगर आपको यह बार-बार ये दिक्कत हो रही है तो यह किडनी की बीमारी का कारण बन सकती है।
यूटीआई के कारण किडनी की बीमारियों का खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बार-बार मूत्र मार्ग में संक्रमण यानी यूटीआई होना गंभीर जोखिमों का कारण माना जाता है। ये संक्रमण ई. कोलाई जैसे बैक्टीरिया के कारण भी हो सकता है, अगर समय रहते इसपर ध्यान न दिया जाए या फिर संक्रमण का इलाज न हो पाए तो ये संक्रमण ब्लैडर से होते हुए किडनी तक पहुंच सकता है। इससे किडनी की बीमारी और यहां तक कि किडनी फेलियर की दिक्कत भी हो सकती है।
महिलाओं को यूटीआई का खतरा क्यों ज्यादा होता है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि महिलाओं का मूत्रमार्ग छोटा होता है, जिससे बैक्टीरिया आसानी से ब्लैडर तक पहुंच सकते हैं। गर्भावस्था, मासिक धर्म और मेनोपॉज के कारण होने वाले हॉर्मोनल बदलाव भी महिलाओं में यूटीआई का जोखिम बढ़ा देते हैं।
डॉक्टर बताते हैं कि कुछ और स्थितियां हैं जो यूटीआई और किडनी की बीमारियों का जोखिम बढ़ाने वाली हो सकती हैं। कम पानी पीने के कारण शरीर से अपशिष्ट और बैक्टीरिया फ्लश नहीं हो पाते, जिससे संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है।
- असंरक्षित यौन संबंधों के कारण भी बैक्टीरिया यूरिनरी ट्रैक्ट में प्रवेश कर सकते हैं।
- जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर होती है उनमें भी संक्रामक रोगों का खतरा अधिक देखा जाता रहा है।
- जिन लोगों का ब्लड शुगर कंट्रोल नहीं रहता है उन्हें भी यूटीआई सहित कई अन्य संक्रामक रोगों का जोखिम रहता है।
कैसे जानें कहीं आपको भी तो नहीं है यूटीआई?
शुरुआत में यूटीआई के कोई लक्षण नहीं नजर आते हैं। हालांकि जब संक्रमण बढ़ने लगता है तो आपको कई प्रकार की समस्याएं हो सकती हैं।
- पेशाब करते समय दर्द या बार-बार पेशाब करने की इच्छा होना।
- अचानक पेशाब महसूस होना।
- बहुत कम मात्रा में पेशाब आना या पेशाब के साथ खून आना।
- पेट के निचले मध्य भाग में दर्द।
- तेज गंध के साथ झाग वाला पेशाब आना।
- इन संकेतों के साथ आपको तेज बुखार, उल्टी-मितली की भी दिक्कत हो सकती है।
अगर आपको इस तरह की समस्याओं का अनुभव हो रहा है तो तुरंत किसी डॉक्टर से संपर्क करें।
यूटीआई से बचाव के लिए क्या उपाय करें?
यूटीआई का समय पर पता लगाना और इलाज करना बहुत जरूरी है। उपचार का लक्ष्य संक्रमण को किडनी या ऊपरी मूत्र पथ में फैलने से रोकना है। आमतौर पर बैक्टीरिया को मारने के लिए एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं। आप दैनिक जीवन में कुछ बातों का ध्यान रखकर भी इस संक्रमण से बचाव कर सकते हैं।
- खूब सारा पानी और पदार्थ पीते रहें।
- जननांगों की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
- सुरक्षित यौन संबंध बनाना जरूरी है।
अगर आपको डायबिटीज है तो शुगर लेवल को कंट्रोल में रखना संक्रमण से बचाव के लिए बहुत जरूरी है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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