कोरोना वायरस महामारी के बाद से ही पूरी दुनिया अपने स्वास्थ्य को लेकर बेहद चिंतित और जागरुक हो गई है। पहले के मुकाबले अब लोग अपनी सेहत को लेकर काफी चिंता कर रहे हैं, ताकि वो भविष्य में होने वाले किसी भी तरह के रोग से बचे रह सके। इसकी झलक आज सोमवार को संसद में पेश किए गए बजट 2021 में भी साफ दिखी। जहां न्यूमोकोकल वैक्सीन के बारे में भी इस बजट में बताया गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यू एच ओ द्वारा भारत के पुणे में स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा विकसित की गई न्यूमोकोकल वैक्सीन को आरंभिक स्तर पर स्वीकृति दी गई है। लेकिन आप इस वैक्सीन के बारे में कितना जानते हैं? शायद, बेहद कम। तो चलिए आपको इसके बारे में बताते हैं।
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Budget 2021: न्यूमोकोकल वैक्सीन क्या है? वित्त मंत्री बोलीं- हर साल बचेगी 50 हजार बच्चों की जान
Mon, 01 Feb 2021 01:41 PM IST
प्रकाश चंद जोशी
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्रकाश चंद जोशी
Updated Mon, 01 Feb 2021 01:41 PM IST
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बजट 2021: pneumococcal vaccine
- फोटो : istock
बजट 2021: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
- फोटो : PTI
क्या है न्यूमोकोकल वैक्सीन?
- देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट के दौरान कहा कि, न्यूमोकोकल वैक्सीन को देशभर में शुरू किया जाएगा। इससे हर साल 50 हजार बच्चों की जान बचाई जा सकेगी। दरअसल, न्यूमोकोकल वैक्सीन एक विशिष्ट प्रकार के फेफड़ों के संक्रमण जैसे- निमोनिया को रोकने की एक विधि है, और ये न्यूमोकोकस नाम के जीवाणु के कारण होता है। न्यूमोकोकस बैक्टीरिया के 80 से ज्यादा प्रकारों में से 23 को वैक्सीन द्वारा ठीक किया जाता है। कई लोगों के शरीर में न्यूमोकोकस बैक्टीरिया होते हैं, और वो बीमार नहीं होते हैं, लेकिन जब ये लोग छींकते, सांस लेते या फिर खांसते हैं तो तब बैक्टीरिया को द्रव की अतिसूक्ष्म बूंदों के रूप में फैला कर किसी अन्य व्यक्ति को संक्रमित कर सकते हैं।
बजट 2021: प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : pixabay
क्यों जरूरी होती है न्यूमोकोकल वैक्सीन?
- न्यूमोकोकल एक संक्रामक रोग है और ये एक व्यक्ति से दूसरे में बड़ी ही आसानी से फैलता है, जिसमें रक्त, फेफड़े और रीढ़ की हड्डी की परत में गंभीर संक्रमण होने की संभावना अधिक होती है। ये रोग मुख्य रूप से बच्चों, बुजुर्गों समेत उन लोगों के लिए घातक हो सकता है जो पहले से अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रसित हैं। भारत में साल 2018 में निमोनिया के कारण लगभग एक लाख 27 हजार लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। इसके अलावा निमोनिया और डायरिया भारत में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु के सबसे प्रमुख कारणों में शामिल हैं। इसलिए इन रोग से बचने के लिए न्यूमोकोकल वैक्सीन की जरूरत है।
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बजट 2021: pneumococcal vaccine
- फोटो : istock
किन्हें दी जा सकती है ये वैक्सीन?
- जब कोई भी वैक्सीन तैयार होती है, तो उसकी कुछ सीमाएं जरूर होती हैं कि ये किसे लग सकती है और किसे नहीं। इसी कड़ी में अगर बात न्यूमोकोकल टीके की करें तो ये वैक्सीन दो साल से कम आयु के शिशुओं और 65 साल या फिर उससे अधिक उम्र के लोगों को दी जा सकती है। साथ ही कुछ विशेष स्वास्थ्य स्थितियों से ग्रसित बच्चों और व्यस्कों को भी ये टीका लगाया जा सकता है।
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बजट 2021: प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : पिक्साबे
दो साल से कम आयु के शिशुओं को टीके की चार खुराक दी जाती है। पहली खुराक शिशुओं को दो महीने की उम्र में, दूसरी डोज चार महीने में, तीसरी खुराक छह महीने में और चौथी और आखिरी खुराक 12 से 15 महीने में दी जाती है। वहीं, जिन लोगों की उम्र 65 साल या फिर उससे ज्यादा है तो उन्हें वैक्सीन की एक डोज दी जाती है। हालांकि, दो से 64 साल के लोगों को स्वास्थ की विशेष परिस्थितियों में ही वैक्सीन दी जाती है।