डायबिटीज वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। विशेषज्ञ इसे 'साइलेंट किलर' बीमारियों रूप में वर्गीकृत करते हैं, क्योंकि डायबिटीज कई अन्य तरह की बीमारियों के जोखिम को भी बढ़ा देती है। डायबिटीज, मेटाबॉलिज्म में गड़बड़ी के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्या है। मुख्यरूप से लाइफस्टाइल और आहार की दिक्कतों के कारण इस रोग का जोखिम बढ़ जाता है। सामान्यतौर पर वयस्कों और बुजुर्गों में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा अधिक देखा जाता रहा है, पर क्या आप जानते हैं कि बच्चों को भी यह बीमारी अपना शिकार बना सकती है?
विशेषज्ञों की चेतावनी: बच्चों में भी हो सकता है टाइप-2 डायबिटीज का खतरा, इन जोखिम कारकों को लेकर बरतें सावधानी
बच्चों में डायबिटीज का खतरा
पिछले एक-दो दशकों में दुनियाभर में मधुमेह के मामलों में चौंकाने वाली वृद्धि देखी गई है। टाइप-2 डायबिटीज के मामले सबसे ज्यादा रिपोर्ट किए जा रहे हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि जिन माता-पिता को डायबिटीज का समस्या रही है उन्हें अपने बच्चों में इसके जोखिमों को लेकर विशेष सतर्कता बरतती रहनी चाहिए। कोविड के इस दौर ने जिस तरह से युवा से लेकर बच्चों तक को सेंडेंटरी लाइफस्टाइल का आदी बना दिया है, इसके कारण डायबिटीज के मामले और भी बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं।
आइए जानते हैं कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों में किन जोखिम कारकों को चलते टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है?
आनुवांशिकता और मोटापा
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि जिन बच्चों में डायबिटीज की फैमिली हिस्ट्री रही है, यानी कि अगर माता-पिता में से किसी को डायबिटीज रहा है तो बच्चों में भी इसका खतरा हो सकता है। इसके अलावा यदि बच्चे का बॉडी मास इंडेक्स अधिक है या वह मोटापे का शिकार है तो डायबिटीज होने का खतरा और भी बढ़ जाता है। बच्चों में मोटापे की समस्या को डायबिटीज के साथ हृदय रोग और अन्य कई बीमारियों का कारण माना जाता है।
आहार और लाइफस्टाइल की समस्या
आहार और लाइफस्टाइल, डायबिटीज को बढ़ाने वाले दो प्रमुख कारण माने जाते रहे हैं। बच्चों से लेकर वयस्कों तक इन्हें डायबिटीज के प्रमुख जोखिम कारक के तौर पर जाना जाता है। यदि आपका बच्चा अधिक मीठा या पैक्ड फूड खाता है, साथ में उसमें आनुवांशिकता या मोटापे जैसे जोखिम कारक हैं तो यह डायबिटीज के खतरे को कई गुना तक बढ़ा देता है। जिन बच्चों का ज्यादातर समय मोबाइल पर या घर के भीतर बीतता है उनमें भी इसका खतरा काफी अधिक देखा गया है।
बच्चों में डायबिटीज के खतरे को जानिए
बच्चों में डायबिटीज का समय रहते निदान कर अगर उसका इलाज किया जाए तो इससे रोग को बढ़ने और गंभीर रूप लेने से बचाया जा सकता है। सामान्यतौर पर मधुमेह के लक्षण बच्चों और वयस्क, दोनों में समान होते हैं। बच्चों में यदि बिना स्पष्ट कारणों से वजन कम हो रहा है, उन्हें धुंधला दिखाई देता है या फिर भूख कम लगती है तो इसे डायबिटीज के संकेत के तौर पर देखा जाना चाहिए। यदि घाव भरने में भी समय अधिक लगता है तो इस बारे में तुरंत किसी विशेषज्ञ से सलाह लेकर जांच कराएं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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