मच्छर जनित कई प्रकार की बीमारियां मानसून के दिनों में स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का कारण बनी हुई हैं। डेंगू-मलेरिया और चिकनगुनिया के साथ देश के कई राज्यों में जीका वायरस के मामले भी बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुणे में जीका वायरस से संक्रमित दो लोगों की मौत हो गई है। दोनों मृतक क्रमश: 68 और 78 वर्ष के थे और इनका निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था।
Zika Virus: पुणे में जीका संक्रमण से दो की मौत, जानिए कैसे फैलता है ये संक्रमण और कैसे करें बचाव?
जीका वायरस का खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जीका वायरस मच्छरों के काटने से होने वाली संक्रामक बीमारी है। जिन लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है, उनमें इसका खतरा अधिक हो सकता है। कमजोर इम्युनिटी वाले लोग संक्रमण का ठीक तरीके से मुकाबला नहीं कर पाते हैं। चूंकि उम्र बढ़ने के साथ प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है इसलिए उम्रदराज लोगों में इस संक्रामक रोग का जोखिम अधिक देखा जाता रहा है। इसके अलावा गर्भवती और बच्चों में इस संक्रमण के कारण गंभीर रोग विकसित होने का खतरा हो सकता है।
जीका संक्रमण का जोखिम
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, यह एडीज मच्छरों से फैलने वाली बीमारी है। यौन संपर्क के जरिए इसके प्रसार का खतरा अधिक रहता है।
गर्भवती और बच्चों में संक्रमण की स्थिति गंभीर रोगों का कारण बन सकती है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के विशेषज्ञों ने बताया, जीका वायरस गर्भवती महिला से उसके गर्भ में पल रहे बच्चे में भी फैल सकता है। गर्भावस्था के दौरान संक्रमण से कई प्रकार के जन्मजात दोष हो सकते हैं।
जीका संक्रमण में क्या होते हैं लक्षण?
जीका के कारण होने वाली जटिलताओं को कम करने के लिए समय रहते इसके लक्षणों की पहचान करना जरूरी है। वैसे तो जीका से संक्रमित कई लोगों में शुरुआत में लक्षण नहीं दिखाई देते हैं, जिससे संक्रमण की पहचान करना भी कठिन हो जाता है। हालांकि संक्रमण के सबसे आम लक्षण बुखार, त्वचा पर दाने, सिरदर्द, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द और आंखें लाल होना है। इन संकेतों पर ध्यान देते रहना बहुत आवश्यक है।
गर्भावस्था के दौरान जीका वायरस संक्रमण बच्चों में मस्तिष्क या आंख से संबंधित जन्मजात दोष पैदा कर सकता है। इसमें बच्चों के सिर का आकार छोटा होना (माइक्रोसेफली) सबसे आम है। इसके अलावा बच्चों के मस्तिष्क के विकास की समस्याएं, खाने की समस्याएं जैसे निगलने में कठिनाई, सुनने-देखने की समस्या होना, जोड़ों की गति में कमी और मांसपेशियों में अकड़न जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
कैसे करें जीका से बचाव?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया, जीका और मच्छर जनित अन्य रोगों से बचाव के लिए जरूरी है कि आप मच्छरों के काटने से खुद को बचाकर रखें सुरक्षित संभोग के माध्यम से जीका वायरस संक्रमण से बचे रह सकते हैं। संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों की तुलना में वीर्य में वायरस अधिक समय तक रह सकता है, ऐसे में संक्रमण से बचाव के लिए सुरक्षित संभोग का ध्यान रखना बहुत आवश्यक हो जाता है। इसके अलावा मच्छरों के काटने से बचने के उपाय करना, सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करना भी आपको इस रोग से सुरक्षित रखने में सहायक है।
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स्रोत और संदर्भ
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