पिछले एक हफ्ते से देश में कोरोना के दैनिक मामलों में उछाल दर्ज किया जा रहा है। तीन महीने में ऐसा पहली बार है जब देश में संक्रमण के दैनिक मामलों के आंकड़े 4000 के पार जा रहे हैं। पिछले 24 घंटे में 4,518 नए कोविड-19 के मामले दर्ज किए गए जबकि 2,779 लोग इससे ठीक हुए। कोरोना के जारी संकट के बीच अतिसंक्रामक माने जा रहे नोरोवायरस की भी देश में एंट्री हुई है। केरल सरकार ने दो बच्चों में नोरोवायरस के मामलों की पुष्टि की। राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने बताया कि दोनों बच्चों का स्वास्थ्य स्थिति स्थिर है। फिलहाल चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन सभी को सावधान रहना चाहिए।
Norovirus: कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच 'बेहद संक्रामक' वायरस की एंट्री, जानिए फूड पॉइजनिंग से कैसे अलग हैं इसके लक्षण?
नोरोवायरस के बारे में जानिए
नोरोवायरस, पेट और आंतों में तेजी से बढ़ने वाला संक्रमण है, यह किसी संक्रमित व्यक्ति के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संपर्क में आने से आसानी से फैल सकता है। नोरोवायरस के लक्षण फूड पॉइजनिंग की तरह होते हैं, हालांकि समय रहते इसकी पहचान कर इलाज लेना आवश्यक हो जाता है।
संक्रमण की शुरुआत गंभीर उल्टी और दस्त के साथ होती है जो समय के साथ बढ़ती जाती है। नोरोवायरस अत्यधिक संक्रामक होते हैं और संक्रमण की चपेट में आने के 12 से 48 घंटे में ही इसके लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं। कुछ लोगों में, विशेष रूप से छोटे बच्चों या अन्य चिकित्सा समस्याओं के शिकार लोगों में यह खतरे को बढ़ा सकता है।
नोरोवायरस के लक्षण क्या हैं?
संक्रमण के लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं। इनपर ध्यान न देने से गंभीर दस्त के कारण निर्जलीकरण हो सकता है, जिससे समस्या बढ़ने का खतरा रहता है। नोरोवायरस के इन संकेतों को लेकर भी लोगों को अलर्ट रहना चाहिए।
- बार-बार मतली और उल्टी।
- हल्का बुखार-ठंड लगना
- सर और शरीर में दर्द
- कमजोरी और थकान।
सामान्यतौर पर ऐसे लक्षण तेज गर्मी के कारण होने वाले फूड-पॉइजनिंग जैसे समस्याओं में भी हो सकते हैं, ऐसे में दोनों में अंतर करना आवश्यक हो जाता है।
गर्मियों में पेट की दिक्कत और नोरोवायरस में अंतर
गर्मियों में पेट की समस्याएं जैसे उल्टी-दस्त आदि होना काफी सामान्य माना जाता है, इस दौरान होने वाले फूड पॉइज़निंग के ज्यादार लक्षण नोरोवायरस से मिलते-जुलते हो सकते हैं। ऐसे में इन दोनों समस्याओं में समय रहते अंतर करना आवश्यक हो जाता है।
फूड पॉइजनिंग, बैक्टीरिया या विषाक्त पदार्थों से दूषित भोजन के कारण होता है यह संक्रामक नहीं है जबकि नोरोवायरस एक से दूसरे में काफी तेजी से फैलता है। इसी तरह सामान्य उल्टी और दस्त का कारण बनने वाले रोटावायरस और नोरोवायरस में भी अंतर करना जरूरी है। इसका प्रमुख अंतर है कि नोरोवायरस वयस्कों में अधिक आम है, जबकि रोटावायरस शिशुओं और छोटे बच्चों को अधिक प्रभावित करता है।
नोरोवायरस का इलाज और बचाव
नोरोवायरस के लिए कोई विशिष्ट दवा नहीं है। यह जीवाणु संक्रमण है, इसलिए एंटीबायोटिक्स की मदद से इसके लक्षणों को कम किया जा सकता है। नोरोवायरस से बचाव के लिए कोई टीका भी नहीं है, ऐसे में संचरण के जोखिम को कम करने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखें।
- शौचालय का उपयोग करने के बाद अपने हाथों को अच्छे से धोएं।
- बीमार व्यक्ति की देखभाल करते समय सुरक्षा का ध्यान रखें।
- दूषित सतहों पर कीटाणुनाशक या क्लोरीन ब्लीच के घोल का प्रयोग करें।
- खाना बनाने या खाने से पहले अपने हाथ धोएं।
- सभी उत्पादों को काटने या खाने से पहले उसे धोकर साफ कर लें।
- कच्चा या अधपका भोजन न खाएं।
- दस्त और उल्टी की दिक्कत अगर बढ़ती नजर आए तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।
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स्रोत और संदर्भ:
Norovirus is a very contagious virus
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