भारत सहित दुनिया के तमाम देशों के लिए इस समय कोरोना महामारी बड़ी चुनौती बनी हुई है। ओमिक्रॉन वैरिएंट की संक्रामकता और वैश्विक स्तर पर बढ़ते इसके प्रसार को देखते हुए लोगों को लगातार संक्रमण से बचाव के उपाय करते रहने की सलाह दी जाती है। भारत के संदर्भ में बात करें तो यहां स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है। कई राज्यों में संक्रमण के मामलों में रोजाना बढ़ोतरी रिपोर्ट की जा रही है।
Tomato flu: कोविड-19 के बीच कई राज्यों में फैल रहा है यह दुर्लभ संक्रमण, जानिए इसके लक्षण और बचाव के तरीके
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टोमैटो फ्लू क्या है?
मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक इस वायरल संक्रमण में शरीर पर लाल रंग के छाले बनने लगते हैं, इसी वजह से इसे टोमैटो फ्लू नाम दिया गया है। यह एक दुर्लभ वायरल बीमारी और आंत पर हमला करने वाले शिगेला बैक्टीरिया के एक रूप के कारण यह संक्रमण होता है। पांच साल या उससे कम उम्र के बच्चों में इस संक्रमण के मामले सबसे अधिक देखने को मिलते हैं। इसमें संक्रमितों के शरीर पर छाले निकलने के साथ तेज बुखार और बदन में तेज दर्द की समस्या हो सकती है।
टोमैटो फ्लू के क्या लक्षण हैं?
टोमैटो फ्लू को टोमैटो फीवर के नाम से भी जाना जाता है। सामान्यतौर पर इसमें संक्रमितों की त्वचा पर चकत्ते, त्वचा में जलन और निर्जलीकरण जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। कुछ रिपोर्ट के अनुसार फ्लू में थकान, जोड़ों में दर्द, पेट में ऐंठन, मतली, उल्टी, दस्त, खांसी, छींक, नाक बहना, तेज बुखार और शरीर में दर्द भी हो सकता है। वहीं कुछ मामलों पैरों और हाथों के रंग में बदलाव भी देखा जा रहा है।
टोमैटो फ्लू क्यों होता है?
मीडिया रिपोर्ट्स से मिल रही जानकारियों के मुताबिक ज्यादातर संक्रमितों ने पहले फूड प्वाइजनिंग की शिकायत की थी। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को पानी और भोजन की स्वच्छता को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना धुले फलों और सब्जियों के सेवन के कारण यह संक्रमण हो सकता है। शिगेला बैक्टीरिया के ऐसे स्थानों पर होने की संभावना अधिक होती है।
टोमैटो फ्लू का क्या इलाज है?
केरल के डॉक्टर्स के मुताबिक अन्य प्रकार के फ्लू की ही तरह टोमैटो फ्लू भी संक्रामक होता है। जिन लोगों में संक्रमण की पुष्टि की जाती है उन्हें आइसोलेट कर देना चाहिए, क्योंकि यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तेजी से फैल सकता है।
संक्रमितों को उचित आराम और स्वच्छता का विशेष ख्याल रखने की आवश्यकता होती है। संक्रमण कुछ समय बाद स्वत: ठीक हो जाता है, हालांकि इस दौरान तरल पदार्थ का सेवन करके निर्जलीकरण की समस्या से बचाव करते रहना बहुत आवश्यक हो जाता है।