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Long Covid Syndrome: जोखिम को कम करने के लिए वैज्ञानिकों ने सुझाए उपाय, ऐसे लोगों में कम पाया गया खतरा

Sat, 26 Feb 2022 02:07 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 26 Feb 2022 02:07 PM IST
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Tips to Reduce long covi Risk, Post COVID symptoms less likely in vaccinated people
लॉन्ग कोविड के मामले - फोटो : iStock

भारत सहित दुनिया के ज्यादातर हिस्सों से ओमिक्रॉन वैरिएंट की कम होती रफ्तार की खबरें मिल रही हैं। जनवरी की शुरुआत में जहां रोजाना ढाई लाख से ज्यादा लोगों में संक्रमण का निदान किया जा रहा था, वह आंकड़ा अब घटकर रोजाना 15 हजार के करीब आ गया है। ओमिक्रॉन के मामलों में कमी भले ही सुकून देने वाली है, हालांकि संक्रमण के बाद लॉन्ग कोविड के बढ़ते मामले लोगों की चिंता बढ़ाने वाले हैं। रिपोर्ट्स से पता चलता है कि भले ही ओमिक्रॉन से संक्रमण के लक्षण हल्के रहे हों, हालांकि कुछ लोगों में पोस्ट कोविड की समस्याएं देखने को मिल रही है। इतना ही नहीं लॉन्ग कोविड की समस्या कुछ ऐसे लोगों में अब भी बनी हुई है जो दूसरी लहर के दौरान डेल्टा से संक्रमित रह चुके थे।



पोस्ट-कोविड सिंड्रोम या लॉन्ग कोविड उन समस्याओं को संदर्भित करता है, जो कोरोना से ठीक होने के बाद भी बनी रहती हैं। कई लोगों में ठीक होने का 8-9 महीनों के बाद भी दर्द, कमजोरी, गंध-स्वाद की कमी जैसी दिक्कतें देखने को मिल रही हैं। शोध से पता चलता है कि अस्पताल में भर्ती हुए बिना संक्रमण से ठीक हुए लगभग 5-10 फीसदी और अस्पताल में भर्ती हुए लगभग 80 फीसदी लोगों में पोस्ट कोविड का खतरा हो सकता है। आइए जानते हैं कि इस तरह की दिक्कतों से खुद को किस प्रकार से सुरक्षित रखा जा सकता है?

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पोस्ट कोविड समस्याओं का जोखिम - फोटो : iStock

किन्हें लॉन्ग कोविड का खतरा अधिक?
अध्ययनों से पता चलता है कि कोरोना संक्रमित वे लोग जो पहले से कोमॉबिडिटीज का शिकार रह चुके हैं, या जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है उन्हें संक्रमण से ठीक होने के बाद लॉन्ग कोविड का खतरा अधिक होता है। ऐसे लोगों में कोरोना के गंभीर लक्षण भी अधिक देखे गए थे, जो पोस्ट कोविड का खतरा कई गुना तक बढ़ा देते हैं। कोरोना के सबसे खतरनाक माने जा रहे डेल्टा वैरिएंट के संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों में 6 महीने से एक साल तक भी लॉन्ग कोविड की समस्याएं देखने को मिल रही हैं।

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टीकाकरण से कम होगा पोस्ट कोविड का खतरा - फोटो : Pixabay

पोस्ट कोविड से बचाव के लिए क्या करें?
अमर उजाला से बातचीत में इंटेंसिव केयर यूनिट के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ सौरभ अवस्थी बताते हैं, कोरोना से ठीक हो चुके ज्यादातर लोगों को कुछ महीनों तक कमजोरी, दर्द और कुछ अन्य दिक्कतें महसूस होती रह सकती हैं। जनवरी की शुरुआत में ऑफिस ऑफ नेशनल स्टैटिस्टिक्स (ONS) के एक सर्वेक्षण के अनुसार, पोस्ट कोविड की समस्याओं को कम करने में वैक्सीनेशन बड़ी भूमिका अदा कर सकता है। टीकाकरण न सिर्फ कोरोना के गंभीर संक्रमण से बचाने में मदद करता है साथ ही दोनों डोज ले चुके लोगों में गंभीर संक्रमण और पोस्ट कोविड जटिलताओं, दोनों का खतरा कम देखा गया है।

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वैक्सीन की दोनों डोज लेना जरूरी - फोटो : PTI

क्या कहते हैं अध्ययन?
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हुए करीब 15 अध्ययनों के डेटा विश्लेषण के आधार पर वैज्ञानिकों ने यह पाया गया कि जिन लोगों को फाइजर, मॉडर्न या एस्ट्राजेनेका (भारत में कोविशील्ड) की दोनों डोज लग चुकी है, उनमें केवल एक डोज लेने वाले या वैक्सीनेशन न कराने वाले लोगों की तुलना में पोस्ट कोविड का खतरा कम होता है। इतना ही नहीं कोविड-19 से संक्रमित लोगों ने टीकाकरण के बाद भी लॉन्ग कोविड के लक्षणों में सुधार की सूचना दी है। ऐसे में जिन्हें या तो सिर्फ एक खुराक मिली है या टीकाकरण ही नहीं हुआ है, उन्हें जल्द से जल्द दोनों डोज ले लेनी चाहिए। 

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पोस्ट कोविड के लक्षणों को जानिए - फोटो : iStock

200 से भी अधिक तरह के हो सकते हैं लॉन्ग कोविड के लक्षण
लैंसेट जर्नल ईक्लिनिकल मेडिसिन में जुलाई 2021 में प्रकाशित एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया था कि संक्रमण से उबर चुके लोगों में लॉन्ग कोविड के एक-दो नहीं 200 के करीब लक्षण हो सकते हैं। पोस्ट कोविड के रूप में लोगों को श्वसन, दर्द और थकान जैसी दिक्कतें अधिक हो रही हैं। इसके अलावा कुछ लोगों को थकान और कमजोरी के साथ कंपकंपी और कानों के बजने की समस्याओं का भी अनुभव हो रहा है।  यौन रोग, दिल की धड़कन में अनियमितता, याददाश्त की कमी, धुंधला दिखाई देने की दिक्कतों को लेकर भी लोग शिकायत कर रहे हैं।

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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