कोविड वैक्सीन निर्माता कंपनी एस्ट्राजेनेका ने स्वीकार किया है कि दुर्लभ मामलों में कुछ लोगों में टीके के दुष्प्रभाव हो सकते हैं, जिससे थ्रोम्बोसिस विद थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम (टीटीएस) होने का जोखिम बढ़ जाता है। इस खबर के सामने आने के बाद से लोगों के मन में कई प्रकार का डर देखा जा रहा है। विशेषतौर पर जिन लोगों ने कोविशील्ड वैक्सीन ली है उन्हें चिंता है कि कहीं ये टीके उनमें हार्ट अटैक या ब्रेन स्ट्रोक का जोखिम तो नहीं बढ़ा देंगे?
Covid Vaccine: कोविशील्ड वैक्सीन से 'टीटीएस' का खतरा, जानिए क्या होती है ये दिक्कत-कैसे करें इसकी पहचान?
क्या कोविशील्ड वालों में बढ़ गया है हार्ट अटैक का खतरा
कोविशील्ड वैक्सीन के दुष्प्रभावों के बारे में अमर उजाला से बातचीत में रिम्स रांची में न्यूरो एंड स्पाइन सर्जन डॉ विकास कुमार बताते हैं, इस रिपोर्ट को लेकर लोगों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। वैक्सीन का प्रभाव शरीर में कुछ महीनों में कम होने लगता है और बूस्टर डोज ले चुके लोगों को भी डेढ़ साल से अधिक का समय बीत चुका है, ऐसे में ज्यादा डरने और परेशान होने की जरूरत नहीं है।
नोएडा स्थित अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन के डॉक्टर श्रेय श्रीवास्तव कहते हैं, कंपनी का कहना है वैक्सीन के दुष्प्रभाव दुर्लभ स्थितियों में हो सकते हैं, ऐसे में जरूरी नहीं है कि सभी लोगों में इसका खतरा हो। दवाओं-टीकों के दुष्प्रभाव तुरंत ही देखे जाते हैं। किसी भी प्रकार के टीके में एक से दो फीसदी दुष्प्रभाव का खतरा हो सकता है। कोविशील्ड के कारण होने वाली 'टीटीएस' की समस्या भी इसी तरह की हो सकती है।
थ्रोम्बोसिस एंड थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम के बारे में जानिए
थ्रोम्बोसिस एंड थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम को कोविड-19 टीकों से जुड़ी एक दुर्लभ जटिलता माना जा रहा है। डॉक्टर "थ्रोम्बोसिस" शब्द का उपयोग रक्त का थक्का बनने की समस्या के रूप में करते हैं, ये रक्त वाहिकाओं को अवरुद्ध कर सकता है। कभी-कभी यह शरीर के कुछ हिस्सों में रक्त के प्रवाह को बाधित भी कर सकता है।
थ्रोम्बोसाइटोपेनिया तब होता है जब किसी व्यक्ति में प्लेटलेट काउंट कम हो जाता है। प्लेटलेट्स रक्त के महत्वपूर्ण घटक होते हैं जो प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया में मदद करते हैं।
'टीटीएस' के लक्षण क्या होते हैं?
डॉक्टर बताते हैं, टीटीएस के कारण कई प्रकार की समस्या हो सकती है जिसमें कुछ स्थितियों में आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी की भी जरूरत हो सकती है।
- छाती में दर्द या सिरदर्द बना रहना।
- मतली-उल्टी की समस्या।
- थक्के बनने कारण हृदय में रक्त का प्रवाह कम हो सकता है जिससे संबंधित आपको कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं।
- थक्के के कारण मस्तिष्क में भी रक्त का प्रवाह कम हो सकता है जिससे ब्रेन स्ट्रोक का भी खतरा हो सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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