एक समय था जब किसी भी दवाई या वैक्सीन को बनाने में कई सालों का समय लग जाया करता था, लेकिन अब वक्त बदल चुका है और विज्ञान ने काफी तरक्की कर ली है। इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि हमारे देश के वैज्ञानिकों ने महज एक साल के अंदर एक नहीं बल्कि दो-दो कोरोना वैक्सीन बनाकर तैयार कर दी और गणतंत्र दिवस से पहले ही देश के फ्रंटलाइन वर्कर्स को टीका लगना भी शुरू हो चुका है। लेकिन क्या आप भारत बायोटेक की उस विशेषज्ञ टीम को जानते हैं जिन्होंने ये कोरोना वैक्सीन ईजाद की है? शायद नहीं, तो चलिए आपको इनके बारे में वो बातें बताते हैं, जिन्हें जानके आपको विज्ञान और हमारे देश के वैज्ञानिकों पर गर्व महसूस होगा।
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भारत बायोटेक के एमडी कृष्णा एला
- फोटो : twitter/एमडी कृष्णा एला
दरअसल, भारत बायोटेक कंपनी द्वारा बनाई गई वैक्सीन के पीछे देश के दो सबसे बेहतरीन वैज्ञानिक डॉक्टर सुमति और डॉक्टर कृष्ण एला की भूमिका रही है। कृष्ण एला ने भारत बायोटेक की स्थापना की थी। विज्ञान ने किस कदर तरक्की की है, ये बात इन दोनों ने ही बड़े अच्छे से दुनिया को बताई है और भारत का नाम दुनियाभर में किया है। डॉक्टर एला का जन्म एक तमिल किसान परिवार में हुआ। उनकी कंपनी भारत बायोटेक, जीका, रैबीज, एच1 एन1, चिकनगुनिया, रोटावायरस और जापानी इंसेफलाइटिस जैसी वैक्सीन बना चुकी है। डॉक्टर एला को सौ से भी ज्यादा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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डॉक्टर एला ने विस्कॉन्सिन मेडिसिन यूनिवर्सिटी और मनोआ स्थित हवाई यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त की। वहीं, वो दक्षिण कैलिफोर्निया की मेडिकल यूनिवर्सिटी में काम भी कर चुके हैं। साल 1996 में उन्होंने अपनी कंपनी की शुरुआत की थी और आज मौजूदा समय में इस कंपनी में हजारों लोग काम करते हैं, और भारत ही नहीं दुनिया के लोगों को बचाने के लिए व अलग-अलग तरह की बीमारियों को मात देने के लिए टीके तैयार करते हैं। डॉक्टर एला की कंपनी भारत बायोटेक द्वारा बनाई गई कोवैक्सीन की तारीफ पूरी दुनिया में हो रही है, जो भारत, यहां के वैज्ञानिकों और विज्ञान के लिए बड़े ही गर्व की बात है।
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अब बात करते हैं डॉक्टर सुमति की, जिन्होंने कोवैक्सीन को बनाने में अपना योगदान दिया। वो इस वैक्सीन को बनाने वाली कोर टीम का प्रमुख हिस्सा रहीं। इससे पहले डॉक्टर सुमति चिकनगुनिया और जीका वायरस के लिए वैक्सीन बनाने वाली टीम का अहम हिस्सा रह चुकी हैं। इन्होंने जेएनयू से लाइफ साइंसेज में पीएचडी हासिल की है और लंदन की यूनिवर्सिटी कॉलेज और IISC बेंगलुरु से कॉमनवेल्थ स्कॉलरशिप भी पा चुकी हैं। हर भारतीय और वैक्सीन लगाने वाले व्यक्ति को डॉक्टर सुमति पर गर्व है।
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डॉक्टर एला और डॉक्टर सुमति के अलावा इस वैक्सीन को बनाने में एला के बेटे डॉक्टर रेचेज की भी अहम भूमिका रही है। रेचेज ने कोवैक्सीन की सेफ्टी और प्रतिरोधी क्षमता पर रिसर्च पेपर भी लिखा है। जुलाई 2020 में कोवैक्सीन के ट्रायल की मंजूरी मिली थी, जिसके बाद देश के लगभग 25 सेंटर्स पर लगभग 26 हजार लोगों पर इस वैक्सीन का अंतिम ट्रायल किया गया था। इसके बाद इस वैक्सीन को मंजूरी मिली और आज इसे लगाया भी जा रहा है।