आयुर्वेद के अनुसार हमारे रसोईघर में मौजूद ज्यादातर मसाले औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं, सेहत के लिए इनका सेवन करना विशेष लाभदायक हो सकता है। यही कारण है कि कोरोना जैसी विपरीत परिस्थितियों में इन्हीं तमाम मसालों से बने हुए काढ़े के सेवन की सलाह दी जा रही थी। किचन में मौजूद काली मिर्च, लौंग, हल्दी, अदरक जैसे मसाले शरीर के लिए कई प्रकार से लाभदायक हो सकते हैं। तेजपत्ता भी ऐसी ही एक गुणकारी औषधि है जिसका उपयोग वर्षों से मसाले के रूप में किया जाता रहा है।
सलाह: इस मसाले में है डायबिटीज और हृदय रोगों से सुरक्षा देने वाले गुण, अध्ययन में दावा
पाचन में फायदेमंद
अध्ययनों से पता चलता है कि तेजपत्ते में ऐसे एंजाइम मौजूद होते हैं जो प्रोटीन के ब्रेकडाउन और भोजन को तेजी से पचाने में मदद करते हैं, जिससे अपच की समस्या से छुटकारा पाने में में मदद मिलती है। इसके अलावा तेजपत्ते का सेवन गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सिस्टम को ठीक रखने के साथ पाचन को बेहतर रखने में सहायक है।
मूड संबंधी विकारों को कम करता है
आयुर्वेद के अनुसार तनाव और चिंता की स्थिति में तेजपत्ते के धुएं में बैठने से इस समस्या को ठीक किया जा सकता है। तेजपत्ते में कई ऐसे गुण होते हैं जो तनाव को आसानी से प्रतिबंधित करने में सहायक हो सकते हैं। तेज पत्ते में लिनालूल नामक एक रसायन पाया जाता है जो शरीर में तनाव पैदा करने वाले हार्मोन के स्तर को कम करने में मददगार है।
डायबिटीज रोगियों के लिए विशेष लाभदायक
डायबिटीज दुनियाभर में तेजी से बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, इसमें तेजपत्ते का सेवन फायदेमंद पाया गया है। जर्नल ऑफ क्लिनिकल बायोकैमिस्ट्री एंड न्यूट्रिशन में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार एक महीने तक लगातार करीब 3 ग्राम तेज पत्ते का सेवन ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित रखने में सहायक हो सकता है। मधुमेह संबंधित कई अन्य जटिलताओं में भी इसके लाभ देखने को मिले हैं।
कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायक
तेजपत्ते में मौजूद औषधीय गुण ब्लड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में सहायक हो सकते हैं। यही कारण है कि तेजपत्ता को हृदय रोग में भी लाभदायक माना जाता है। तेजपत्ता, गुड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ावा देता है जोकि हृदय के लिए लाभदायक माना जाता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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