कैंसर वैश्विक स्तर पर गंभीर और जानलेवा बीमारियों में से एक है। हर साल कई प्रकार के कैंसर के कारण दुनियाभर में लाखों लोगों की मौत हो जाती है। मेडिकल साइंस में आधुनिकता और तकनीकी विकास से कैंसर के उपचार में मदद तो मिली है पर अब भी आम लोगों के लिए कैंसर का उपचार करा पाना इतना आसान नहीं है।
Cancer: कैंसर रोगियों के लिए 'वरदान' साबित हो सकती है 100 रुपये की ये दवा, रोग के बढ़ने का जोखिम होगा कम
कैंसर को फैलने से रोक सकती है ये दवा
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 'आर+सीयू' नाम की इस टैबलेट में प्रो-ऑक्सीडेंट के साथ रेस्वेराट्रॉल और कॉपर होता है जो पेट में ऑक्सीजन रेडिकल्स उत्पन्न करता है। ये रेडिकल्स कैंसर कोशिकाओं द्वारा रिलीज किए जाने वाले क्रोमेटिन कणों को नष्ट कर सकती हैं। इससे अन्य स्वस्थ कोशिकाओं के कैंसरग्रस्त होने का जोखिम कम हो जाता है। यह प्रक्रिया कैंसर कोशिकाओं को शरीर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जाने से भी रोकती है, जिसे 'मेटास्टेस' कहा जाता है।
कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने में मददगार इस दवा से रोग के जोखिमों को भी कम किया जा सकता है।
चूहों पर किए अध्ययन में दिखे अच्छे परिणाम
रिपोर्ट में कहा गया है कि चूहों पर किए गए इस दवा के परीक्षण में बेहतर परिणाम देखे गए हैं। चूहों और इंसानों में कुछ जीन्स एक समान होते हैं, ऐसे में उम्मीद है कि इसके परिणाम इंसानों में भी अच्छे हो सकते हैं। फिलहाल दवा का मानव परीक्षण किया जा रहा है।
अध्ययन के लिए चूहों में मानव कैंसर कोशिकाएं डाली गईं, जिससे उनमें एक ट्यूमर बन गया। फिर चूहों का इलाज रेडिएशन थेरेपी, कीमोथेरेपी और सर्जरी से किया गया। शोध में पता चला कि जब ये कैंसर कोशिकाएं डेड हो जाती हैं, तो वे छोटे-छोटे टुकड़ों में टूटने लगती है। इससे निकलने वाले कण रक्त प्रवाह के माध्यम से शरीर के अन्य हिस्सों में जा सकते हैं और स्वस्थ कोशिकाओं में प्रवेश करके उन्हें भी कैंसर में बदल सकते हैं। इस दवा की मदद से कैंसर के अन्य हिस्सों में जाने से रोका जा सकता है।
कैंसर उपचार के दुष्प्रभावों को कम कर सकती है ये दवा
अध्ययन की अब तक की रिपोर्ट के आधार पर वैज्ञानिकों का कहना है कि आर+सीयू दवा कैंसर उपचार में चिकित्सा के दुष्प्रभावों को लगभग 50% तक कम कर सकती है साथ ही ये कैंसर की पुनरावृत्ति को रोकने में 30% प्रभावकारिता प्रदर्शित करती है। यह टैबलेट अग्न्याशय, फेफड़े और मौखिक कैंसर में प्रभावी हो सकती है। विशेषज्ञों की टीम ने कहा, फिलहाल भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) से इस दवा की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है। मंजूरी मिलते ही टैबलेट के जून-जुलाई तक बाजार में उपलब्ध होने की उम्मीद है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ ?
टाटा इंस्टीट्यूट में वरिष्ठ कैंसर सर्जन डॉ. राजेंद्र बडवे कहते हैं, अगर टेबलेट को मंजूरी मिल जाती है तो इसकी कीमत काफी कम होगी। इसकी कीमत 100 रुपये से भी कम रखने का प्रयास है जिससे आम लोगों के लिए भी इसके इस्तेमाल को आसान बनाया जा सके। कैंसर के उपचार में ये दवा कितनी असरदार है इसको लेकर फिलहाल दावा नहीं किया जा सकता है पर ये कैंसर के दोबारा बढ़ने के जोखिमों को जरूर कम कर सकती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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