दुनियाभर के तमाम देशों में कोरोना संक्रमण के दोबारा से बढ़ते मामलों के बीच तीसरी लहर का आशंका तेज हो गई है। पूरा विश्व अभी इस भयंकर महामारी से परेशान ही था कि इन सबके बीच रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। सीडीसी के मुताबिक अमेरिका का टेक्सास शहर में 'मंकीपॉक्स वायरस संक्रमण' का एक दुर्लभ मामला सामने आया है। इससे पहले साल 2003 में अमेरिका के कुछ शहरों में मंकीपॉक्स का प्रकोप देखने को मिला था। सीडीसी द्वारा साझा की गई जानकारियों के मुताबिक जिस व्यक्ति में मंकीपॉक्स की पुष्टि हुई है, उसने हाल ही में नाइजीरिया से अमेरिका की यात्रा की थी। अधिकारियों के मुताबिक संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए कई अन्य लोगों में भी संक्रमण का खतरा हो सकता है, इसकी जांच की जा रही है।
अलर्ट: 18 साल बाद सामने आया दुर्लभ 'मंकीपॉक्स संक्रमण' का मामला, जानिए इसके लक्षण और कारण विस्तार से
क्या है मंकीपॉक्स संक्रमण?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक साल 1970 में पहली बार इंसानों में मंकीपॉक्स संक्रमण के मामले सामने आए थे। तब से अब तक 11 अफ्रीकी देशों में इस संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। अफ्रीकी देशों से बाहर साल 2003 में अमेरिका में मंकीपॉक्स संक्रमण के मामलों की पुष्टि की गई थी, इसके 18 साल बाद 2021 में यह पहला मामला है। रिपोर्टस के मुताबिक साल 2003 में घाना से आयात किए गए पालतू कुत्तों के संपर्क में आने के कारण अमेरिका में संक्रमण फैला था। भारत सहित एशियाई देशों में इस तरह के मामलों की पुष्टि नहीं है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि मंकीपॉक्स संक्रमण, संक्रमित जानवरों के रक्त, शारीरिक तरल पदार्थ या त्वचा के घाव के संपर्क में आने के कारण इंसानों में फैलता है। यह संक्रमण मूलरूप से किस जानवर से संबंधित है, इस बारे में वैज्ञानिकों को स्पष्ट जानकारी नहीं है।
मंकीपॉक्स संक्रमण के क्या लक्षण हो सकते हैं?
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक मंकीपॉक्स संक्रमण का इनक्यूबेशन पीरियड (संक्रमण होने से लक्षणों की शुरुआत तक) आमतौर पर 6 से 13 दिनों का होता है, हालांकि कुछ लोगों में यह 5 से 21 दिनों तक भी हो सकता है। संक्रमित व्यक्ति को बुखार, तेज सिरदर्द, लिम्फैडेनोपैथी (लिम्फ नोड्स की सूजन), पीठ और मांसपेशियों में दर्द के साथ गंभीर कमजोरी का अनुभव हो सकता है। लिम्फ नोड्स की सूजन की समस्या को सबसे आम लक्षण माना जाता है। इसके अलावा रोगी के चेहरे और हाथ-पांव पर बड़े आकार के दाने हो सकते हैं। कुछ गंभीर संक्रमितों में यह दाने आंखों के कॉर्निया को भी प्रभावित कर सकते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक मंकीपॉक्स से मौत के मामले 11 फीसदी तक हो सकते हैं। संक्रमण के छोटे बच्चों में मौत का खतरा अधिक रहता है।
मंकीपॉक्स संक्रमण के क्या कारण हैं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक मंकीपॉक्स नामक वायरस के कारण यह संक्रमण होता है। यह वायरस ऑर्थोपॉक्सवायरस समूह से संबंधित है। इस समूह के अन्य सदस्य मनुष्यों में चेचक और काउपॉक्स जैसे संक्रमण का कारण बनते हैं। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक मंकीपॉक्स के एक से दूसरे व्यक्ति में संक्रमण के मामले बहुत ही कम हैं। संक्रमित व्यक्ति के छींकने-खांसने से निकलने वाली ड्रॉपलेट्स, संक्रमित व्यक्ति की त्वचा के घावों या संक्रमित के निकट संपर्क में आने के कारण दूसरे लोगों में भी संक्रमण होने की आशंका रहती है।
मंकीपॉक्स संक्रमण का इलाज कैसे किया जाता है?
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक वर्तमान में मंकीपॉक्स का कोई इलाज उपलब्ध नहीं है। चेचक को खत्म करने के लिए दी जाने वाली वैक्सीनिया, टीकों को मंकीपॉक्स के खिलाफ सुरक्षात्मक माना जाता है। हालिया वर्षों में चेचक और मंकीपॉक्स की रोकथाम के लिए वैक्सीनिया वैक्सीन के थर्ड जनरेशन को मंजूरी दी गई है। कई अध्ययनों में चेचक के लिए दी जाने वाली वैक्सीन को मंकीपॉक्स संक्रमण रोकने में 85 फीसदी तक कारगर पाया गया है।