कोरोना महामारी: वैक्सीनेशन के 20 दिनों तक ऐसे लक्षणों को लेकर रहें सावधान, सरकार ने जारी की सूची
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इन लक्षणों पर रखें विशेष नजर
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भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय के ट्विटर हैंडल 'कोविड न्यूज बाई एमआईबी' द्वारा साझा की गई जानकारियों के मुताबिक वैक्सीन लगवाने के 20 दिनों के भीतर सभी लोगों को कुछ लक्षणों पर विशेष नजर रखने की आवश्यकता है। सांस की तकलीफ, छाती में दर्द, उल्टी होना या लगातार पेट दर्द होना, धुंधला दिखाई देना अथवा तेज़ या लगातार सिरदर्द रहने की स्थिति में डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें।
📍किसी भी कोविड–19 वैक्सीन को लगवाने के 20 दिनों के भीतर होने वाले लक्षणों पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है
✅सांस की तकलीफ
✅छाती में दर्द
✅उल्टी होना या लगातार पेट दर्द होना
✅धुंधला दिखाई देना
✅तेज़ या लगातार सिरदर्द#StaySafe pic.twitter.com/FbhURNWFSU
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
अमर उजाला से बातचीत में उजाला सिग्नस ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के निदेशक डॉ शुचिन बजाज कहते हैं, देश में मौजूद कोरोना के सभी टीके सेहत के नजरिए से बिल्कुल सुरक्षित हैं। सामान्यतौर पर वैक्सीनेशन के बाद लोगों में किसी प्रकार के गंभीर साइड-इफेक्ट्स के लक्षण नहीं देखे जा रहे हैं, हालांकि यदि किसी को कोई लक्षण महसूस होता भी है तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। कोरोना से सुरक्षा देने में सभी वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक उम्र के आधार पर टीके के साइड-इफेक्ट्स में भिन्नता हो सकती है। युवाओं को उम्रदराज लोगों की तुलना में अधिक तीव्रता वाले साइड-इफेक्ट्स का अनुभव हो सकता है। इसका मुख्य कारण शरीर की प्रतिरोधक प्रतिक्रिया को माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्यतौर पर टीकाकरण के बाद होने वाले साइड-इफेक्ट्स एक से दो दिनों में स्वत: ठीक हो। दीर्घकालिक दुष्प्रभावों के मामले कम देखने को मिले हैं, इसलिए सभी लोगों को वैक्सीनेशन जरूर कराना चाहिए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोरोना की संभावित तीसरी लहर से सुरक्षित रहने के लिए सभी लोगों को जल्द से जल्द टीकाकरण अवश्य करा लेना चाहिए। तमाम अध्ययनों में स्पष्ट हो चुका है कि वैक्सीन, कोरोना के गंभीर संक्रमण और इसके कारण होने वाली मौत के खतरे को कम करने में बेहद कारगर हैं। कोरोना के डेल्टा जैसे गंभीर संक्रामक वैरिएंट्स से भी सुरक्षित रखने में वैक्सीनों को कारगर माना जा रहा है।
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नोट: यह लेख सूचना और प्रसारण मंत्रालय के ट्विटर हैंडल कोविड न्यूज बाई एमआईबी द्वारा साझा की गई जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।