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वैज्ञानिकों की चेतावनी: ऐसे लोगों में दोगुना तक हो सकता है कोरोना से संक्रमण और मौत का खतरा

Tue, 31 Aug 2021 05:56 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Tue, 31 Aug 2021 05:56 PM IST
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Study warns People with psychiatric disorders at higher risk of COVID-19 hospitalisation and death,
कोरोना संक्रमण का खतरा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock

कोरोना संक्रमण के समय में दुनियाभर में कई बीमारियां पहले की अपेक्षा काफी तेजी से बढ़ी हैं। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के मामले में भी पिछले डेढ़ साल में काफी इजाफा देखने को मिला है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना संक्रमण और इससे उत्पन्न स्थितियों के कारण लोगों के दिमाग पर गहरा असर पड़ा है, आने वाले वर्षों में यह समस्याएं स्वास्थ्य विभाग पर दबाव डाल सकती हैं। इस बीच हालिया अध्ययन चिंता को और बढ़ाने वाली है। अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया है कि सामान्य लोगों की तुलना में मानसिक विकार से ग्रसित व्यक्तियों में कोविड संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होने और मृत्यु का खतरा दो गुना तक अधिक हो सकता है।


यूरोपियन कॉलेज ऑफ न्यूरोसाइकोफार्माकोलॉजी के इम्यूनो-न्यूरोसाइकियाट्री नेटवर्क द्वारा किए गए इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने स्वास्थ्य संगठनों को आगाह किया है। अध्ययन के लेखकों ने अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थाओं से गंभीर मानसिक बीमारी और बौद्धिक अक्षमता के शिकार लोगों का जल्द से जल्द टीकाकरण कराने की अपील की है, जिससे कोरोना की तीसरी लहर से इन्हें सुरक्षित किया जा सके।
आइए आगे की स्लाइडों में अध्ययन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातों को जानते हैं।

Study warns People with psychiatric disorders at higher risk of COVID-19 hospitalisation and death,
मानसिक रोगियों को संक्रमण का खतरा अधिक (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay

मानसिक रोग और कोरोना संक्रमण का खतरा
'लैंसेट साइकियाट्री' में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 22 देशों में किए गए 33 अध्ययनों से डेटा संकलित किया। यह अध्ययन कोविड-19 के 1,469,731 रोगियों पर किए गए थे जिनमें से 43,938 रोगी मानसिक समस्याओं के शिकार थे। अध्ययन के विश्लेषण के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि मानसिक रोग के शिकार या एंटीसाइकोटिक्स दवाओं का सेवन कर रहे लोगों में कोविड-19 से संबंधित मृत्यु दर अधिक हो सकती है। इसके अलावा मादक द्रव्यों के सेवन संबंधी विकार वाले मरीजों को भी कोविड-19 के कारण अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता अधिक हो सकती है।

Study warns People with psychiatric disorders at higher risk of COVID-19 hospitalisation and death,
तीसरी लहर मानसिक रोगियों के लिए हो सकती है गंभीर (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay

मानसिक रोगियों का जल्द से जल्द कराया जाए टीकाकरण
बेल्जियम स्थित यूनिवर्सिटी साइकियाट्रिक हॉस्पिटल कैंपस डफेल के प्रोफेसर और अध्ययन के प्रमुख लेखर डॉ लिविया डी पिकर कहते हैं, दुनियाभर में मानसिक रोगों के शिकार लोगों की संख्या पिछले एक दशक में काफी बढ़ी है। कोरोना की तीसरी लहर ऐसे रोगियों के लिए काफी गंभीर हो सकती है, ऐसे में किसी विकट समस्या से बचने के लिए मानसिक रोग के शिकार लोगों का जल्द से जल्द वैक्सीनेशन कराना बहुत आवश्यक है। अगर इस दिशा में तेजी से काम नहीं किया गया तो कोरोना की तीसरी लहर में अस्पतालों पर बड़ा दबाव पड़ सकता है।

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Study warns People with psychiatric disorders at higher risk of COVID-19 hospitalisation and death,
कई दवाओं के सेवन के कारण बढ़ सकती है समस्या - फोटो : Social media

एंटीसाइकोटिक्स दवाओं का ज्यादा सेवन भी नुकसानदायक
फ्रांस स्थित पेरिस एस्ट क्रेटिल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और अध्ययन के लेखकों में से एक प्रोफेसर मैरियन लेबॉयर कहते हैं, मानसिक रोगियों के उपचार के लिए प्रयोग में लाई जा रही साइकोफार्माकोलॉजिकल उपचार विधियों के प्रभाव को जानने के लिए और अध्ययन की आवश्यकता है। हमने अध्ययन में पाया है कि कई तरह की मानसिक रोग की दवाइयां गंभीर रूप से स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं। एंटीसाइकोटिक्स दवाइयां हृदय और थ्रोम्बोम्बोलिक समस्याओं के खतरे को बढ़ा देती हैं, जिन्हें भी कोरोना के महत्पूर्ण कारक के रूप में देखा जा रहा है। यह दवाइयां प्रतिरक्षा प्रणाली को भी प्रभावित कर रही हैं।

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Study warns People with psychiatric disorders at higher risk of COVID-19 hospitalisation and death,
टीकाकरण से कम किया जा सकता है कोरोना का खतरा (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : PTI

क्या है अध्ययन का निष्कर्ष?
अध्ययन के निष्कर्ष में प्रोफेसर मैरियन लेबॉयर कहते हैं, हमने यह भी देखा है कि मानसिक रोगों में दी जाने वाली बेंजोडायजेपाइन ग्रुप की दवाइयां श्वसन संबंधी जोखिमों को बढ़ाने के साथ बढ़े हुए मृत्यु दर का कारण बन सकती हैं। इसके अलावा सामाजिक और जीवनशैली से संबंधी कारक जैसे आहार, शारीरिक निष्क्रियता, सोशल आइसोलेशन, शराब और तंबाकू का अधिक उपयोग और नींद में कमी भी, न सिर्फ कोरोना संक्रमण के खतरे को बढ़ा सकती हैं, साथ ही यह संक्रमण की स्थिति को गंभीर बनाने का कारक भी साबित हो सकती हैं। स्वास्थ्य  विशेषज्ञों को इस बारे में भी अलर्ट रहने की आवश्यकता है।

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स्रोत और संदर्भ: 
Mental disorders and risk of COVID-19-related mortality, hospitalisation, and intensive care unit admission: a systematic review and meta-analysis

अस्वीकरण नोट: यह लेख 'लैंसेट साइकियाट्री' जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। संबंधित विषय के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए अपने चिकित्सक से सलाह लें। 

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