कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए देश में तरह-तरह के घरेलू उपायों के प्रयोग में लाया जा रहा है। गर्म पानी और काढ़े से लेकर तमाम तरह के इम्यूनिटी बढ़ाने वाले फलों के सेवन को इन दिनों कोरोना वायरस से बचाने वाले ढाल के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। भाप लेना भी ऐसा ही एक उपाय है जिसे विशेषज्ञ, संक्रमण से सुरक्षा देने वाले उपायों में से एक मान रहे थे।
क्या कोरोना के असर को कम करने में स्टीम थेरपी से नहीं है कोई लाभ? अध्ययन में हुए चौंकाने वाले खुलासे
अध्ययन के मुताबिक, ''दुनियाभर में प्रचार किया जा रहा है कि नाक और मुंह के माध्यम से भाप लेने से कोरोना वायरस के प्रभाव को कम किया जा सकता है। यदि सभी लोग एक हफ्ते तक स्टीम ले लें तो इस गंभीर महामारी को आसानी से खत्म किया जा सकता है।''
इस धारणा को सिरे से खारिज करते हुए राउटर्स में छपी एक रिपोर्ट कहती है कि यह सलाह न सिर्फ गलत है बल्कि लोगों के लिए यह खतरनाक भी हो सकता है।
राउटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक न तो यूएस सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) और न ही विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) कोरोनावायरस के उपचार के रूप में स्टीम लेने की सलाह देता है। सीडीसी के अधिकारियों का भी कहना है कि अब तक ऐसा कोई अध्ययन नहीं है जिसके आधार पर माना जा सके कि भाप लेने से शरीर में कोरोना वायरस के असर को कम किया जा सकता है।
स्पैनिश पेडियाट्रिक एसोसिएशन यहां तक कहता है कि गर्म पानी से भरे पैन के ऊपर तौलिया से सिर ढककर भाप लेने का तरीका खतरनाक है। बर्मिंघम चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल ने स्टीम इनहेलेशन से जुड़े जोखिमों के बारे में सचेत करते हुए कहा है कि कोरोना वायरस से मुकाबले के लिए लोगों को इस तरह के तरीकों को प्रयोग में नहीं लाना चाहिए, वैज्ञानिक नजरिए से इसके कोई लाभ नहीं हैं।
वहीं दूसरी ओर भाप लेने के फायदों के बारे में जब हमने नोएडा में एंटी कोरोना टास्क फोर्स के डॉक्टर सिद्धार्थ गुप्ता से बातचीत की तो उनकी राय इस बारे में काफी अलग है। डॉ सिद्धार्थ कहते हैं कि भारत में सदियों से भाप लेने का चलन है, इतना ही नहीं विशेषज्ञ इसे सुश्रुत के समय में भी सांस की समस्याओं को दूर करने के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले उपायों में से एक मानते हैं। भाप लेने से श्वसन प्रणाली तो ठीक ही रहती है, साथ ही यदि आपके फेफड़ों तक कोरोना या कोई अन्य संक्रमण पहुंच गया है, ऐसे मामलों में भी इससे लाभ मिलता है।