वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों तरह से ही यह प्रमाणित हो चुका है कि पृथ्वी पर मौजूद सभी प्राकृतिक चीजें हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इनमें से किसी की भी कमी, हमारी सेहत पर बुरा असर डाल सकती है। सूरज की रोशनी भी हमारे स्वस्थ जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसी से संबंधित हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने लोगों को एक गंभीर बीमारी के बारे में आगाह किया है।
सावधान: सूर्य के प्रकाश में ना निकलने वालों को कैंसर का खतरा अधिक, अध्ययन में दावा
सूर्य की किरणें और कोलोरेक्टल कैंसर का संबंध
अमेरिका के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय सैन डिएगो के शोधकर्ताओं ने विभिन्न देशों में कई आयु समूह के लोगों में यूवीबी किरणों और कोलोरेक्टल कैंसर के संबंध को जानने के लिए अध्ययन किया।अध्ययन के निष्कर्ष को जर्नल बीएमसी पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित किया गया है। अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने 186 देशों में 75 वर्ष तक के सभी आयु वर्ग के लोगों में यूवीबी की अपर्याप्तता को कारण कोलोरेक्टल कैंसर का जोखिम अधिक पाया।
शरीर के लिए पर्याप्त मात्रा में आवश्यक है विटामिन डी
वैज्ञानिकों का कहना है कि सूर्य की पराबैंगनी (यूवीबी) किरणों के अपर्याप्त संपर्क के कारण शरीर में विटामिन डी का स्तर कम हो जाता है। जिन लोगों को विटामिन डी की कमी होती है उनमें कोलोरेक्टल कैंसर का जोखिम अधिक होता है। अध्ययन के लेखकों के अनुसार विटामिन डी की कमी को ठीक करके कोलोरेक्टल कैंसर के जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सूर्य की रोशनी विटामिन डी का सबसे आसान और बेहतर स्रोत मानी जाती है, ऐसे में सभी लोगों को सुबह के समय सूर्य के संपर्क में आने की कोशिश जरूर करनी चाहिए।
यरोपीय देशों में कोलोरेक्टल कैंसर के मामले अधिक
कई रिपोर्टस में सामने आ चुका है कि यूरोपीय देशों में लोगों को कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा अधिक होता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक यूरोप में हर साल साढ़े चार लाख से ज्यादा लोगों में कोलोरेक्टल कैंसर के मामलों का निदान किया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कई अन्य कारकों के अलावा यरोपीय देशों धूप की कमी के कारण इस गंभीर कैंसर के मामलों का जोखिम अधिक देखा गया है। इसके अलावा ठंडे स्थान में रहने वाले लोगों की त्वचा की रंगत भी ऐसी होती है जो यूवीबी किरणों का ठीक तरीके से अवशोषण नहीं कर पाती है, इसे भी एक संभावित कारण के रूप में देखा जाना चाहिए।
क्या है कोलोरेक्टल कैंसर की समस्या
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोलोरेक्टल कैंसर मुख्यरूप से बृहदान्त्र और मलाशय को प्रभावित करता है। इसे आंत के कैंसर, पेट के कैंसर या मलाशय के कैंसर के रूप में भी जाना जाता है। इस कैंसर के शिकार 37 फीसदी लोगों को मल या मलाशय से खून आने और पेट में दर्द तथा 23 फीसदी लोगों को एनीमिया की समस्या हो सकती है। कुछ लोगों में कैंसर का पता तब चलता है जब यह फेफड़े, यकृत और शरीर के अन्य हिस्सों में फैल चुका होता है। इसके लक्षण प्रभावित हिस्सों पर निर्भर कर सकते हैं।
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स्रोत और संदर्भ:
Could age increase the strength of inverse association between ultraviolet B exposure and colorectal cancer
अस्वीकरण नोट: यह लेख जर्नल बीएमसी पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित अध्ययन के निष्कर्ष के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। ज्यादा जानकारी के लिए आप अपने चिकित्सक से संपर्क कर सकते हैं।