सामान्य पानी से तो हर कोई नहाता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि खिलाड़ियों के नहाने के लिए बर्फ के पानी का इस्तेमाल किया जाता है। इस पानी से नहाने पर उनके शरीर की थकान और दर्द खत्म हो जाता है और वो जल्दी ही फिर से अभ्यास के लिए तैयार हो जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बर्फ के पानी से नहाने पर मांसपेशियों को आराम मिलता है। लेकिन लंबे समय से चलने वाले इस नियम पर ताजा हुए अध्ययन में पता चला है कि आइस बाथ लेने से शरीर को कुछ नुकसान होता है। आइए जानें क्या कहता है शोध।
बर्फ के पानी से नहाना नहीं है लाभकारी, रुक जाता है मांसपेशियों का विकास
शोधकर्ताओं का कहना है कि इस बात का दावा कोई नहीं कर सकता है कि बर्फीले पानी में बैठना आरामदायक अनुभव है। सच यही है कि ठंडे पानी की बूंदें सुई की तरह चुभती हैं। इसके बाद भी लोग आइस बाथ लेते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि इससे कड़े व्यायाम से थकी मांसपेशियों को आराम मिलता है, मांसपेशियों को होने वाला नुकसान कम होता है और मांसपेशियों के विकास में भी मदद मिलती है। वास्तव में ऐसा नहीं है।
युवाओं और एथलीटों पर किए गए अध्ययन में पाया गया है कि वेट लिफ्टिंग के बाद अगर आइस बाथ लिया जाए, तो इससे व्यायाम का असर कम हो जाता है। इससे मांसपेशियों की मरम्मत की दिशा में तो कोई लाभ नहीं होता है, लेकिन उनका विकास जरूर रुक जाता है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि मांसपेशियां लंबे फाइबर से निर्मित होती हैं। कसरत के बाद इनका विकास तेजी से होता है। कसरत के बाद बर्फीला पानी पड़ने से फाइबर का विकास रुक जाता है। आइस बाथ से मांसपेशियों में मौजूद बॉयोकेमिकल्स का संतुलन बिगड़ जाता है। ऊतक के विकास के लिए जरूरी प्रोटीन की मात्रा घट जाती है, जबकि उनके टूटने के लिए जिम्मेदार प्रोटीन की मात्रा बढ़ जाती है।
बर्फीला पानी पड़ने से शरीर की मांसपेशियों पर होने वाले असर का पता लगाने के लिए ऑस्ट्रेलिया स्थित डेकीन यूनिवर्सिटी और विक्टोरिया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने शोध किया। इसके लिए वेट लिफ्टिंग ना करने वाले 16 स्वस्थ युवकों का चयन किया गया। सात हफ्तों तक चले अध्ययन के दौरान उन सभी को हर हफ्ते तीन बार वर्कआउट करना था। वर्कआउट के बाद आधे लोगों ने आइस बाथ लिया जबकि अन्य ने कुछ देर बैठकर अपनी थकान दूर की।