वायु-प्रदूषण मौजूदा समय की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक है। देश के कई शहरों में वायु-प्रदूषण का बढ़ता हुआ स्तर लोगों को गंभीर बीमारियों की चपेट में लेता जा रहा है। ठंड के मौसम में दिल्ली जैसे शहर गंभीर रूप से स्मॉग की चपेट में आ जाते है, जहां सांस लेना भी दूभर हो जाता है। वहीं रिपोर्ट्स के मुताबिक उदयपुर, कोटा जैसे शहरों में पीएम 2.5 का स्तर सबसे अधिक पाया जा रहा है। हालिया रिपोर्टस में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेताया है कि लंबे समय तक वायु प्रदूषण वाले स्थानों पर रहने वाले लोगों में कार्डियक अरेस्ट जैसे हृदय रोग और इससे होने वाली मौत का खतरा अधिक हो सकता है।
वैज्ञानिकों ने चेताया: बढ़ रही है कार्डियक अरेस्ट की समस्या, इस वजह से दिल्ली-राजस्थान के लोगों में खतरा अधिक
वायु-प्रदूषण और हृदय रोगों का खतरा
अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि वायु प्रदूषण, कार्डियक अरेस्ट जैसी गंभीर स्थितियों का कारण बन सकता है। अध्ययन में वैज्ञानिकों ने कम समय के लिए गैसीय और सूक्ष्म कण प्रदूषकों और कार्डियक अरेस्ट की घटनाओं के बीच संबंध की जांच की। दक्षिणी लोम्बार्डी में किए गए इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि सूक्ष्म कणों के संपर्क में लंबे समय तक रहने वाले लोगों में तो गंभीर खतरा होता ही है, साथ ही अशुद्ध वायु में कुछ समय तक रहना भी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।
क्या कहते हैं अध्ययनकर्ता?
इटली में आईआरसीसीएस पोलीक्लिनिको सैन मैटेओ फाउंडेशन के संस्थापक और अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ फ्रांसेस्का आर जेंटिल कहते हैं, हमने सात सामान्य प्रदूषकों का अध्ययन किया है। इस दौरान पाया गया कि प्रदूषकों में वृद्धि सीधे तौर पर हृदय के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है। अध्ययन के निष्कर्ष से पता चलता है कि जिन देशों में वायु की अशुद्धि के मामले लगातार रिपोर्ट किए जा रहे हैं, वहां की सरकार और संस्थाओं को इस दिशा में विशेष रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है। खराब हवा के संपर्क में रहने वाले लोग गंभीर रूप से बीमारी की चपेट में आ सकते हैं।
वायु प्रदूषण और कोरोना का संबंध
वायु प्रदूषण, कोरोना के मामलों को भी बढ़ा सकता है। इसी से संबंधित इटली में किए गए एक अध्ययन में पीएम2.5 के बढ़ते स्तर के साथ कोरोनोवायरस के मामलों को जोड़कर बताया गया था। अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि बायोमास जलने के दौरान उत्सर्जित ब्लैक कार्बन के माध्यम से कोरोना के वायरस का संचरण हो सकता है। इसके अलावा पुणे स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेटिओरॉलॉजी द्वारा किए गए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने कोरोना के प्रसार के लिए ब्लैक कार्बन उत्सर्जन को ज्यादा खतरनाक बताया है।
वायु प्रदूषण से मानसिक रोगों का भी खतरा
हृदय रोग और कोरोना के संचरण के साथ वायु प्रदूषण कई तरह के मानसिक रोगों का भी कारण बन सकता है। एक अध्ययन के आधार पर वैज्ञानिकों ने बताया कि वायु प्रदूषण (पीएम 2.5 या 2.5 माइक्रोमीटर) वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में डेमेंशिया का खतरा अधिक देखा जा रहा है। इन्वायरमेंटल हेल्थ प्रॉस्पेक्टिव नामक जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में इस बात की पुष्टि की गई है।
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स्रोत और संदर्भ:
Common air pollutants linked with increased risk of cardiac arrest
अस्वीकरण नोट: यह लेख ईएससी कांग्रेस 2021 में प्रस्तुत किए गए शोध के निष्कर्ष के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। ज्यादा जानकारी के लिए आप अपने चिकित्सक से संपर्क कर सकते हैं।