दुनियाभर में सदियों से ग्रीन-टी का सेवन तमाम तरह के स्वास्थ्य लाभ के लिए किया जाता रहा है, भारत में भी पिछले कुछ दशकों से इसकी मांग तेजी से बढ़ी है। अध्ययनों से पता चलता है कि ग्रीन टी का सेवन कई गंभीर बीमारियों जैसे हृदय रोग, कैंसर और वजन कम करने में बेहद फायदेमंद हो सकती है। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सस्टेनेबल डेवलपमेंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पानी के बाद चाय, दुनिया में दूसरा सबसे ज्यादा पिया जाने वाला पेय है। ग्रीन टी को इसके फायदों के लिए काफी सालों से प्रयोग में लाया जाता रहा है। ग्रीन-टी अनऑक्सीडाइज़्ड पत्तियों से बनाई जाती है, यही कारण है कि इसमें सबसे ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट और फायदेमंद पॉलीफेनॉल्स का मात्रा पाई जाती है।
अध्ययन: जानिए कोरोना में कैसे फायदेमंद साबित हो सकती है ग्रीन-टी? इन रोगों से भी देती है सुरक्षा
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कोरोना में कैसे लाभकारी है ग्रीन टी
आरएससी जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया है कि ग्रीन टी का सेवन इम्यूनिटी बढ़ाने के साथ कोविड-19 से लड़ने में भी शरीर के लिए मददगार हो सकता है। ग्रीन टी में पाया जाने वाला 'गैलोकैटेचिन' नामक एक यौगिक इसे कोरोना के खिलाफ काफी प्रभावी बना देता है। ग्रीन-टी का लंबे समय से दुनिया भर में तमाम फायदों के लिए सेवन किया जाता रहा है। यह अपने चिकित्सीय और प्रतिरक्षा-बढ़ाने वाले गुणों के लिए काफी कारगर मानी जाती है। ब्रिटेन के स्वानसी विश्वविद्यालय में हाल ही में किए गए इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने कोविड-19 से लड़ने में ग्रीन टी की भूमिका के बारे में लोगों को बताया है।
गैलोकैटेचिन यौगिक है काफी महत्वपूर्ण
अध्ययन के लेखक डॉ सुरेश मोहनकुमार बताते हैं, ''प्रकृति हमेशा से तमाम तरह के गंभीर रोगों के इलाज का खजाना समेटे हुए है। कोरोना महामारी आने के बाद हम उसी खजाने से इसके उपचार को खोजने के प्रयास में लगे हुए थे। हमने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से पहले से ही ज्ञात प्राकृतिक यौगिकों की जांच शुरू की। विभिन्न यौगिकों के अध्ययन के दौरान हमने पाया कि ग्रीन-टी में पाया जाने वाला गैलोकैटेचिन यौगिक कोरोना वायरस से मुकाबले में अच्छे परिणाम दे सकता है। इसे इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए भी प्रयोग में लाया जा सकता है, स्वाभाविक रूप से इसमें मौजूद यौगिक कोरोना से मुकाबले के लिए भी शरीर को मजबूती देंगे।
कई तरह के कैंसर को कम करने में सहायक
अध्ययन बताते हैं कि जिन देशों में ग्रीन टी का सेवन अधिक होता है, वहां कुछ प्रकार के कैंसर की दर कम होती है। साल 2020 में डेटाबेस की समीक्षा के अंतर्गत वैज्ञानिकों ने पाया कि इसका सेवन इंसानों में कैंसर के जोखिम को कम कर सकता है। शोधकर्ताओं ने इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए 1.1 मिलियन (11 लाख) प्रतिभागियों पर किए गए 142 अध्ययनों का आकलन किया। इसके अलावा एनेमिल एंट टेस्ट ट्यूब अध्ययनों में पाया गया कि ग्रीन-टी का सेवन स्तन, मूत्राशय, कोलोरेक्टल (आंत्र), फेफड़े, प्रोस्टेट, त्वचा और पेट के कैंसर के खतरे को कम कर सकती है।
हृदय रोगों से मृत्यु का खतरा हो सकता है कम
साल 2006 में किए गए के एक अध्ययन में बताया गया कि ग्रीन-टी पीने वाले लोगों में हृदय रोग के कारण मौत का खतरा कम होता है। 11 साल तक किए गए इस अध्ययन में 40-79 आयु वर्ग के 40,000 से अधिक जापानी प्रतिभागियों को शामिल किया गया। इसमें पाया गया कि जिन प्रतिभागियों ने प्रति दिन कम से कम पांच कप ग्रीन टी पी थी, उनमें हृदय रोग के कारण मृत्यु दर का जोखिम कम पाया गया था। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सेहत के आधार पर ग्रीन-टी के सेवन की मात्रा को ध्यान में रखने की भी सलाह देते हैं।
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स्रोत और संदर्भ:
Identification of (2R,3R)-2-(3,4-dihydroxyphenyl)chroman-3-yl-3,4,5-trihydroxy benzoate as multiple inhibitors of SARS-CoV-2 targets; a systematic molecular modelling approach
अस्वीकरण नोट: यह लेख मेडिकल वेबसाइट्स से एकत्रित की गई जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। ज्यादा जानकारी के लिए आप अपने चिकित्सक से संपर्क कर सकते हैं।