बच्चों में ऑटिज्म, वैश्विक स्तर बढ़ती हुई समस्या है जो उनके क्वालिटी ऑफ लाइफ के लिए समस्याएं बढ़ा देती है। इससे प्रभावित बच्चों के लिए दूसरों के साथ बातचीत करना, सीखने और चीजों को समझने की क्षमता कम हो सकती है, यह व्यवहार में परिवर्तन का भी कारण बन सकती है। मसलन ऑटिज्म के शिकार बच्चों के लिए सामान्य जीवन के कई कार्यों को करने में समस्या हो सकती है।
कामयाबी: कहीं आपके बच्चे को ऑटिज्म की समस्या तो नहीं? इस ऐप की मदद से आसानी से लगा सकेंगे पता
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दिल्ली में अध्ययन के दिखे अच्छे परिणाम
राजधानी दिल्ली में इस ऐप को लेकर अध्ययन किया गया। ऑटिज्म जर्नल में शुक्रवार को प्रकाशित परिणाम के मुताबिक यह ऐप ऑटिज्म स्पेक्ट्रम की समस्या के शिकार लाखों बच्चों में समय रहते इसकी स्क्रीनिंग में मदद करेगा। जिससे उन्हें सही उपचार मिल सके और जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार आ सकेगा।
भारत, ब्रिटेन और अमेरिका के शोधकर्ताओं ने दिल्ली के कम संसाधन वाले इलाकों में रहने वाले दो से सात साल के 131 बच्चों के साथ START (स्क्रीनिंग टूल फॉर ऑटिज्म रिस्क यूजिंग टेक्नोलॉजी) नामक ऐप का परीक्षण किया। जिसके बेहतर परिणाम देखे गए हैं।
स्टार्ट ऐप के बारे में जानिए
स्टार्ट ऐप में मोबाइल फोन या कंप्यूटर पर खेल, प्रश्नों, छवियों और एक्टिविटी (जैसे बुलबुले फोड़ना और पैटर्न और छवियों को देखना) के माध्यम से बच्चों के कौशल क्षमता, मोटोर स्किल आदि का आसानी से पता लगाया जा सकेगा। शोधकर्ताओं ने कहा कि ऐप किसी भी न्यूरोडेवलपमेंटल विकार वाले बच्चों की पहचान करने में 86 प्रतिशत सटीक है, विशेष रूप से ऑटिज्म की पहचान करने में इसे 78 प्रतिशत तक कारगर पाया गया है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
ईस्ट एंग्लिया विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर और सह-लेखक टेओडोरा ग्लिगा कहते हैं, यह ऐप हमें आशा देती है कि हम एक दिन वित्तीय या सांस्कृतिक बाधाओं की परवाह किए बिना, जहां भी आवश्यक हो ऑटिज्म का समय पर निदान प्रदान कर सकते हैं। ऐप में माता-पिता के लिए प्रश्न भी शामिल हैं। ऐप, सभी अंकों को मिलाकर ऑटिस्टिक बच्चों की पहचान में मदद कर सकती है। इसका उपयोग करना भी आसान है, बच्चों के लिए इसमें भाग लेना मजेदार है।
ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर के बारे में जानिए
ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) एक न्यूरोलॉजिकल और विकासात्मक विकार है जो प्रभावित करता है कि बच्चे दूसरों के साथ कैसे बातचीत-संवाद करते हैं, चीजों को किस तरह से सीखते हैं और लोगों से कैसा व्यवहार करते हैं। ऑटिज्म का निदान किसी भी उम्र में किया जा सकता है, हालांकि इसके लक्षण आमतौर पर दो साल की आयु तक दिखने लगते हैं। कुछ प्रकार की थेरेपी के माध्यम से बच्चों में लक्षणों को सुधार करके जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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