आर्टिफिशियल स्वीटनर यानी चीनी के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल की जाने वाली कृत्रिम मिठास वाली चीजें शरीर के लिए फायदेमंद हैं या हानिकारक, इसपर लंबे समय से चर्चा होती रही है। इस बीच गुरुवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि इससे कैंसर होने का खतरा हो सकता है। स्वास्थ्य संगठन ने कहा, नॉन शुगर स्वीटनर 'एस्पार्टेम' संभवत: कार्सिनोजेनिक प्रभावों वाला हो सकता है, जो इंसानों में कैंसर का कारण बन सकता है। गौरतलब है कि एस्पार्टेम, एक कार्बनिक यौगिक है, यह शुगर फ्री वाली चीजों में इस्तेमाल होता आ रहा है।
WHO की चेतावनी: आर्टिफिशियल स्वीटनर से हो सकता है कैंसर का खतरा, इन घरेलू उत्पादों में भी इसकी मात्रा
घरेलू उत्पाद में होता रहा है इस्तेमाल
डब्ल्यूएचओ ने बताया, एस्पार्टेम कृत्रिम (रासायनिक) स्वीटनर है जिसका उपयोग विभिन्न खाद्य और पेय उत्पादों में किया जाता है, जिसमें डाइट ड्रिंक, च्यूइंग गम, जिलेटिन, आइसक्रीम, डेयरी उत्पाद जैसे दही, टूथपेस्ट और खांसी की दवा और चबाने वाली विटामिन की दवाएं शामिल हैं।
आईएआरसी की मोनोग्राफ प्रोग्राम विशेषज्ञ डॉ मैरी शुबाउर-बेरिगन कहती हैं, मनुष्यों और जानवरों में एस्पार्टेम के कैंसरकारक होने के साक्ष्य सीमित हैं, इसे विस्तृत ढंग से समझने के लिए हमें और अधिक अध्ययन की जरूरत है, पर सीमित साक्ष्य भी विचार करने योग्य हैं।
एस्पार्टेम के कारण लिवर कैंसर का जोखिम
डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया, समिति ने पुष्टि की है कि इसका सीमित सेवन किया जा सकता है। चूंकि कैंसर, वैश्विक स्तर पर बढ़ते गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों में से एक है, इसलिए यह आकलन महत्वपूर्ण हो जाता है। एस्पार्टेम को अब तक के अध्ययनों में लिवर कैंसर के जोखिम को बढ़ाते हुए पाया गया है। इसके अन्य संभावित खतरों के बारे में जानने के लिए अध्ययन किया जा रहा है।
डीएनए में क्षति के भी मिले हैं साक्ष्य
आर्टिफिशियल शुगर से होने वाले संभावित दुष्प्रभावों को समझने के लिए किए गए अन्य अध्ययनों में भी जोखिमों को लेकर अलर्ट किया जाता रहा है। जर्नल ऑफ टॉक्सिकोलॉजी एंड एनवायरनमेंटल हेल्थ में प्रकाशित एक रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने पाया कि इसमें सुक्रालोज 6-एसीटेट नाम का एक रसायन पाया गया है जो संभावित रूप से आपके डीएनए को नुकसान पहुंचा सकता है। ये रसायन "जीनोटॉक्सिक" हो सकता है, जिसका अर्थ है कि यह कोशिकाओं के भीतर जेनेटिक इंफर्मेशन को नुकसान पहुंचाता है।
आर्टिफिशियल स्वीटनर के इस्तेमाल को लेकर चेतावनी
यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि आर्टिफिशियल स्वीटनर के इस्तेमाल की शुरुआत, चीनी से शरीर को होने वाले दुष्प्रभावों को कम करने के लिए हुई थी। आर्टिफिशियल स्वीटनर, चीनी जैसा मीठा स्वाद तो देते हैं और इसमें कैलोरी न के बराबर होती है और इससे ब्लड शुगर बढ़ने का भी खतरा नहीं रहता है। हालांकि शोधकर्ता चिंता जताते रहे हैं कि इसमें मौजूद कई तत्व हानिकारक दुष्प्रभावों वाले हो सकते हैं।
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स्रोत और संदर्भ
Aspartame hazard and risk assessment results released
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