Medically Reviewed by Dr. I.N. Vajpai
न्यूरो सर्जन
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एम.एस (जनरल सर्जरी), एमसीएच (न्यूरो सर्जरी), उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
अनुभव- 45 वर्ष
रीढ़ की हड्डी का दर्द वाकई बेहद परेशानी का सबब बन जाता है। इसकी हड्डियों की संरचना जितनी जटिल है उससे ज्यादा इसके शारीरिक महत्व भी होते हैं। रीढ़ की हड्डी के जोड़ स्पाइनल में बेहद सुरक्षित रहते हैं। इन जोड़ों का सीधा संबंध दिमाग से होता है। मस्तिष्क को सूचना आदान प्रदान करने में रीढ़ की हड्डियों की उपयोगिता जगजाहिर है। वैसे तो कई बेहद सामान्य कारण होते हैं जो इस तरह के दर्द का कारण बनते हैं, लेकिन रीढ़ की हड्डी का ट्यूमर बेहद जटिलता पैदा कर सकता है। रीढ़ के किसी भी हिस्से में हुई गांठ वैसे तो कोशिकाओं और ऊतकों का एक समूह होता है जो दिमाग से सीधा संबंध वाली तरंगों के वेग को रोकने का काम करता है। इस समस्या से इंसान को मानसिक रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। रीढ़ की समस्याओं की कई वजहें होती हैं और इसे रोक पाने में कई तत्व अपनी भूमिका का निर्वाह करते हैं। आइए जानते हैं रीढ़ की हड्डी में होने वाले दर्द के लक्षणों और बचाव के उपायों के बारे में...
सलाह: अगर आपको भी दिखते हैं ये लक्षण तो हो सकता है रीढ़ की हड्डी में दर्द, ऐसे करें बचाव
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कमर से लेकर सिर तक जाने वाली रीढ़ की हड्डी के दर्द को स्पॉन्डिलाइटिस कहते हैं। यह ऐसा दर्द है जो कभी नीचे से ऊपर और कभी ऊपर से नीचे की ओर बढ़ता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि बढ़ती उम्र, बैठने का गलत तरीका, खराब जीवनशैली, व्यायाम न करना, अनियंत्रित डायबिटीज, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल आदि स्पॉन्डिलाइटिस के प्रमुख कारण होते हैं।
रीढ़ की हड्डी में होने वाले दर्द के लक्षण
- सुन्नपन या झुनझुनी का अहसास होना
- गर्दन, पीठ, कमर में दर्द और जकड़न
- लिखने में समस्या
- भोजन करने में समस्या
- चलने में कठिनाई होना
- गंभीर मामलों में मल मूत्र संबंधी समस्याएं उत्पन्न होना
रीढ़ की हड्डी में दर्द की वजह
- सोने या बैठने की गलत मुद्रा
- तनाव
- मोटापा
- कमजोर हड्डियां
रीढ़ की हड्डी में होने वाले दर्द से बचाव के उपाय
- नियमित रूप से व्यायाम करें
- अगर देर तक गाड़ी चलाते हैं, तो ऐसी स्थिति में पीठ को सहारा देने के लिए तकिया लगाएं।
- कुर्सी पर हमेशा सीधे अपनी पीठ सटा कर बैठें
- कंप्यूटर पर काम करते समय आगे की तरफ झुकने की जगह अपने कंप्यूटर के मॉनिटर को सीधा रखें
- अगर कंप्यूटर पर देर तक काम करते हैं तो थोड़ी-थोड़ी देर में कुर्सी से उठते रहें, ताकि पीठ दर्द की समस्या न हो
- अधिक समस्या होने पर डॉक्टर से सलाह लें
नोट: डॉ. आईएन वाजपई अत्यधिक योग्य और अनुभवी न्यूरो सर्जन हैं। इन्होंने लखनऊ के केजीएमसी से अपना एमबीबीएस किया है। इसके बाद इन्होंने जनरल सर्जरी में एमएस किया और न्यूरो सर्जरी में एमसीएच की पढ़ाई की है। इन्होंने 1996 में कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में काम किया और 2012 में प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष के रूप में रिटायर हुए। डॉक्टर आईएन वाजपाई आईएमए एंड न्यूरोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉक्टर वाजपई को 45 वर्षों का अनुभव है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।