Sore Throat Reasons: मौसम बदलने के साथ वातावरण में कई प्रकार के वायरस-बैक्टीरिया और अन्य संक्रामक तत्व सक्रिय हो जाते हैं। इन्फ्लूएंजा वायरस उनमें सबसे प्रमुख है जिसके कारण आपको सर्दी-जुकाम और बुखार जैसी दिक्कतें होती हैं। ये वायरस अमूमन हल्के स्तर का होता है, इससे होने वाली बीमारी कुछ समय में ही ठीक भी हो जाती है।
Sore Throat: सर्दी-जुकाम के साथ गले में खराश क्यों होने लगती है? क्या है इसकी वजह और कैसे पाएं आराम
- गले में खराश को मेडिकल की भाषा में फैरिंजाइटिस (ग्रसनीशोथ) भी कहा जाता है, आमतौर पर वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण के कारण होता है। इससे आपको गले के पिछले हिस्से में चुभन या जलन का एहसास हो सकता है।
गले में खराश की दिक्कत होती क्यों है?
गले में खराश को मेडिकल की भाषा में फैरिंजाइटिस (ग्रसनीशोथ) भी कहा जाता है, आमतौर पर वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण के कारण ऐसा होता है। इस वजह से आपको गले के पिछले हिस्से में चुभन या जलन का एहसास हो सकता है। गले में खराश के ज्यादातर लक्षण तीन से दस दिनों में ठीक हो जाते हैं।
स्ट्रेप थ्रोट जैसे बैक्टीरियल संक्रमण भी गले में खराश का कारण बन सकते हैं। इसके अलावा हवा में शुष्कता, वायु प्रदूषण और यहां तक कि आवाज के ज्यादा इस्तेमाल के कारण भी कई लोगों को गले में जलन हो सकती है, इसे गला बैठना भी कहा जाता है।
अब सवाल ये है कि ये दिक्कत होती कैसे है?
निगलने-बोलने में भी हो सकती है कठिनाई
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सर्दी-जुकाम आमतौर पर फ्लू वायरस की वजह से होता है। ये छोटे-छोटे कीटाणु नाक और गले में प्रवेश कर जाते हैं। गले के अंदर एक नरम परत होती है ये वायरस वहां पर चिपकने लगते हैं।
इस स्थिति में हमारे शरीर के अंदर का सुरक्षा तंत्र यानी इम्यून सिस्टम इनसे मुकाबला करना शुरू कर देता है। इम्यून सिस्टम के इस प्रकार के प्रतिक्रिया के कारण गले में सूजन हो जाती है, जिसके कारण आपको गले में दर्द, सूजन और निगलने में कठिनाई हो सकती है।
इससे कैसे पाएं आराम?
गले में खराश होने की एक और बड़ी वजह है, इस दौरान कम पानी पीना। पानी कम पीने से गला सूख जाता है, जिसके कारण और भी दिक्कत होने लगती है। डॉक्टर कहते हैं, आमतौर पर ये ज्यादा समस्या वाली बात नहीं होती है।
गले में खराश किस वजह से है, उसका उपचार करके इससे आसानी से आराम पाया जा सकता है। वायरल संक्रमण आमतौर पर एक सप्ताह के भीतर अपने आप ठीक हो जाते हैं। हालांकि दिक्कतों को कम करने के लिए ओवर-द-काउंटर (ओटीसी) दवाओं से राहत मिल सकती है।
बैक्टीरियल संक्रमण की स्थिति में आपको एंटीबायोटिक दवाओं की आवश्यकता हो सकती है। हालांकि ये दवाएं सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर ही लेनी चाहिए।
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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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