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Cancer: ब्लैडर कैंसर के खतरे को छह गुना तक बढ़ा देती है ये आदत, समय पर पहचाने जाएं लक्षण तो बच सकती है जान

Thu, 20 Jun 2024 11:08 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 20 Jun 2024 11:08 AM IST
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Smoking increase the risk of bladder cancer know its prevention tips in hindi
ब्लैडर कैंसर का खतरा - फोटो : istock

कैंसर दुनियाभर में तेजी से बढ़ती बीमारी है, जिसके कारण हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। ब्लैडर यानी मूत्राशय के कैंसर के मामलों में भी वैश्विक स्तर पर उछाल देखा जा रहा है। ब्लैडर कैंसर, मूत्राशय की कोशिकाओं में शुरू होता है। अगर आपके पेशाब से खून आता है, पेशाब करने में दर्द होता है या फिर बार-बार पेशाब जाने की जरूरत महसूस होती है तो इसे ब्लैडर कैंसर का संकेत माना जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, महिलाओं की तुलना में पुरुषों में इस कैंसर का खतरा अधिक देखा जाता रहा है।



ब्लैडर कैंसर के बढ़ते जोखिमों और इसके कारणों को समझने के लिए किए गए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने धूम्रपान को इसका प्रमुख जोखिम कारक माना है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में निदान किए गए इस कैंसर के 50-60 फीसदी मामलों की प्रमुख वजह भी धूम्रपान है। अगर आप भी धूम्रपान करते हैं तो इसे तुरंत छोड़ दीजिए।

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धूम्रपान के कारण होने वाली समस्या - फोटो : istock

धू्म्रपान के कारण ब्लैडर कैंसर का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, धूम्रपान की आदत मूत्राशय के कैंसर के खतरे को छह गुना तक बढ़ देती है। सिगरेट पीने से मूत्र में हानिकारक रसायन जमा होने से मूत्राशय कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। जब आप धूम्रपान करते हैं, तो आपका शरीर धुएं में मौजूद रसायनों को संसाधित करता है और उनमें से कुछ को आपके मूत्र में उत्सर्जित करता है। ये हानिकारक रसायन आपके मूत्राशय की परत को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे आपके कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

इसी तरह से कुछ प्रकार के रसायनों के अधिक संपर्क में रहने के कारण भी आप मूत्राशय के कैंसर के शिकार हो सकते हैं। 

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मूत्राशय के कैंसर के मामले - फोटो : istock

इन जोखिम कारकों को भी जानना जरूरी

धूम्रपान के कारण ब्लैडर कैंसर का जोखिम तो बढ़ता ही है इसके अलावा भी कई अन्य जोखिम कारक हैं जिनको लेकर सभी लोगों को गंभीरता से ध्यान देते रहने की जरूरत होती है। उम्र बढ़ने के साथ मूत्राशय कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है, हालांकि यह किसी भी उम्र में हो सकता है। 55 साल से अधिक उम्र के लोगों में इस कैंसर का खतरा अधिक देखा जाता रहा है। 

इसके अलावा यदि आपके परिवार में पहले भी किसी की ब्लैडर कैंसर रहा है तो अन्य लोगों में भी इसका जोखिम हो सकता है।

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पेशाब से संबंधित समस्याएं - फोटो : istock

कैसे करें इसके लक्षणों की पहचान?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कैंसर कोई भी हो, अगर इसके लक्षणों की समय पर पहचान होकर इलाज शुरू हो जाए तो कैंसर के फैलने का खतरा कम हो सकता है। अगर आपको लगता है कि आपके पेशाब का रंग कुछ समय से बदला दिख रहा है, उसमें खून आ रहा है तो शीघ्रता से डॉक्टर से मिलकर इसकी जांच करवाएं। पेशाब में होने वाली समस्याओं के साथ कुछ लोगों को अक्सर पीठ में दर्द की दिक्कत भी बनी रहती है। 

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धूम्रपान से होने वाली समस्याएं - फोटो : freepik.com

कैसे करें ब्लैडर कैंसर के जोखिमों से बचाव?

मूत्राशय कैंसर को रोकने का कोई सटीक तरीका नहीं है, फिर भी आप अपने जोखिम को कम करने में मदद के लिए कुछ प्रयास कर सकते हैं। अगर आप धूम्रपान करते हैं, तो इसे तुरंत छोड़ दें। धूम्रपान छोड़ने से आप इस कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं। धूम्रपान के अलावा जो लोग रसायनों के अधिक संपर्क में रहते हैं उनमें भी कैंसर विकसित होने का खतरा अधिक देखा जाता है। 

आहार में  विभिन्न प्रकार के रंगीन फलों और सब्जियों को शामिल करना शरीर को स्वस्थ रखने और कैंसर के खतरे से बचाव करने का एक तरीका हो सकता है। फलों और सब्जियों में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट कैंसर के जोखिमों को कम करने में मदद कर सकते हैं।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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